विंध्य एक्सप्रेस-वे का भारी विरोध: चंदौली के 18 गांवों की 500 एकड़ उपजाऊ जमीन पर अधिग्रहण का खतरा, 27 जून को महापंचायत
उत्तर प्रदेश के प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेस-वे प्रोजेक्ट के लिए चंदौली के बरहनी ब्लॉक में 500 एकड़ उपजाऊ भूमि अधिग्रहित करने की तैयारी है। इससे नाराज 18 गांवों के 800 से अधिक किसान परिवारों ने 27 जून को महापंचायत बुलाकर बड़े आंदोलन का ऐलान कर दिया है।
विंध्य एक्सप्रेस-वे से प्रभावित होंगे 18 गांव
800 से ज्यादा किसानों की जमीन जाएगी
500 एकड़ उपजाऊ भूमि का होगा अधिग्रहण
विरोध में 27 जून को होगी महापंचायत
वैकल्पिक मार्ग तलाशने की उठ रही मांग
उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी और हाईटेक विंध्य एक्सप्रेस-वे परियोजना को लेकर चंदौली जिले के बरहनी ब्लॉक में विरोध की आग सुलगने लगी है। इस प्रस्तावित छह लेन एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए बरहनी ब्लॉक के 18 गांवों की बेहद उपजाऊ कृषि भूमि को अधिग्रहित करने की तैयारी चल रही है। शासन की इस योजना से क्षेत्र के किसानों में अपनी जमीनों को खोने का डर बैठ गया है, जिसके बाद गांव-गांव में बैठकें और जनजागरण अभियान शुरू कर दिया गया है।
किसानों का साफ तौर पर कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर उनकी रोजी-रोटी छीनना किसी भी कीमत पर सही नहीं है। यदि शासन और प्रशासन ने उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया और जबरन उपजाऊ भूमि का अधिग्रहण करने की कोशिश की, तो इस आंदोलन को और अधिक उग्र और व्यापक बनाया जाएगा। इसके लिए रणनीति भी तैयार कर ली गई है।
18 गांवों के 800 परिवारों पर मंडराया बड़ा संकट
इस बड़ी परियोजना के लिए बरहनी ब्लॉक के जिन 18 गांवों को चिन्हित किया गया है, वहाँ के किसानों की चिंताएं बेहद जायज हैं। शुरुआती आकलनों के मुताबिक, इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए करीब 500 एकड़ बेहद उपजाऊ कृषि भूमि को अधिग्रहित किए जाने के आसार हैं। इस बड़े भू-भाग के अधिग्रहण की वजह से क्षेत्र के लगभग 800 से भी अधिक किसान परिवार सीधे तौर पर प्रभावित होने वाले हैं।
आपको बता दें कि बरहनी और कंदवा क्षेत्र जिले के सबसे प्रमुख धान उत्पादक इलाकों में गिने जाते हैं। यहाँ की अधिकांश आबादी पूरी तरह से खेती-किसानी पर ही निर्भर है और यही उनकी आजीविका का एकमात्र सहारा है। ऐसे में इतनी बड़े पैमाने पर उपजाऊ जमीन के हाथ से चले जाने से क्षेत्र की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पूरी तरह से चरमरा जाएगी और हजारों लोगों के सामने पेट पालने का संकट खड़ा हो जाएगा।
चिरईगांव में जुटी भीड़, 27 जून को होगी महापंचायत
भूमि अधिग्रहण के इस गंभीर मामले को लेकर गुरुवार को चिरईगांव स्थित मां रेहड़ा भगवती मंदिर परिसर में 'भूमि बचाओ संघर्ष समिति' और विभिन्न किसान संगठनों के बैनर तले एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में भारतीय किसान संगठन और भारतीय किसान मजदूर संयुक्त यूनियन के पदाधिकारी और भारी संख्या में स्थानीय किसान शामिल हुए। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि इस दमनकारी नीति के खिलाफ आगामी 27 जून को बरहनी में एक विशाल महापंचायत का आयोजन किया जाएगा।
इस बैठक की अध्यक्षता भारतीय किसान मजदूर संयुक्त यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष सारनाथ सिंह नेताम ने की और संचालन अशोक सिंह ने किया। किसान नेताओं ने बताया कि उन्होंने भूमि अधिग्रहण के इस तानाशाही फैसले के विरोध में मई महीने में ही जिलाधिकारी (DM) को एक ज्ञापन सौंपा था। लेकिन अफसोस की बात यह है कि प्रशासन की तरफ से अब तक इस पर कोई भी ठोस या सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई है, जिसके कारण किसानों को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
अधिग्रहण के दायरे में आने वाले प्रमुख गांवों की सूची
विंध्य एक्सप्रेस-वे परियोजना के लिए बरहनी ब्लॉक के जिन गांवों की उपजाऊ जमीन को चिन्हित किया गया है, उनमें मुख्य रूप से अदसड़, अरंगी, बरहनी, महूजी, चारी, परेवा, बरठी कमरौर, नौबतपुर, मोहम्मदपुर, बगही, कुंभापुर, प्रीतमपुर, खरखोली, नेवादा, नारायणपुर, रामपुर, चिरईगांव और लक्ष्मणपुर शामिल हैं। इन सभी गांवों के किसानों को एकजुट करने के लिए समिति के सदस्य लगातार गांव-गांव जाकर चौपाल लगा रहे हैं और लोगों को जागरूक कर रहे हैं।
बैठक में मौजूद सुमंत सिंह अन्ना ने कहा कि हम पीढ़ियों से जिस जमीन पर खेती कर रहे हैं, उसे इतनी आसानी से नहीं छोड़ा जा सकता। वहीं अशोक यादव ने कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन ऐसा विकास किस काम का जो किसान को उसकी जमीन और आजीविका दोनों से ही हाथ धोने पर मजबूर कर दे। समिति के अध्यक्ष महेश्वर सिंह ने भी सरकार से किसानों के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए इस फैसले पर तुरंत पुनर्विचार करने की मांग की है।
क्या है विंध्य एक्सप्रेस-वे परियोजना और प्रशासन का रुख?
विंध्य एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश की एक बेहद महत्वाकांक्षी छह लेन परियोजना है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 330 किलोमीटर प्रस्तावित है। यह एक्सप्रेस-वे प्रयागराज को सोनभद्र से जोड़ेगा और यह मार्ग प्रयागराज, मिर्जापुर, वाराणसी और चंदौली होते हुए सोनभद्र तक जाएगा। इस पूरी परियोजना की अनुमानित लागत करीब 22,400 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह एक्सप्रेस-वे आगे चलकर गंगा एक्सप्रेस-वे और पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से भी जुड़ेगा, जिससे औद्योगिक विकास को गति मिलने की उम्मीद है।
किसानों की इन प्रमुख मांगों में उपजाऊ भूमि के बजाय वैकल्पिक बंजर मार्ग तलाशने, बिना सहमति के जमीन न लेने, बाजार मूल्य के अनुरूप उचित मुआवजा देने और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास व रोजगार की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग शामिल है। दूसरी तरफ, इस पूरे विवाद पर चंदौली के एडीएम राजेश कुमार ने बताया कि विंध्य एक्सप्रेस-वे सरकार की एक बड़ी और महत्वपूर्ण योजना है, जिसे हर हाल में पूरा किया जाना है। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान में इस परियोजना को लेकर स्थानीय स्तर पर कोई बड़ा या वास्तविक विरोध नहीं है और प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की जाएगी।