विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर यथार्थ नर्सिंग कॉलेज का आयोजन, मनोरोग विशेषज्ञ ने दिए तनाव से बचने के मूलमंत्र
10 अक्टूबर 2026 को चंदौली जिला अस्पताल में यथार्थ नर्सिंग कॉलेज के छात्रों और मनोचिकित्सकों ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया। कार्यक्रम में लोगों को तनाव, अवसाद और मानसिक बीमारियों से उबरने के उपाय बताते हुए जागरूक किया गया।
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस जागरूकता कार्यक्रम
यथार्थ नर्सिंग कॉलेज चंदौली अभियान
जिला अस्पताल में मानसिक स्वास्थ्य चर्चा
तनाव और अवसाद से बचाव उपाय
मानसिक बीमारियों से जुड़ी भ्रांतियां दूर
चंदौली जिला स्थित पंडित कमलापति त्रिपाठी जिला संयुक्त चिकित्सालय में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के मौके पर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। 10 अक्टूबर 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम की कमान यथार्थ नर्सिंग कॉलेज एंड पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट के बीएससी नर्सिंग पंचम सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं ने संभाली।
इस आयोजन का मुख्य मकसद आम लोगों को मानसिक सेहत के प्रति जागरूक करना था। इसके साथ ही समाज में मानसिक बीमारियों को लेकर फैली गलतफहमियों को दूर करना और मानसिक रूप से परेशान लोगों की मदद के लिए एक संवेदनशील माहौल तैयार करना इसका प्रमुख उद्देश्य रहा।
चिकित्सकों और विशेषज्ञों की गरिमामयी उपस्थिति
इस कार्यक्रम में एमडी साइकियाट्रिस्ट (मनोचिकित्सक) डॉ. नितेश सिंह, साइकियाट्रिक नर्स ममता कश्यप और काउंसलर अजय मुख्य रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम का मार्गदर्शन किया और मानसिक स्वास्थ्य देखभाल के विविध पहलुओं पर रोशनी डाली।
इसके अलावा, यथार्थ कॉलेज की फैकल्टी सदस्य गजाला नाजमीन, विजयलक्ष्मी और शमा के साथ-साथ बीएससी नर्सिंग के अनेक छात्र-छात्राएं भी मुस्तैद दिखे। अस्पताल में इलाज कराने आए मरीज और उनके तीमारदार भी बड़ी संख्या में इस अभियान का हिस्सा बने।
समग्र स्वास्थ्य का मजबूत स्तंभ है मानसिक सेहत
कार्यक्रम के दौरान एमडी साइकियाट्रिस्ट डॉ. नितेश सिंह ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस की अहमियत पर खुलकर चर्चा की। उन्होंने कहा कि जिस तरह शरीर को दुरुस्त रखने के लिए अच्छा खाना, कसरत और सही दिनचर्या चाहिए, ठीक उसी तरह दिमाग को तंदुरुस्त रखने के लिए सकारात्मक सोच और भावनात्मक संतुलन बेहद जरूरी है।
डॉ. सिंह ने समझाया कि मानसिक रूप से मजबूत व्यक्ति अपने दैनिक काम बेहतर तरीके से कर पाता है। वह विपरीत हालातों का निडर होकर सामना करता है और परिवार व समाज के साथ एक खुशहाल रिश्ता बनाए रखने में सक्षम होता है।
समस्या छिपाने के बजाय मदद मांगना जरूरी
आज की तेजी से बदलती लाइफस्टाइल में मानसिक सेहत पर असर पड़ना बेहद आम बात हो चुकी है। काम का बोझ, पारिवारिक कलह, आर्थिक तंगी, पढ़ाई का दबाव और सामाजिक परिस्थितियां अक्सर इंसान को चिंता, तनाव, अवसाद या नींद न आने जैसी दिक्कतों में धकेल देती हैं। डॉक्टर ने इस बात पर चिंता जताई कि लोग अक्सर समाज के डर या झिझक की वजह से अपनी दिमागी परेशानी किसी से शेयर नहीं करते। उन्होंने सलाह दी कि ऐसी स्थिति में खामोश रहने के बजाय तुरंत परिवार, किसी भरोसेमंद साथी या मनोचिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
मानसिक बीमारी कोई कमजोरी या पाप नहीं
मानसिक विकारों से जुड़ी भ्रांतियों पर प्रहार करते हुए डॉ. नितेश सिंह ने साफ किया कि मानसिक बीमारी कोई कमजोरी नहीं है। दिमागी समस्या से जूझ रहे व्यक्ति को समाज से अलग-थलग नहीं थलग किया जाना चाहिए, बल्कि उसे सहानुभूति और अपनेपन की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। सही समय पर सही जांच, काउंसलिंग और इलाज के जरिए किसी भी मानसिक परेशानी को पूरी तरह ठीक या नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे ऐसे मरीजों की बात ध्यान से सुनें और उन्हें डॉक्टर के पास ले जाने में मदद करें।
छात्रों के लिए स्पेशल टिप्स और टाइम मैनेजमेंट
विद्यार्थियों के जीवन में मानसिक स्वास्थ्य की भूमिका पर बात करते हुए मनोचिकित्सक ने कहा कि पढ़ाई, परीक्षा, करियर और भविष्य को लेकर होने वाली चिंता बच्चों की क्षमता को प्रभावित करती है। ऐसे में समय का सही बंटवारा, पूरी नींद, नियमित कसरत और संतुलित खानपान बेहद जरूरी है। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि अगर पढ़ाई का बोझ या कोई भी बात लगातार परेशान कर रही हो, तो बिना किसी झिझक के विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। मानसिक दबाव को अपने ऊपर हावी न होने देना ही सफलता की पहली सीढ़ी है।
नर्सिंग और काउंसलिंग की अहम भूमिका
कार्यक्रम के दौरान साइकियाट्रिक नर्स ममता कश्यप और काउंसलर अजय ने मानसिक इलाज में काउंसलिंग और देखभाल के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि मरीज की भावनाओं को समझना, उसकी बात को ध्यान से सुनना और उसे लगातार हौसला देना किसी भी दवा से ज्यादा तेजी से असर करता है। नर्सिंग स्टाफ और काउंसलर मरीज के साथ एक ऐसा भरोसा पैदा करते हैं, जिससे मरीज खुलकर अपनी बात रख पाता है और इलाज की प्रक्रिया काफी आसान व असरदार हो जाती है।
एक दिन नहीं, रोज की आदत बने जागरूकता
यथार्थ नर्सिंग कॉलेज के बीएससी नर्सिंग पंचम सेमेस्टर के छात्रों ने अस्पताल में आए मरीजों और उनके तीमारदारों से सीधा संवाद किया। छात्रों ने पम्फलेट और बातचीत के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के जरूरी नियमों की जानकारी दी। छात्रों का कहना था कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजगता सिर्फ किसी एक दिन के आयोजन तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इसे हमारी रोजाना की जिंदगी, सोच और सामाजिक व्यवहार का स्थायी हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
स्वस्थ और संवेदनशील समाज की ओर कदम
कार्यक्रम में फैकल्टी मेंबर्स और अस्पताल के मरीजों की सक्रिय भागीदारी ने इस जन-जागरूकता अभियान को बेहद सफल बनाया। उपस्थित लोगों ने विशेषज्ञों की बातों को ध्यान से सुना और अपनी शंकाओं का समाधान भी पाया। इस आयोजन ने यह बड़ा संदेश दिया कि मानसिक सेहत को प्राथमिकता देना, समय पर डॉक्टर से मिलना, अपनों का सहारा बनना और समाज का सही नजरिया ही एक स्वस्थ और संवेदनशील समाज की बुनियाद रखता है।