360 सीढ़ियों की चढ़ाई चढ़कर भक्तों ने लगाई हाजिरी: मां सिहोरिया देवी के दरबार में भोर से रात तक श्रद्धालुओं का तांता
वासंतिक नवरात्र के पहले दिन चंदौली के प्रसिद्ध सिहोरिया धाम में श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। मां शैलपुत्री के स्वरूप में विराजीं देवी के दर्शन के लिए हजारों भक्तों ने कठिन चढ़ाई पार कर सुख-समृद्धि की कामना की।
सीहर गांव के पर्वत शिखर पर उमड़ी भीड़
360 सीढ़ियों की कठिन चढ़ाई पार की
मां शैलपुत्री के स्वरूप का विशेष पूजन
भोर से रात तक लगी रही कतार
सुरक्षा और पेयजल के पुख्ता इंतजाम
वासंतिक नवरात्र के पावन पर्व के प्रथम दिन गुरुवार को चंदौली जनपद के चकिया तहसील अंतर्गत सीहर गांव स्थित प्रसिद्ध सिहोरिया धाम में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। ऊंचे पर्वत शिखर पर विराजमान मां सिहोरिया देवी के दर्शन के लिए भोर की पहली किरण के साथ ही श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा, जो देर रात तक अनवरत जारी रहा। पूरे मंदिर परिसर में "जय माता दी" के उद्घोष से वातावरण पूरी तरह से देवीमय और भक्तिपूर्ण बना रहा।
360 सीढ़ियों की कठिन चढ़ाई और अटूट विश्वास
मां के दरबार तक पहुँचने के लिए श्रद्धालुओं ने लगभग 360 सीढ़ियों की कठिन चढ़ाई पार की। भीषण गर्मी और ऊंचाई की परवाह किए बिना बच्चे, बूढ़े और महिलाएं उत्साह के साथ माता के दर्शन को पहुँचते रहे। भक्तों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हुए मां को घी के दीपक, कपूर, सिंदूर, चुनरी और नारियल अर्पित किए। श्रद्धालुओं ने माता रानी के चरणों में शीश नवाकर अपने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली के लिए मन्नतें मांगीं।
मां शैलपुत्री के स्वरूप में पूजन का महत्व
नवरात्र के प्रथम दिन मां शैलपुत्री की आराधना का विशेष विधान है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, पर्वत शिखर पर विराजमान मां सिहोरिया देवी को साक्षात् मां शैलपुत्री का ही स्वरूप माना जाता है। यही कारण है कि नवरात्र के पहले दिन यहाँ दर्शन करने का विशेष आध्यात्मिक फल मिलता है। भक्तों का ऐसा अटूट विश्वास है कि जो भी श्रद्धालु सच्ची श्रद्धा और निष्काम भाव से मां के इस दरबार में हाजिरी लगाता है, जगदम्बा उसकी हर जायज मनोकामना अवश्य पूर्ण करती हैं।
प्रशासनिक मुस्तैदी और व्यवस्थित दर्शन
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए स्थानीय मंदिर समिति और पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे। मंदिर के स्वयंसेवक भीड़ को नियंत्रित करने और कतारबद्ध दर्शन सुनिश्चित कराने में सक्रिय नजर आए। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जगह-जगह पेयजल, विश्राम स्थल और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था की गई थी, जिससे चढ़ाई के दौरान उन्हें किसी बड़ी असुविधा का सामना न करना पड़े।
पहले दिन की अपार भीड़ को देखते हुए मंदिर ट्रस्ट ने आगामी आठ दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना जताई है। सिहोरिया धाम एक बार फिर पूर्वांचल के प्रमुख आस्था केंद्र के रूप में चमक रहा है, जहाँ हर भक्त मां की ममतामयी छाया में सुकून तलाश रहा है।