चंदौली में चल रहा था जाली नोटों को छापने का कारखाना, अलीनगर पुलिस के साथ स्वाट टीम ने 3 को दबोचा
चंदौली की अलीनगर पुलिस और स्वाट टीम ने जाली नोटों की सप्लाई करने वाले एक शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है। मानसनगर के एक घर में चल रही इस फैक्ट्री से भारी मात्रा में नकली नोट, प्रिंटर और उपकरण बरामद हुए हैं।
अलीनगर पुलिस की बड़ी छापेमारी
जाली नोट छापने की मिनी फैक्ट्री बरामद
यूट्यूब के जरिए सीखा नोट छापना
मानसनगर गेट के पास हुई गिरफ्तारी
स्वाट और सर्विलांस टीम की संयुक्त कार्रवाई
चंदौली: उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत अलीनगर पुलिस और स्वाट/सर्विलांस की संयुक्त टीम को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने नकली नोट बनाने और बाजार में खपाने वाले एक शातिर गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने एक मुख्य अभियुक्त को गिरफ्तार किया है, जबकि दो बाल अपचारियों को अभिरक्षा में लिया गया है।
मानसनगर के मकान में चल रहा था खेल
पुलिस अधीक्षक आदित्य लांग्हे के निर्देश पर जिले में जाली नोटों की तस्करी रोकने के लिए सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान प्रभारी निरीक्षक अनिल कुमार पाण्डेय और एसओजी प्रभारी रामजनम यादव को मुखबिर से सूचना मिली कि मानसनगर गेट के पास एक मकान की पहली मंजिल पर जाली नोटों की छपाई हो रही है। पुलिस टीम ने बिना समय गंवाए चिन्हित मकान पर दबिश दी। मौके से पुलिस ने उधम सिंह यादव निवासी बलुआ को गिरफ्तार किया और दो किशोरों को पकड़ा।
भारी मात्रा में नोट और उपकरण बरामद
पुलिस की छापेमारी में जो बरामदगी हुई, उसने सभी को हैरान कर दिया। पुलिस ने मौके से 100 रुपये के 55 तैयार जाली नोट और 452 अर्धनिर्मित जाली नोट बरामद किए। इसके अलावा गिरोह के पास से तीन हाईटेक एप्सन प्रिंटर, एक लैमिनेटर मशीन, हेयर ड्रायर, बटर पेपर के रोल, एक डेल लैपटॉप और जाली नोटों के वाटरमार्क वाली कई शीट बरामद की गईं। लैपटॉप की जांच में 200 और 500 रुपये के जाली नोटों के प्रोफार्मा (डिजाइन) भी मिले हैं।
यूट्यूब और गूगल बना 'गुरु'
पूछताछ के दौरान मुख्य अभियुक्त उधम सिंह यादव ने चौंकाने वाला खुलासा किया। उसने बताया कि उसने जाली नोट छापने का तरीका यूट्यूब और गूगल के माध्यम से सीखा था। उसकी मुलाकात इंस्टाग्राम के जरिए एक व्यक्ति से हुई थी, जिसने उसे ये उपकरण और कच्चा माल उपलब्ध कराया। गिरोह का नेटवर्क इतना फैला था कि वे 3,500 रुपये के जाली नोट के बदले 1,000 रुपये के असली नोट लेते थे।
इस सफल ऑपरेशन में प्रभारी निरीक्षक अलीनगर अनिल कुमार पाण्डेय, एसओजी प्रभारी रामजनम यादव, उ0नि0 शरद गुप्ता, और स्वाट टीम के हे0का0 राणाप्रताप सिंह समेत कई जवानों ने अहम भूमिका निभाई। पुलिस ने अभियुक्तों के खिलाफ बी.एन.एस. की विभिन्न धाराओं (178/179/180/181) के तहत मामला दर्ज कर लिया है और अब इस गिरोह के अन्य संपर्कों की तलाश की जा रही है।