सैयदराजा शहीद दिवस कार्यक्रम : रणबांकुरों के बलिदान को किया नमन
 

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि स्वतंत्रता किसी जाति-पांति की देन नहीं, बल्कि सबके सामूहिक संघर्ष का परिणाम है।
 

28 अगस्त को मनाया गया सैयदराजा में शहीद दिवस

1942 को स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष को किया याद

सैयदराजा थाने पर ध्वजारोहण करके वीरों ने करवा दिया था आजाद

चंदौली जिले के सैयदराजा स्थित शहीद स्मारक पर 28 अगस्त को शहीद दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जनपद के जनप्रतिनिधियों एवं आमजन ने एकत्र होकर वीर शहीदों को पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। यह दिवस 28 अगस्त 1942 की ऐतिहासिक घटना की याद दिलाता है, जब सैयदराजा थाने पर तिरंगा फहराने के लिए स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजी हुकूमत का डटकर सामना किया था।

बताया जाता है कि भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 28 अगस्त 1942 को स्वतंत्रता सेनानियों ने सैयदराजा थाने पर ध्वजारोहण किया और उसे स्वतंत्र घोषित किया। इस संघर्ष में तीन वीर रणबांकुरों ने अपने प्राणों की आहुति दी तथा कई साथी गंभीर रूप से घायल हुए। हालांकि अंग्रेजों ने कुछ ही घंटों में थाने पर पुनः कब्जा कर लिया, लेकिन सेनानियों के इस बलिदान ने आज़ादी की लौ और प्रज्वलित कर दी। ठीक इसी तरह 16 अगस्त 1942 को धानापुर थाने पर भी वीर सेनानियों ने तिरंगा लहराकर स्वतंत्रता की अलख जगाई थी।

कार्यक्रम में सैयदराजा विधायक सुशील सिंह ने शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आजादी हमें इन महापुरुषों की कुर्बानियों के कारण मिली है। यदि उनका बलिदान न होता तो शायद आज भी हम गुलामी का जीवन जी रहे होते। राज्यसभा सांसद साधना सिंह ने कहा कि यह आयोजन हमें हमारे गौरवशाली इतिहास की याद दिलाता है और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि स्वतंत्रता किसी जाति-पांति की देन नहीं, बल्कि सबके सामूहिक संघर्ष का परिणाम है। विधान परिषद सदस्य धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि शहीदों का समर्पण ही हमें यहां एकत्र करता है और उनके जज्बे को लोगों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी हमारी है।

कार्यक्रम के अंत में शहीद स्मारक समिति के अध्यक्ष ने सभी के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि यदि इसी तरह लोगों का सहयोग मिलता रहा तो शहीद स्मारक की स्मृतियां सदैव जीवित रहेंगी।

इस प्रकार सैयदराजा का शहीद दिवस न केवल बलिदान को स्मरण कराता है बल्कि यह भी सिखाता है कि आजादी का मूल्य क्या है और इसे संजोकर रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।