सैयदराजा रामलीला: अंगद का पैर नहीं हिला पाया रावण का कोई योद्धा, मंचन देखकर भावुक हुए दर्शक
चंदौली के सैयदराजा में रामलीला के दौरान विभीषण शरणागति, सेतुबंध और अंगद-रावण संवाद का भव्य मंचन हुआ। कलाकारों की अभिनय कला और चौपाइयों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
सैयदराजा में हुआ भव्य रामलीला मंचन
विभीषण शरणागति का भावुक दृश्य प्रस्तुत
समुद्र तट पर रामेश्वरम् शिवलिंग स्थापना
अंगद ने रावण की सभा में जमाया पैर
धर्म और मर्यादा का दिया गया संदेश
चंदौली जिले की सैयदराजा नगर पंचायत सैयदराजा के शिवानगर में आयोजित ऐतिहासिक श्री रामलीला में कलाकारों ने कई महत्वपूर्ण और भावनात्मक प्रसंगों का मंचन किया। लीला के दौरान विभीषण शरणागति, सेतुबंध-रामेश्वरम् स्थापना और अंगद-रावण संवाद के दृश्यों ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। व्यास पीठ से गूंजती रामायण की चौपाइयों और शास्त्रीय संगीत की सुरीली धुनों ने पूरे माहौल को भक्तिमय और रोमांच से भर दिया।
प्रभु श्रीराम ने विभीषण को गले लगाकर दिया शरण का संदेश
मंचन की शुरुआत में दिखाया गया कि जब रावण ने माता सीता को वापस लौटाने से साफ इनकार कर दिया और समझाने पर अपने भाई विभीषण का अपमान कर उन्हें लंका से निकाल दिया, तब विभीषण श्रीराम की शरण में पहुँचे। भगवान श्रीराम ने बिना किसी संकोच के उन्हें अपने गले से लगा लिया। इस दृश्य के जरिए समाज को यह खूबसूरत संदेश दिया गया कि जो भी सच्चे मन से प्रभु की शरण में आता है, ईश्वर उसके सारे अपराध क्षमा कर उसे अपना लेते हैं।
समुद्र तट पर रामेश्वरम् शिवलिंग की हुई स्थापना
इसके बाद समुद्र पार करने का प्रसंग दिखाया गया। श्रीराम ने समुद्र तट पर तीन दिनों तक मार्ग देने के लिए प्रार्थना की। जब रास्ता नहीं मिला, तो प्रभु ने क्रोध में धनुष उठा लिया। यह देख समुद्र देव प्रकट हुए और उन्होंने नल-नील के माध्यम से पुल बनाने का उपाय बताया। लंका पर चढ़ाई करने से पहले श्रीराम ने समुद्र तट पर विधि-विधान से रामेश्वर महादेव की स्थापना कर पूजा-अर्चना की, जिसे देखकर दर्शक जय श्रीराम के नारे लगाने लगे।
अंगद के पैर के सामने पस्त हुआ रावण का अहंकार
युद्ध की शुरुआत से पहले शांति का अंतिम प्रयास करते हुए बालि पुत्र अंगद को दूत बनाकर रावण की सभा में भेजा गया। अंगद ने रावण को समझाते हुए सीता जी को लौटाकर युद्ध टालने की सलाह दी। जब अहंकारी रावण नहीं माना, तो अंगद ने रावण की भरी सभा में अपना पैर मजबूती से जमा दिया। उन्होंने चुनौती दी कि यदि लंका का कोई भी योद्धा उनका पैर हिला दे, तो श्रीराम सीता जी को छोड़कर वापस लौट जाएंगे। रावण का कोई भी बलशाली वीर अंगद का पैर नहीं डिगा सका, जिससे रावण पूरी तरह निःशब्द और अपमानित महसूस करने लगा। इसके बाद रात्रि लीला को विश्राम दिया गया।
पत्रकारों का सम्मान और गणमान्य लोगों की मौजूदगी
मंचन के समापन पर श्री रामलीला समिति शिवानगर द्वारा कार्यक्रम को कवर कर रहे पत्रकारों और मीडिया बंधुओं का सम्मान किया गया। इस दौरान आयोजकों ने कहा कि रामलीला केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि हमें मर्यादा और धर्म के रास्ते पर चलने की सीख देती है। कार्यक्रम में समाजसेवी मीना सिंह, शकुंतला नाथ दुबे, पूर्व चेयरमैन मदन कुशवाहा, वरिष्ठ पत्रकार धीरेंद्र सिंह शक्ति, ओमकार केसरी, गोवर्धन तिवारी, राजेंद्र कसौधन, मोहनी सहित भारी संख्या में स्थानीय लोग और दर्शक मौजूद रहे।