नवरात्रि के छठे दिन करें माँ कात्यायनी की पूजा, जानें कैसे होती है पुरुषार्थों की प्राप्ति
16 अक्टूबर 2026 को शारदीय नवरात्रि का छठा दिन है। जानिए माँ कात्यायनी की पूजा का महत्व, शुभ शोभन योग, अभिजीत मुहूर्त, अमृतकाल और राहुकाल का सही समय।
माँ कात्यायनी की पूजा से चारों पुरुषार्थ की प्राप्ति
शुक्रवार को शोभन योग का अति शुभ संयोग
रात 2:39 से 4:27 बजे तक अमृतकाल
सूर्य का चित्रा नक्षत्र और कन्या राशि में प्रवेश
यात्रा के लिए पश्चिम दिशा में रहेगा दिशाशूल
हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ, नए काम की शुरुआत, निवेश या यात्रा पर निकलने से पहले पंचांग देखना बेहद जरूरी माना जाता है। पंचांग हमारी प्राचीन काल-गणना पद्धति है, जो सूर्य, चंद्रमा और ग्रहों की स्थिति पर आधारित होती है। शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि सुबह 5:54 बजे तक रहेगी। इसके बाद सप्तमी तिथि शुरू हो जाएगी। इस दिन सूर्योदय सुबह 6:28 बजे और सूर्यास्त शाम 5:56 बजे होगा। वहीं चंद्रोदय सुबह 11:24 बजे और चंद्रास्त रात 10:01 बजे होगा।
माँ कात्यायनी की पूजा और धार्मिक मान्यताएं
16 अक्टूबर 2026 को शारदीय नवरात्रि का छठा दिन है। इस पावन तिथि पर माँ दुर्गा के छठे स्वरूप माँ कात्यायनी की पूजा-अर्चना की जाती है। महर्षि कात्यायन के घर पुत्री के रूप में प्रकट होने के कारण इनका नाम कात्यायनी पड़ा। शेर पर सवार माँ कात्यायनी हमारे शरीर के आज्ञा चक्र की अधिष्ठात्री देवी हैं। इनकी साधना से भक्तों को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है। जिन लोगों के विवाह में रुकावटें आ रही हों, माँ की कृपा से वे बाधाएं दूर हो जाती हैं।
सूर्य का चित्रा नक्षत्र में प्रवेश और शोभन योग
इस दिन सूर्य देव चित्रा नक्षत्र में रहेंगे, जिसके स्वामी मंगल ग्रह हैं। सूर्य और उनके मित्र मंगल के इस मेल से लोगों के भीतर आत्मविश्वास, साहस और काम करने की ऊर्जा बढ़ती है। नौकरीपेशा लोगों के काम की सराहना होती है और प्रबंधन से जुड़े लोगों को प्रमोशन मिल सकता है। इसके अलावा शुक्रवार रात 10:05 बजे तक शोभन योग रहेगा। इसके स्वामी बृहस्पति ग्रह हैं। यह योग नया सामान खरीदने, आभूषण पहनने, सगाई, विवाह और यात्रा शुरू करने के लिए बेहद शुभ माना जाता है।
शुभ मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त और अमृतकाल
दिन के सबसे शुभ कार्यों के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक रहेगा। इस 48 मिनट के समय में शुरू किए गए कार्यों के सभी अशुभ प्रभाव अपने आप खत्म हो जाते हैं। इसके साथ ही शुक्रवार रात 2:39 बजे से तड़के 4:27 बजे तक अमृतकाल रहेगा। अमृतकाल सकारात्मक ऊर्जा से भरा बेहद शुभ समय होता है, जिसमें पूजा-पाठ, निवेश और नए व्यापार की शुरुआत करना बहुत फलदायी माना गया है।
अशुभ समय: राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड काल
पंचांग के अनुसार, इस दिन कुछ अशुभ समय भी रहेंगे जिनमें नया काम शुरू करने से बचना चाहिए:
राहुकाल: रात 10:46 बजे से 12:12 बजे तक रहेगा। इस दौरान कोई नया शुभ काम शुरू न करें।
गुलिक काल: सुबह 7:54 बजे से 9:20 बजे तक रहेगा। इसमें नया काम टालें, हालांकि बैंक में पैसे जमा करना या दान देना शुभ रहता है।
यमगंड काल: दोपहर 3:04 बजे से 4:30 बजे तक रहेगा। यह समय यात्रा और नए सौदों के लिए अच्छा नहीं माना जाता।
राशि स्थिति और दिशाशूल का ध्यान रखें
शुक्रवार को सूर्य देव कन्या राशि में रहेंगे, जो व्यावहारिक और योजनाबद्ध तरीके से काम करने का संकेत देते हैं। वहीं चंद्रमा सुबह 6:47 बजे धनु राशि में प्रवेश करेंगे, जिस पर देवगुरु बृहस्पति का प्रभाव रहता है। इस दौरान जल्दबाजी या गुस्से में निर्णय लेने से बचें। इसके अलावा शुक्रवार को पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा, इसलिए इस दिशा में लंबी यात्रा करने से बचना चाहिए।