ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत चंदौली पुलिस को मिली सफलता, 23 साल पुराने मामले में आरोपी को सजा
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पुलिस के अनुसार "ऑपरेशन कन्विक्शन" का उद्देश्य लंबित मुकदमों में त्वरित और ठोस कार्रवाई कर दोषियों को सजा दिलाना है, जिससे कानून व्यवस्था को और मजबूत किया जा सके।
 

आज आया है न्यायालय का फैसला

चंदौली पुलिस और अभियोजन टीम की मेहनत रंग लाई

21 जून 2002 को सैयदराजा इलाके में हुआ था एक्सीडेंट

चंदौली जिले में उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक लखनऊ के निर्देशानुसार चलाए जा रहे "ऑपरेशन कन्विक्शन" अभियान के अंतर्गत जनपद चंदौली पुलिस ने एक और सफलता हासिल की है। वैज्ञानिक विवेचना, ठोस साक्ष्य संकलन और लोक अभियोजक की प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरूप न्यायालय ने 23 वर्ष पुराने एक मामले में आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।

माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट, चंदौली ने थाना सैयदराजा क्षेत्र के एक मुकदमे में आरोपी महेंद्र सिंह पुत्र राजकुमार, निवासी किरंगी मोड़ दुर्गापुर थाना डोभी, जिला गया (बिहार) को न्यायालय उठने तक की सजा तथा 2000-2000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड न देने की स्थिति में अभियुक्त को तीन दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

मामले का विवरण
यह मामला वर्ष 2002 का है। 21 जून 2002 को थाना सैयदराजा में अपराध संख्या 137/2002, धारा 279, 338, 337, 427 भादवि के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया था। इसमें अभियुक्त महेंद्र सिंह पर लापरवाह वाहन चलाने से दुर्घटना करने, गंभीर व साधारण चोटें पहुंचाने और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगे थे।

प्रभावी पैरवी और साक्ष्य प्रस्तुति
इस मामले में मॉनिटरिंग सेल प्रभारी निरीक्षक मुकेश तिवारी, अभियोजन पक्ष के एपीओ विजय कुमार पांडेय और थाना सैयदराजा के पैरोकार कांस्टेबल राजीव प्रजापति ने अदालत में ठोस साक्ष्य और गवाहियों के आधार पर प्रभावी पैरवी की। अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत अचूक सबूतों के चलते अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया।

ऑपरेशन कन्विक्शन की अहमियत
पुलिस के अनुसार "ऑपरेशन कन्विक्शन" का उद्देश्य लंबित मुकदमों में त्वरित और ठोस कार्रवाई कर दोषियों को सजा दिलाना है, जिससे कानून व्यवस्था को और मजबूत किया जा सके। चंदौली पुलिस अधीक्षक ने टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाइयों से अपराधियों में कानून का भय और आमजन में सुरक्षा की भावना बढ़ेगी।

चंदौली पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वे किसी भी अपराध की सूचना समय से पुलिस को दें और मुकदमों में साक्ष्य व गवाही देने में सहयोग करें, ताकि दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिल सके। इस तरह 23 साल पुराने मुकदमे में चंदौली पुलिस और अभियोजन टीम की मेहनत रंग लाई, और न्यायालय ने आरोपी को सजा सुनाकर एक मिसाल पेश की।