UP-बिहार बॉर्डर पर सख्त पहरेदारी : भीषण गर्मी की मार झेल रहे हैं पुलिस के जवान, ऐसे ड्यूटी करने को मजबूर हैं सिपाही
चंदौली में अपराधियों और तस्करों पर नकेल कसने के लिए बंद पड़े बॉर्डर पिकेट फिर चालू कर दिए गए हैं। मगर बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जवानों को इस भीषण गर्मी में पेड़ों की छांव तले ड्यूटी करनी पड़ रही है। पूरी ग्राउंड रिपोर्ट पढ़ें।
बंद पड़े बॉर्डर पिकेट दोबारा सक्रिय
पुलिस अधीक्षक आकाश पटेल की बड़ी पहल
नौबतपुर पिकेट पर सुविधाओं का भारी टोटा
तेज गर्मी में पेड़ की छांव ही सहारा
जवानों के लिए पीने के पानी का संकट
चंदौली जिले की उत्तर प्रदेश और बिहार सीमा पर कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने तथा तस्करी एवं संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नजर रखने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक आकाश पटेल द्वारा सराहनीय पहल की गई है। एसपी के निर्देश पर जिले में पिछले एक साल से बंद पड़े सभी बॉर्डर पिकेटों को दोबारा सक्रिय कर दिया गया है। पिकेट दोबारा शुरू होने से सीमा पर चौकसी तो बढ़ गई है, लेकिन यहां तैनात पुलिसकर्मियों को मूलभूत सुविधाओं के घोर अभाव के चलते भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। तेज धूप और भीषण गर्मी के इस मौसम में जवान पिकेट छोड़कर पेड़ों की छांव में बैठकर ड्यूटी निभाने को विवश हैं।
पूर्व में बंद कर दिए गए थे जिले के सभी पिकेट
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सैयदराजा थाना क्षेत्र के अंतर्गत यूपी-बिहार बॉर्डर पर स्थित नौबतपुर पिकेट का निर्माण पूर्व पुलिस अधीक्षक हेमंत कुटियाल के कार्यकाल के दौरान कराया गया था। उस समय सीमावर्ती क्षेत्रों में अपराध नियंत्रण और अंतरप्रांतीय तस्करी पर प्रभावी तरीके से निगरानी रखने के लिए इसे शुरू किया गया था। हालांकि, बलिया जिले में हुए चर्चित नरही पिकेट कांड के बाद तत्कालीन पुलिस अधीक्षक आदित्य लांग्हे ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए जनपद के सभी पिकेटों को तत्काल प्रभाव से बंद करा दिया था। इसके बाद करीब एक वर्ष तक यह महत्वपूर्ण पिकेट पूरी तरह से बंद पड़े रहे।
अपराध पर लगाम लगाने के लिए वर्तमान एसपी की बड़ी पहल
अब वर्तमान पुलिस अधीक्षक आकाश पटेल ने सीमा क्षेत्र की सुरक्षा को और अधिक चाक-चौबंद बनाने के लिए इन बंद पिकेटों को दोबारा संचालित कराया है। पुलिस विभाग का मानना है कि यूपी-बिहार सीमा पर सक्रिय यह पिकेट अपराधियों, शराब तस्करों और अन्य अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण लगाने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। लेकिन विडंबना यह है कि पिकेटों को कागजों पर तो सक्रिय कर दिया गया, मगर वहां मुस्तैद रहने वाले जवानों के लिए जरूरी बुनियादी इंतजामों की घोर अनदेखी कर दी गई।
शेड और पानी जैसी जरूरी सुविधाओं का है भारी टोटा
नौबतपुर बॉर्डर पिकेट की जमीनी हकीकत आज यह है कि वहां न तो जवानों के बैठने के लिए पर्याप्त छाया या शेड की व्यवस्था है और न ही भीषण गर्मी में पीने के साफ पानी या आराम करने की कोई समुचित सुविधा मौजूद है। चिलचिलाती धूप में पुलिसकर्मी पिकेट रूम से दूर पेड़ों के नीचे बैठकर अपनी ड्यूटी पूरी कर रहे हैं। कई सुरक्षाकर्मियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उच्च अधिकारियों का आदेश होने के कारण वे मुस्तैदी से अपनी जिम्मेदारी तो निभा रहे हैं, लेकिन सुविधाओं के बिना इस मौसम में लंबे समय तक टिके रहना स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद कठिन है।
जवानों के साथ-साथ स्थानीय लोगों ने भी उठाई मांग
फील्ड में तैनात पुलिसकर्मियों का कहना है कि यदि बॉर्डर पिकेटों को सुरक्षा के लिहाज से दोबारा सक्रिय किया गया है, तो प्रशासन को वहां कम से कम बिजली, पंखे और शुद्ध पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं तत्काल उपलब्ध करानी चाहिए ताकि जवान बेहतर मानसिक और शारीरिक स्थिति में अपनी ड्यूटी निभा सकें। वहीं, स्थानीय नागरिकों का भी स्पष्ट मानना है कि बॉर्डर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए इन पिकेटों का संचालन बेहद जरूरी है, लेकिन अपनी जान जोखिम में डालकर चौबीस घंटे पहरेदारी करने वाले पुलिसकर्मियों की बुनियादी सहूलियतों की इस तरह अनदेखी करना न्यायसंगत नहीं है। फिलहाल पिकेट शुरू होने से सीमाई सुरक्षा पुख्ता होने की उम्मीद तो बंधी है, लेकिन जवानों की यह बेबसी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है।