16 राज्यों तक फैले साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश, साइबर सेल ने पकड़ा अंतरराज्यीय गिरोह, लाखों का ट्रांजैक्शन उजागर
चंदौली में 16 राज्यों में फैले बड़े साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। अलीनगर पुलिस और साइबर सेल ने फर्जी आधार कार्ड से म्यूल खाते खोलकर लाखों की ठगी करने वाले दो शातिर बदमाशों को गिरफ्तार किया है। पूरी खबर पढ़ें।
चंदौली में बड़े साइबर गिरोह का पर्दाफाश
100 से अधिक म्यूल खातों का खुलासा
16 राज्यों तक फैला ठगी का नेटवर्क
फर्जी आधार से खोलते थे बैंक खाते
पुलिस ने दो शातिर आरोपियों को पकड़ा
चंदौली जिले में ऑनलाइन साइबर ठगी और म्यूल बैंक खातों के जरिए देशभर में वित्तीय धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के खिलाफ पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। अलीनगर पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने वीआईपी गेट मुगलसराय के पास, डीआरएम कार्यालय के समीप से दो शातिर आरोपियों को धर दबोचा।
यह कार्रवाई 10 अगस्त की रात को अंजाम दी गई, जब साइबर सेल और अलीनगर पुलिस संदिग्ध म्यूल खातों और साइबर फ्रॉड से जुड़े संदिग्धों की तलाश में चकिया तिराहे के पास मौजूद थी। उसी दौरान मुखबिर से मिली सटीक सूचना के आधार पर रात 9:52 बजे दोनों आरोपियों को घेरकर गिरफ्तार कर लिया गया।
16 राज्यों में फैला है नेटवर्क, 76 शिकायतें दर्ज
पुलिस के अनुसार, इस अंतरराज्यीय गिरोह का नेटवर्क देश के 16 राज्यों तक फैला हुआ है। जांच में सामने आया कि चिन्हित किए गए 17 म्यूल खातों के खिलाफ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर कुल 76 शिकायतें पहले से दर्ज हैं। इन शिकायतों के अध्ययन से पता चला है कि गिरोह ने देशभर के लोगों से करीब 29 लाख रुपये की ठगी की है।
बिहार और चंदौली के रहने वाले हैं गिरफ्तार आरोपी
पकड़े गए आरोपियों में बिहार के नवादा निवासी 30 वर्षीय नीतीश कुमार और चंदौली के सकलडीहा कोट निवासी 27 वर्षीय अमन शर्मा शामिल हैं। पुलिस ने इनके पास से 3 स्मार्टफोन, 8 बैंक खाता विवरण दस्तावेज, 5 पासबुक, 1 चेकबुक, 6 डेबिट कार्ड, 6 सिम कार्ड, 2 कूटचित (एडिटेड) आधार कार्ड और 650 रुपये नकद बरामद किए हैं। बरामद बैंक कागजातों और NCRP पोर्टल के मिलान में नीतीश के खातों से लगभग 3.97 लाख रुपये और अमन शर्मा के खातों से 3.23 लाख रुपये की ठगी का सीधा कनेक्शन सामने आया है, जो कुल मिलाकर 7,20,725 रुपये की ठगी को दर्शाता है।
एडिटेड आधार कार्ड से खोलते थे खाते
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल करते हुए बताया कि वे पहचान छिपाने के लिए फोटो और नाम बदलकर फर्जी या एडिटेड आधार कार्ड तैयार करते थे। अमन शर्मा स्थानीय स्तर पर लोगों के नाम से फर्जी बैंक खाते खुलवाता था और उनके पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड व सिम कार्ड हासिल कर लेता था। इसके बाद नीतीश इन तमाम बैंकिंग दस्तावेजों को बिहार स्थित अपने साथी सोनू सिंह तक पहुंचाता था, जहां से इस पूरे सिंडिकेट का संचालन किया जाता था।
लोन और पार्ट-टाइम जॉब के नाम पर करते थे ठगी
यह गिरोह आम लोगों को झांसे में लेने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाता था। आरोपियों पर बजाज फाइनेंस के नाम पर फर्जी लोन देने, ऑनलाइन डिलीवरी, फेसबुक विज्ञापनों, पार्ट-टाइम जॉब और ऑनलाइन निवेश में मोटे मुनाफे का लालच देकर ठगी करने का आरोप है। अलीनगर थाने में आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की संबंधित धाराओं और आईटी एक्ट की धारा 66डी के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि मास्टरमाइंड सोनू सिंह की गिरफ्तारी के लिए टीमें लगातार दबिश दे रही हैं और जल्द ही उसे भी पकड़ लिया जाएगा।