चंदौली का जालसाज धर्मेंद्र पांडेय गिरफ्तार, फर्जी सैन्य अधिकारी बन रेलवे और सेना में नौकरी का देता था झांसा

 

वाराणसी एसटीएफ और भेलूपुर पुलिस ने सेना का फर्जी कर्नल बनकर करोड़ों की ठगी करने वाले मास्टरमाइंड धर्मेंद्र पांडेय को गिरफ्तार किया है। आरोपी फर्जी आईकार्ड और दस्तावेजों के जरिए बेरोजगार युवाओं को सेना, रेलवे और शिक्षा विभाग में नौकरी का झांसा देकर लूटता था।

 
 

वाराणसी एसटीएफ ने पकड़ा फर्जी सैन्य अधिकारी

बेरोजगार युवाओं से नौकरी के नाम पर ठगी

आरोपी के पास से फर्जी कर्नल का आईकार्ड बरामद

बिहार के अपराधियों के साथ मिलकर फैलाया जाल

6 साल से वाराणसी के अपार्टमेंट में छिपा था आरोपी

उत्तर प्रदेश एसटीएफ (वाराणसी यूनिट) और भेलूपुर थाना पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए युवाओं को सेना, रेलवे और शिक्षा विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है। आरोपी धर्मेंद्र कुमार पांडेय खुद को भारतीय सेना का 'कमांडिंग ऑफिसर' (कर्नल) बताकर बेरोजगारों को अपना शिकार बनाता था। उसे वाराणसी के सुंदरपुर स्थित विभूति एंक्लेव अपार्टमेंट से सोमवार रात गिरफ्तार किया गया।

फर्जी आईकार्ड और दस्तावेजों का जखीरा बरामद
एसटीएफ निरीक्षक अनिल कुमार सिंह के अनुसार, धर्मेंद्र पांडेय के पास से भारी मात्रा में संदिग्ध दस्तावेज बरामद हुए हैं। पुलिस ने उसके पास से भारतीय सेना के दो फर्जी आईकार्ड, तीन आधार कार्ड, तीन पैन कार्ड, दो ड्राइविंग लाइसेंस, तीन डेबिट कार्ड और हाईस्कूल के कई फर्जी अंकपत्र व प्रमाणपत्र जब्त किए हैं। वह मूल रूप से चंदौली जिले के अलीनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत कैली गांव का निवासी है।

कर्नल बनकर फैलाया जाल, बिहार के अपराधियों से थे तार
पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। धर्मेंद्र ने बताया कि वह बिहार के कुछ शातिर अपराधियों के संपर्क में आने के बाद जालसाजी की दुनिया में उतरा। उसने 'कमांडिंग ऑफिसर आर्मी इंटेलिजेंस अल्फा-1 (कर्नल)' का फर्जी परिचय पत्र तैयार करवाया था। इस वर्दी और रौब को देखकर बेरोजगार युवा आसानी से उसके झांसे में आ जाते थे। वह सेना के अलावा अर्धसैनिक बल, रेलवे और शिक्षा विभाग में ऊंचे रसूख का दावा कर मोटी रकम वसूलता था।

फर्जी खातों के जरिए करता था लेन-देन
पकड़े जाने के डर से धर्मेंद्र अत्यंत शातिर तरीके से काम करता था। एसटीएफ निरीक्षक ने बताया कि आरोपी ने फर्जी आधार और पैन कार्ड के जरिए विभिन्न बैंकों में कई खाते खुलवा रखे थे। ठगी की रकम सीधे इन खातों में मंगवाई जाती थी। जब किसी युवक की नौकरी नहीं लगती थी और वह पैसे वापस मांगता, तो आरोपी अपना मोबाइल बंद कर ठिकाना बदल देता था। पुलिस अब उसके मोबाइल सीडीआर, व्हाट्सएप चैट और यूपीआई ट्रांजेक्शन की गहन जांच कर रही है।

15 साल से गांव से था गायब, घर में किसी को भनक नहीं
धर्मेंद्र पांडेय के पारिवारिक पृष्ठभूमि की बात करें तो उसके पिता बीएचयू में कर्मचारी थे, जिनकी 10 साल पहले मौत हो गई थी। ग्रामीणों के अनुसार, धर्मेंद्र पिछले 15-20 सालों से गांव से बाहर रह रहा था। 6 साल पहले उसने विवाद के कारण अपनी पत्नी को मायके छोड़ दिया था। हालांकि, वह अपनी पत्नी को खर्चे के पैसे भेजता था, लेकिन वह क्या काम कर रहा है, इसकी भनक किसी को नहीं थी। उसका छोटा भाई गांव में खेती-बाड़ी और पहलवानी करता है। उसकी गिरफ्तारी की सूचना से गांव के लोग भी हैरान हैं।

पुलिस की आगे की कार्रवाई
भेलूपुर इंस्पेक्टर सुधीर कुमार त्रिपाठी ने बताया कि आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों और उन नेटवर्क की तलाश कर रही है जो धर्मेंद्र को फर्जी दस्तावेज बनाने और ठगी के शिकार ढूंढने में मदद करते थे।