17 खाद-बीज की दुकानों की सैंपलिंग से हड़कंप, कृषि विभाग की संयुक्त टीम की छापेमारी 

 

किसानों को शुद्ध और सस्ती कीटनाशी दवाएं दिलाने के लिए चंदौली प्रशासन ने 17 दुकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। 11 रसायनों के नमूने भरे गए और एक दुकान का स्टॉक रजिस्टर अधूरा मिलने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

 
 

17 कृषि रक्षा केंद्रों पर औचक छापेमारी

कीटनाशी दवाओं के 11 नमूने लैब भेजे

स्टॉक रजिस्टर में खामियों पर कड़ा एक्शन

मिलावटखोरी रोकने के लिए डीएम का अभियान

संयुक्त टीम की कार्रवाई से मचा हड़कंप

चंदौली जिले में किसानों के हितों की रक्षा और उन्हें उच्च गुणवत्ता वाली कीटनाशी दवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। जिलाधिकारी चंद्रमोहन गर्ग के निर्देश पर मंगलवार को अधिकारियों की संयुक्त टीम ने जिले की 17 कृषि रक्षा रसायनों की दुकानों पर सघन छापेमारी की। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य बाजार में नकली कीटनाशकों की बिक्री रोकना और निर्धारित दरों पर दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

11 नमूने लिए गए, लैब में होगी जांच
जिला कृषि रक्षा अधिकारी स्नेह प्रभा के नेतृत्व में गठित संयुक्त टीम ने विभिन्न तहसीलों में स्थित खाद और बीज की दुकानों का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान टीम ने रसायनों की गुणवत्ता को परखने के लिए कुल 11 संदिग्ध कीटनाशकों के सैंपल लिए। इन नमूनों को राजकीय प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया है। यदि रिपोर्ट में दवाओं की गुणवत्ता मानकों के विपरीत पाई जाती है, तो संबंधित दुकानदारों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

लापरवाह दुकानदारों पर गिरी गाज
छापेमारी के दौरान न केवल दवाओं की गुणवत्ता, बल्कि स्टॉक रजिस्टर और बिक्री रसीदों की भी बारीकी से जांच की गई। निरीक्षण के दौरान एक प्रतिष्ठान के स्टॉक रजिस्टर में भारी विसंगतियां पाई गईं। कागजी रिकॉर्ड में हेराफेरी और पारदर्शिता की कमी मिलने पर विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दुकानदार को 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि स्टॉक में अंतर पाए जाने पर लाइसेंस भी निरस्त किया जा सकता है।

किसानों के हित में डीएम का कड़ा रुख
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि खेती-किसानी के सीजन में किसानों के साथ किसी भी प्रकार का छल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मिलावटखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए कृषि विभाग के साथ-साथ अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों को भी इस संयुक्त टीम में शामिल किया गया है। प्रशासन की इस कड़े रुख से अवैध और घटिया दवाएं बेचने वाले व्यापारियों में खलबली मची हुई है।