ADJ कोर्ट का बड़ा फैसला: नाबालिगों से रेप के मामले में गैंगस्टर चंदन पांडेय को 7 साल की सजा

चंदौली की एडीजे कोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट के मामले में फैसला सुनाते हुए शातिर अपराधी चंदन पांडेय को 7 साल के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।

 

चंदौली एडीजे कोर्ट का बड़ा फैसला

शातिर अपराधी चंदन पांडेय को सजा

गैंगस्टर एक्ट में सात साल की कैद

नाबालिगों से दुष्कर्म का आरोपी दोषी

बबुरी और इलिया थाने का मामला

 चंदौली जिले में स्थित एडीजे (एफटीसी-द्वितीय) पारितोष श्रेष्ठ की अदालत ने सोमवार को एक गंभीर आपराधिक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सुनवाई पूरी होने के बाद गैंगस्टर एक्ट के आरोपी चंदन पांडेय को दोषी करार देते हुए 7 साल के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।

कोर्ट में पेश किए गए ठोस साक्ष्य और तर्क
अदालत में सुनवाई के दौरान पुलिस प्रशासन की तरफ से पैरोकार सत्यप्रकाश ने आरोपी के खिलाफ मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत किए। वहीं, अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए अपर जिला शासकीय अधिवक्ता (एडीजीसी) अवधेश कुमार पांडेय ने कोर्ट में मजबूत कानूनी तर्क रखे। कोर्ट ने पेश किए गए सबूतों और वकीलों की बहस को सुनने के बाद आरोपी को गैंगस्टर एक्ट के तहत दोषी माना।

वर्ष 2016 से शुरू हुआ था अपराध का सिलसिला
सजा पाने वाला अपराधी चंदन पांडेय इलिया थाना क्षेत्र के लेहरा खास गांव का निवासी है। उसके खिलाफ सबसे पहला मामला वर्ष 2016 में इलिया थाने में दर्ज किया गया था, जो पांच लीटर कच्ची शराब और अवैध चाकू रखने से जुड़ा था। इसके बाद उसी वर्ष (2016 में) इलिया थाने में ही एक नाबालिग किशोरी के घर में घुसकर दुष्कर्म करने का गंभीर मुकदमा दर्ज हुआ।

सामूहिक दुष्कर्म और गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई
अपराध का दायरा बढ़ाते हुए आरोपी के खिलाफ वर्ष 2018 में बबुरी थाना क्षेत्र के एक गांव में एक अन्य नाबालिग किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म करने का मामला सामने आया। लगातार संगीन वारदातों को अंजाम देने और उसकी आपराधिक गतिविधियों को देखते हुए पुलिस ने वर्ष 2018 में बबुरी थाने में उसके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा कायम किया था।

एडीजे कोर्ट ने दी सख्त सजा
इसी 2018 के गैंगस्टर मामले में सोमवार को एडीजे कोर्ट ने अंतिम निर्णय सुनाया। कोर्ट ने चंदन पांडेय के लंबे आपराधिक इतिहास और पेश किए गए साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए उसे 7 साल के कारावास की सजा सुनाई। अर्थदंड जमा न करने पर आरोपी को अतिरिक्त कानूनी प्रावधानों का सामना करना पड़ेगा।