14 अगस्त का पंचांग : शाम से शुरू होगी हरियाली तीज, जानिए शिव-पार्वती पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त
14 अगस्त 2026 को शाम 6:46 बजे से हरियाली तीज का पावन पर्व शुरू हो रहा है। भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए इस दिन बन रहे शुभ मुहूर्त, योग और पंचांग की पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।
शाम 6:46 से हरियाली तीज शुरू
दोपहर में 12:05 से अभिजीत मुहूर्त
शिव-पार्वती की पूजा होगी अत्यंत शुभ
सुबह 10:55 से रहेगा राहुकाल समय
पश्चिम दिशा में रहेगा दिशाशूल प्रभाव
हिंदू धर्म और संस्कृति में पंचांग का विशेष महत्व होता है। कोई भी नया काम, पूजा-पाठ, निवेश या यात्रा शुरू करने से पहले पंचांग देखना बेहद शुभ माना जाता है। पंचांग मुख्य रूप से सूर्य, चंद्रमा और ग्रहों की चाल पर आधारित हिंदू काल-गणना पद्धति है।
14 अगस्त 2026 (शुक्रवार) को श्रावण महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि शाम 6:47 बजे तक रहेगी, जिसके बाद तृतीया तिथि लग जाएगी। इसी दिन शाम 6:46 बजे से हरियाली तीज का पावन पर्व शुरू हो जाएगा, जो अगले दिन 15 अगस्त को शाम 5:28 बजे तक रहेगा। इस दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करना बेहद फलदायी रहेगा।
सूर्योदय-सूर्यास्त और ग्रह-नक्षत्रों का हाल
शुक्रवार 14 अगस्त को सुबह 6:06 बजे सूर्योदय होगा और शाम 6:56 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, चंद्रोदय सुबह 7:26 बजे और चंद्रास्त शाम 8:09 बजे होगा। ग्रहों की स्थिति की बात करें तो सूर्य अश्लेषा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे। वहीं, चंद्रमा तड़के 3:42 से 4:38 बजे तक मघा नक्षत्र में रहेंगे, जिसके बाद पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र की शुरुआत हो जाएगी। इस दिन सूर्य कर्क राशि में और चंद्रमा सिंह राशि में स्थित रहेंगे।
शुभ मुहूर्त और शुभ योग: कब करें पूजा-पाठ और नया काम?
14 अगस्त को पंचांग के अनुसार सुबह 9:27 से 9:31 बजे तक परिघ योग रहेगा, जिसके तुरंत बाद अत्यंत शुभ माना जाने वाला 'शिव योग' शुरू हो जाएगा। दिन का सबसे शुभ समय यानी अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से 12:57 बजे तक रहेगा। किसी भी नए काम की शुरुआत या पूजा के लिए यह समय सबसे उत्तम है। इसके अलावा, रात 9:56 बजे से 11:28 बजे तक अमृत काल रहेगा, जो धार्मिक कार्यों के लिए काफी शुभ माना जाता है।
राहुकाल से बचें और यात्रा में रखें दिशाशूल का ध्यान
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार शुभ कार्यों को करने के लिए कुछ समय टालना बेहतर माना जाता है। शुक्रवार को राहुकाल सुबह 10:55 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा। इसके अलावा, गुलिक काल सुबह 7:42 से 9:19 बजे तक और यमगंड काल दोपहर 3:44 से शाम 5:20 बजे तक रहेगा। इन समयों में नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए।
ज्योतिष और वास्तु के अनुसार शुक्रवार के दिन पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। इसलिए इस दिशा में यात्रा करने से परहेज करना चाहिए। यदि इस दिशा में जाना बहुत जरूरी हो, तो ज्योतिषीय उपायों और नियमों का पालन करके ही घर से प्रस्थान करें।