शारदीय नवरात्र की अष्टमी पर मां महागौरी की पूजा, सूर्य का चित्रा नक्षत्र में प्रवेश और बन रहा सुकर्मा योग

 

18 अक्टूबर 2026 को शारदीय नवरात्र की अष्टमी तिथि है। इस दिन मां महागौरी की पूजा होगी। जानिए अमृतकाल, अभिजीत मुहूर्त, राहुकाल और आज के ग्रह गोचर का पूरा पंचांग।
 

18 अक्टूबर शारदीय नवरात्र अष्टमी तिथि

मां महागौरी पूजा एवं शुभ मुहूर्त

अभिजीत मुहूर्त और अमृतकाल का समय

राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल

सूर्य का चित्रा नक्षत्र में प्रवेश

सनातन परंपरा में पंचांग का विशेष महत्व होता है। कोई भी शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग देखना फलदायी माना जाता है। पंचांग हमारी प्राचीतम काल-गणना पद्धति है, जो सूर्य, चंद्रमा और ग्रहों की चाल पर आधारित होती है। 18 अक्टूबर 2026 (रविवार) को आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि सुबह 8:28 बजे से शुरू होकर अगले दिन सुबह 10:52 बजे तक रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि की शुरुआत होगी। रविवार को सूर्योदय सुबह 6:28 बजे और सूर्यास्त शाम 5:55 बजे होगा, जबकि चंद्रोदय दोपहर 12:58 बजे और चंद्रास्त रात 11:50 बजे होगा।

महागौरी पूजन और अलौकिक सिद्धियां

18 अक्टूबर 2026 को शारदीय नवरात्र का आठवां दिन है, जिस दिन मां महागौरी की विधिवत उपासना की जाएगी। इनका स्वरूप अत्यंत शांत, सौम्य और उज्ज्वल है। मां महागौरी श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, इसलिए इन्हें श्वेतांबरधरा भी कहा जाता है। इनके समस्त आभूषण भी श्वेत होते हैं और इनका वाहन बैल है। मान्यता है कि महागौरी की भक्तिभाव से उपासना करने पर भक्तों के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं, जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है तथा अलौकिक सिद्धियों की प्राप्ति होती है।

सूर्य का चित्रा नक्षत्र में प्रवेश और इसका प्रभाव

पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य देव चित्रा नक्षत्र में स्थित रहेंगे। जब सूर्य देव चित्रा नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो इसके विशेष और गहरे प्रभाव देखने को मिलते हैं। चित्रा नक्षत्र के स्वामी मंगल ग्रह हैं, जो सूर्य देव के परम मित्र माने जाते हैं। सूर्य और मंगल के इस अद्भुत मेल से व्यक्ति के भीतर जबरदस्त आत्मविश्वास, साहस, पराक्रम और ऊर्जा का संचार होता है। नौकरीपेशा लोगों के काम की उच्च अधिकारियों द्वारा प्रशंसा होती है। प्रशासन, उच्च पदों और प्रबंधन से जुड़े लोगों को नई जिम्मेदारियां या प्रमोशन मिल सकते हैं।

सुकर्मा योग और अभिजीत मुहूर्त

रविवार रात 11:55 बजे तक सुकर्मा योग रहेगा, जो 27 नित्य योगों में से सातवां अत्यंत शुभ और पवित्र योग है। इसके देवता इंद्र हैं और इस योग में किए गए कार्यों में कोई बाधा नहीं आती। इसमें जन्मे लोग दयालु, उदार, तेजस्वी और धार्मिक होते हैं। इसके अलावा, इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:49 से दोपहर 12:34 बजे तक रहेगा। यह लगभग 48 मिनट की अवधि दिन का सबसे शुभ समय मानी जाती है, जिसमें किए गए कार्यों से सभी प्रकार के दोष स्वतः ही नष्ट हो जाते हैं।

अमृतकाल और राहुकाल का समय

रविवार को सुबह 7:28 से 9:16 बजे तक अमृतकाल रहेगा। अमृतकाल को अत्यंत शुभ और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर माना गया है, जो नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और यात्रा के लिए उत्तम है। दूसरी ओर, राहुकाल दोपहर 4:29 बजे से शाम 5:55 बजे तक रहेगा। राहुकाल में किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत करना अशुभ माना जाता है, हालांकि पहले से चल रहे कार्यों को जारी रखा जा सकता है।

यमगंड, गुलिक काल और ग्रहों की स्थिति

रविवार को यमगंड काल दोपहर 12:12 से 1:37 बजे तक रहेगा, जिसमें नया काम, यात्रा और पैसों के लेन-देन से बचना चाहिए। वहीं गुलिक काल दोपहर 3:03 से 4:29 बजे तक रहेगा। इसमें बैंक में पैसे जमा करना या दान देना शुभ माना जाता है। ग्रहों की बात करें तो सूर्य तुला राशि में नीच के रहकर बुध और शुक्र के साथ त्रिग्रही योग बनाएंगे। चंद्रमा शाम 7:33 बजे तक धनु राशि में रहेंगे, जिसके बाद मकर में प्रवेश करेंगे। धनु का चंद्रमा मन में सकारात्मक ऊर्जा भरता है। अंत में, रविवार को पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा, इसलिए इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए।