प्याज उत्पादन में आत्मनिर्भर चंदौली: प्याज की खेती पर सरकार देगी 20 हजार की सब्सिडी, गोदाम बनाने के लिए मिलेंगे 4.50 लाख 

 

चंदौली के किसानों के लिए खुशखबरी! मुख्यमंत्री राज्य औद्यानिक विकास योजना के तहत प्याज की खेती करने पर प्रति हेक्टेयर 20,000 रुपये का अनुदान मिल रहा है। साथ ही प्याज भंडारण के लिए सरकार भारी सब्सिडी दे रही है।

 
 

20 हेक्टेयर में होगी प्याज खेती

प्रति हेक्टेयर 20 हजार रुपये अनुदान

भंडारण गोदाम पर 4.50 लाख सब्सिडी

'पहले आओ पहले पाओ' पर लाभ

पक्का जीएसटी बिल होना अनिवार्य है

चंदौली जिले के किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री राज्य औद्यानिक विकास योजना के तहत इस वर्ष चंदौली जिले में 20 हेक्टेयर क्षेत्रफल में प्याज की खेती का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य जिले को प्याज उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि स्थानीय स्तर पर खपत की पूर्ति हो सके।

अनुदान का गणित: किसे और कितना मिलेगा लाभ
योजना के अंतर्गत कुल 20 हेक्टेयर में से 15 हेक्टेयर सामान्य वर्ग के लिए और 5 हेक्टेयर अनुसूचित जाति व जनजाति (SC/ST) वर्ग के किसानों के लिए आरक्षित किया गया है। प्याज की खेती करने वाले पात्र किसानों को सरकार की ओर से 20,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की अनुदान राशि प्रदान की जाएगी। जिला उद्यान अधिकारी डॉ. शैलेंद्र देव दुबे ने बताया कि यह लाभ सीधे किसानों के बैंक खाते में भेजा जाएगा।

भंडारण के लिए 4.50 लाख रुपये की बड़ी सहायता
प्याज की फसल को सड़ने से बचाने और बाजार में सही दाम मिलने तक सुरक्षित रखने के लिए सरकार भंडारण गृह (गोदाम) के निर्माण पर भी सब्सिडी दे रही है। 50 मीट्रिक टन क्षमता वाले गोदाम, जिसकी कुल निर्माण लागत लगभग 6 लाख रुपये आती है, उस पर सरकार 4.50 लाख रुपये तक की सब्सिडी दे रही है। यह राशि दो किस्तों में डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से दी जाएगी।

पंजीकरण के लिए जरूरी शर्तें और दस्तावेज
योजना का लाभ लेने के लिए कुछ नियमों का पालन अनिवार्य है:----

  • -पक्का जीएसटी बिल: बीज या पौधों की खरीद का पक्का जीएसटी बिल होना आवश्यक है।
  • -पंजीकरण: इच्छुक किसानों को विभागीय पोर्टल या जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय में पंजीकरण कराना होगा।
  • -आवश्यक दस्तावेज: आवेदन के साथ खतौनी, आधार कार्ड, बैंक पासबुक की छायाप्रति और पासपोर्ट साइज फोटो जमा करना होगा।

'पहले आओ-पहले पाओ' के आधार पर चयन
जिला उद्यान अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि योजना का लाभ सीमित है, इसलिए 'पहले आओ-पहले पाओ' की नीति अपनाई जा रही है। उद्यान विभाग की टीम फसल का भौतिक सत्यापन करेगी, जिसके बाद अनुदान की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इच्छुक किसान जल्द से जल्द जिला उद्यान विभाग से संपर्क कर अपना पंजीकरण सुनिश्चित करा सकते हैं।