नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानिए कैसी है आज के दिन ग्रहों की स्थिति
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
दोपहर में 48 मिनट का अभिजीत मुहूर्त
यमराज से जुड़े विष्कुम्भ योग का प्रभाव
राहूकाल और शुभ-अशुभ मुहूर्तों का समय
सूर्य का चित्रा नक्षत्र और कन्या राशि में प्रवेश
हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ, निवेश या नई शुरुआत से पहले पंचांग देखने की परंपरा रही है। पंचांग हमारी वैदिक काल-गणना पद्धति है, जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित होती है।
सोमवार 12 अक्टूबर 2026 को आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि रात 10:13 बजे तक रहेगी, जिसके बाद तृतीया तिथि शुरू हो जाएगी। इस दिन सूर्योदय सुबह 6:26 बजे और सूर्यास्त शाम 6:00 बजे होगा। वहीं चंद्रोदय सुबह 7:43 बजे और चंद्रास्त शाम 6:56 बजे का समय रहेगा।
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा और शिव-चंद्र दर्शन का संयोग
12 अक्टूबर को शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन है। इस दिन मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है, जो अत्यंत फलदायी मानी गई है। सोमवार का दिन होने से यह दिन भगवान शिव की साधना और चंद्र दर्शन (आश्विन शुक्ल द्वितीया) के लिए भी बेहद खास है।
सूर्य का चित्रा नक्षत्र में प्रवेश और उसका प्रभाव
इस दिन सूर्य देव चित्रा नक्षत्र में स्थित रहेंगे। चित्रा नक्षत्र के स्वामी मंगल ग्रह हैं, जो सूर्य देव के मित्र माने जाते हैं। सूर्य और मंगल के इस मिलाप से व्यक्ति के भीतर गजब का आत्मविश्वास, साहस और ऊर्जा बढ़ती है। इस दौरान नौकरीपेशा लोगों के काम की तारीफ होती है। वहीं प्रशासन, प्रबंधन और उच्च पदों पर बैठे लोगों को विशेष लाभ, नई जिम्मेदारी या प्रमोशन मिल सकता है। इसके अलावा सूर्य कन्या राशि में रहेंगे, जिससे व्यावहारिक और योजनाबद्ध तरीके से काम करना फायदेमंद रहेगा।
चंद्रमा का तुला राशि में गोचर
सोमवार को चंद्रमा तुला राशि में रहेगा। चंद्रमा पर शुक्र ग्रह और वायु तत्व का प्रभाव रहने से व्यक्ति के मन में संतुलन और न्याय की भावना बढ़ेगी। इस दौरान लोग विवादों से दूर रहना पसंद करेंगे और अपनी मीठी वाणी से दूसरों का दिल आसानी से जीत लेंगे।
शुभ और अशुभ योग का समय
रात 8:31 बजे तक विष्कुम्भ योग रहेगा। यह पंचांग का पहला योग है, जिसके देवता यमराज हैं। इसे अशुभ योग माना जाता है, इसलिए इसकी शुरुआती 2 घंटों में विवाह, यात्रा या गृह प्रवेश जैसा नया काम करने से बचना चाहिए।
अभिजीत मुहूर्त और अमृतकाल
दिन का सबसे शुभ समय यानी 'अभिजीत मुहूर्त' सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक रहेगा। लगभग 48 मिनट का यह समय हर काम में सफलता देने वाला होता है। इसके अलावा दोपहर 2:33 बजे से शाम 4:14 बजे तक 'अमृतकाल' रहेगा, जो नए व्यापार, निवेश और पूजा के लिए सबसे उत्तम माना गया है।
राहुकाल, गुलिक और यमगंड का समय
राहुकाल: सुबह 7:53 बजे से 9:19 बजे तक रहेगा। इस दौरान नया काम शुरू न करें।
गुलिक काल: दोपहर 1:40 बजे से 3:06 बजे तक रहेगा। इसे 'विषैला समय' कहते हैं, इसमें भी नया काम टालना चाहिए। हालांकि दान देने या बैंक में पैसा जमा करने के लिए यह समय ठीक माना जाता है।
यमगंड काल: सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:13 बजे तक रहेगा। इसमें नए काम, यात्रा और पैसों के लेन-देन से बचें।
दिशाशूल: सोमवार को पूर्व दिशा में दिशाशूल रहेगा, इसलिए इस दिशा में अनावश्यक यात्रा करने से बचना चाहिए।