मुद्रा लोन के नाम पर गरीब ग्रामीणों से साइबर फ्रॉड: एक्सिस बैंक का पूर्व कर्मचारी 300 खातों के साथ गिरफ्तार, ऐसे हुआ गिरोह का भंडाफोड़
चंदौली में साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश
एक्सिस बैंक का पूर्व कर्मचारी रोहित गिरफ्तार
300 फर्जी बैंक खातों की जांच शुरू
मुद्रा लोन के नाम पर ठगी करने वाले धरे गए
ओदरा मार्ग से पुलिस ने किया गिरफ्तार
चंदौली जिले में पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम को साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। थाना धानापुर पुलिस और जनपद की साइबर टीम ने मिलकर फर्जी बैंक खातों (म्यूल अकाउंट्स) के जरिए लाखों रुपये की ऑनलाइन धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के दो मुख्य अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। पकड़ा गया मुख्य आरोपी बैंक का पूर्व कर्मचारी है, जिसने कई राज्यों में फैला अपना ठगी का नेटवर्क कायम किया था।
ओदरा मार्ग से हुई दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी
उच्चाधिकारियों के निर्देशन, धानापुर थाना प्रभारी सलिल स्वरूप आदर्श और साइबर सेल प्रभारी मिर्जा रिजवान बेग के नेतृत्व में पुलिस टीम काफी समय से इस गिरोह की तलाश कर रही थी। 12 सितंबर 2026 को मुखबिर की सटीक सूचना पर पुलिस टीम ने ओदरा मार्ग के पास घेराबंदी करके दोनों वांछित अभियुक्तों को करीब दोपहर 12:20 बजे दबोच लिया।
पकड़े गए अभियुक्तों की पहचान आशीष -निवासी ग्राम पसाई (थाना धीना) और रोहित कुमार उर्फ काला-निवासी ग्राम सेवढ़ी मड़ई (थाना बलुआ) के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके कब्जे से घटना में इस्तेमाल किए गए 2 मोबाइल फोन, 1 कूटरचित आधार कार्ड, 1 एटीएम कार्ड और 1 चेकबुक बरामद की है।
सरकारी योजनाओं और पीएम मुद्रा लोन का देते थे लालच
पुलिस पूछताछ में आरोपी आशीष विश्वकर्मा ने खुलासा किया कि वह अपने साथी रोहित कुमार और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर ग्रामीण क्षेत्रों में घूमता था। वे गांव के सीधे-साधे और गरीब लोगों को 6 महीने के भीतर 'प्रधानमंत्री मुद्रा लोन' दिलाने व अन्य सरकारी योजनाओं का झांसा देते थे।
इसी बहाने वे ग्रामीणों के नाम पर जीरो बैलेंस बैंक खाते खुलवाते थे। बैंक से खाता खुलते ही ये आरोपी चालाकी से ग्राहकों के एटीएम कार्ड, पासबुक और ओटीपी (OTP) का एक्सेस अपने पास रख लेते थे। इसके बाद बैंक खातों का सारा विवरण मुंबई में बैठे अपने अन्य सहयोगियों को भेज दिया जाता था।
फर्जी वेबसाइट्स के जरिए 3 राज्यों में फैला था जाल
यह शातिर गिरोह इंटरनेट पर प्रधानमंत्री मुद्रा लोन दिलाने वाली फर्जी वेबसाइट्स और भ्रामक विज्ञापन चलाकर आम जनता से साइबर फ्रॉड करता था। ठगी की यह रकम ग्रामीणों के इन 'म्यूल अकाउंट्स' में मंगवाई जाती थी और आरोपी एटीएम के जरिए पैसे निकालकर आपस में बांट लेते थे।
जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा जैसे राज्यों तक फैला हुआ था। वर्तमान में चिन्हित केवल 04 बैंक खातों का प्रारंभिक विश्लेषण पूरा हुआ है, जिन पर NCRP पोर्टल पर 18 अंतर्राज्यीय शिकायतें और करीब ₹2.5 लाख की ठगी दर्ज पाई गई है।
पूर्व बैंक कर्मचारी ने खुलवाए थे 300 से ज्यादा फर्जी खाते
पूछताछ में दूसरे आरोपी रोहित कुमार ने बताया कि वह पहले सकलडीहा स्थित एक्सिस बैंक में कर्मचारी के रूप में काम करता था। बैंक में संदिग्ध गतिविधियों के चलते उसे नौकरी से निकाल दिया गया था। इसके बाद उसने अपने पुराने अनुभव का इस्तेमाल कर साइबर अपराधियों को फर्जी खातों के जरिए ठगी की रकम खपाने का तरीका सिखाया।
रोहित ने स्वीकार किया कि उसने पूर्व में लगभग 300 बैंक खाते खुलवाए थे। पुलिस अब इन सभी 300 खातों की गहन जांच कर रही है ताकि अन्य वित्तीय घोटालों का पता लगाया जा सके। दोनों आरोपियों के खिलाफ थाना धानापुर और थाना साइबर क्राइम पर विभिन्न गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।