चंदौली में समूह सखियों का हल्लाबोल: न्यूनतम मानदेय व भत्तों की मांग को लेकर बिछियां में दिया धरना, SDM को सौंपा ज्ञापन

चंदौली में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी सैकड़ों समूह सखियों ने बिछियां में धरना देकर श्रम मानक के अनुसार 14 हजार रुपये मानदेय और नियमितीकरण की मांग उठाई। उन्होंने एसडीएम को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

 
 

बिछियां में समूह सखियों का विशाल धरना

श्रम मानक अनुसार 14 हजार मानदेय मांग

एसडीएम सदर को सौंपा मुख्यमंत्री का ज्ञापन

मोबाइल और डेटा भत्ते की उठाई मांग

मांग पूरी न होने पर लखनऊ आंदोलन चेतावनी

चंदौली जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के अंतर्गत कार्य करने वाली समूह सखी, बैंक सखी और बुककीपर महिलाओं ने अपने अधिकारों के लिए मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को जिले भर के विभिन्न ब्लॉकों से पहुंची सैकड़ों महिलाओं ने बिछियां स्थित धरना स्थल पर एकत्र होकर जोरदार प्रदर्शन किया और पंचायत की।

धरना स्थल पर महिलाओं ने अपने श्रम के अनुरूप मानदेय न मिलने पर भारी असंतोष जताया। प्रदर्शन की सूचना मिलने के बाद सदर उपजिलाधिकारी (SDM) मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारी समूह सखियों से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन स्वीकार किया। एसडीएम ने ज्ञापन को शासन तक भेजने और स्थानीय स्तर की समस्याओं पर संवेदनशीलता से विचार करने का भरोसा दिलाया।

14 हजार रुपये मानदेय और नियमितीकरण की प्रमुख मांग
समूह सखी संघर्ष मोर्चा की संयोजक एवं प्रवक्ता राजेश्वरी चतुर्वेदी ने पंचायत में अपनी बात रखते हुए कहा कि समूह सखियां पिछले कई सालों से बिना किसी नियमित छुट्टी के हर दिन आठ घंटे से भी ज्यादा समय तक काम कर रही हैं। इसके बावजूद उन्हें उचित मानदेय नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि समूह सखियों को अन्य संविदा या राज्य कर्मचारियों की तरह नियमित किया जाए। साथ ही श्रम मानकों का ध्यान रखते हुए उनका न्यूनतम मानदेय 14 हजार रुपये प्रति माह तय किया जाए।

खुद के जेब से उठाना पड़ता है मोबाइल और डेटा का खर्च
मोर्चा की अध्यक्ष गीता मौर्या ने बताया कि समूह सखी, बैंक सखी और बुककीपरों को श्रम मानक के हिसाब से न तो सही मानदेय मिलता है और न ही कोई अतिरिक्त भत्ता या मेडिकल कवर की सुविधा दी जाती है। एक-एक समूह सखी के पास औसतन 15 समूहों की जिम्मेदारी होती है, जिनकी हर हफ्ते बैठक कराना अनिवार्य है। इसके लिए उन्हें रोजाना कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। 

उन्होंने आगे बताया कि साप्ताहिक बैठक कराने, बचत का हिसाब रखने, लोन दिलाने, सरकारी योजनाओं की जानकारी देने, ऑनलाइन डेटा अपलोड करने से लेकर लखपति दीदी, कर्मयोगी और आजीविका सखी जैसे तमाम कामों में काफी समय और मेहनत लगती है। इसके बावजूद मोबाइल फोन और इंटरनेट डेटा का सारा खर्च महिलाओं को अपनी जेब से ही उठाना पड़ता है।

मांगें न मानने पर लखनऊ कूच करने का दिया अल्टीमेटम
धरना दे रही महिलाओं ने सरकार से मांग की है कि उन्हें कार्य के लिए सरकारी मोबाइल फोन, मासिक डेटा भत्ता, मेडिकल सुविधा और स्थाई कर्मचारियों की तरह सुविधाएं दी जाएं। समूह सखियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि उनकी वाजिब मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया, तो जिले स्तर का यह आंदोलन राज्य स्तर पर पहुंचेगा और वे अपनी मांगों के समर्थन में लखनऊ कूच करने को बाध्य होंगी। इस पंचायत की अध्यक्षता सरस्वती देवी ने की और मंच संचालन राजेश्वरी चतुर्वेदी ने किया। इस दौरान कृष्णावती, सुभावती, उषा, सरिता सहित जिले की बड़ी संख्या में समूह सखियां मौजूद रहीं।