24 से 30 मई के बीच अंतरिक्ष में बनेगा त्रिग्रही योग, गंगा दशहरा और ज्येष्ठ पूर्णिमा सहित आएंगे 4 बड़े महापर्व

 

मई 2026 का अंतिम सप्ताह अंतरिक्ष में बुध और शुक्र के गोचर से बेहद संवेदनशील रहने वाला है। एक तरफ जहां सोने-चांदी के दामों में गिरावट और अनाज में तेजी आएगी, वहीं दूसरी तरफ गंगा दशहरा व पुरुषोत्तमी एकादशी जैसे बड़े व्रत-त्योहार मनाए जाएंगे।

 
 

मई के आखिरी सप्ताह में ग्रहों का बड़ा राशि और नक्षत्र परिवर्तन

मिथुन राशि में गुरु, शुक्र और बुध मिलकर बनाएंगे त्रिग्रही योग

रोहिणी नक्षत्र में सूर्य के प्रवेश से कमोडिटी बाजार में उछाल

पुनर्वसु नक्षत्र में शुक्र का गोचर लाएगा सर्राफा बाजार में मंदी

गंगा दशहरा, एकादशी और प्रदोष व्रत से मिलेगा आध्यात्मिक लाभ

 वैदिक ज्योतिष शास्त्र के दृष्टिकोण से मई 2026 का अंतिम सप्ताह बेहद संवेदनशील और दूरगामी परिणाम देने वाला साबित होने जा रहा है। दिनांक 24 मई 2026 से लेकर 30 मई 2026 के बीच अंतरिक्ष में कई बड़े ग्रहों का राशि और नक्षत्र परिवर्तन होने जा रहा है। इस अवधि में बुद्धि के देवता बुध और धन-वैभव के प्रदाता शुक्र देव अपनी चाल बदलेंगे, जिसका सीधा असर मानव जीवन, देश-दुनिया की राजनीति, शेयर बाजार और सर्राफा बाजार पर पड़ेगा। इसके साथ ही इस सप्ताह गंगा दशहरा, पुरुषोत्तमी एकादशी, प्रदोष व्रत और ज्येष्ठ पूर्णिमा जैसे महापर्व भी मनाए जाएंगे।

अंतरिक्ष में ग्रहों की मौजूदा स्थिति
इस सप्ताह ग्रहों के राजा सूर्य देव अपने शत्रु शुक्र की राशि वृषभ में गोचर कर रहे हैं, जबकि मंगल देव स्वराशि मेष में मजबूत स्थिति में हैं। शुरुआत में बुध ग्रह सूर्य के साथ वृषभ राशि में रहकर बुधादित्य योग बनाएंगे, लेकिन दिनांक 29 मई 2026 को सुबह 10:02 बजे बुध देव अपनी स्वराशि मिथुन में प्रवेश कर जाएंगे। मिथुन राशि में पहले से मौजूद गुरु और शुक्र के साथ बुध की यह युति एक दुर्लभ 'त्रिग्रही योग' का निर्माण करेगी। इसके अलावा, शनि देव मीन राशि में, राहु कुंभ में और केतु सिंह राशि में वक्री अवस्था में गतिमान रहेंगे, जबकि चंद्रमा सिंह से वृश्चिक राशि तक संचरण करेगा।

रोहिणी नक्षत्र में सूर्य का प्रवेश: कमोडिटी बाजार में तेजी
दिनांक 25 मई 2026 को सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे, जिससे पृथ्वी पर तापमान बढ़ेगा और इसे 'नवतपा' की शुरुआत भी कहा जाता है। इस गोचर के कारण कृषि उत्पादों और रोजमर्रा की उपभोग की वस्तुओं के दामों में उछाल देखने को मिलेगा। वायदा व कमोडिटी मार्केट में गेहूं, जौ, चना, खांड (चीनी) और घी के बाजारों में जबरदस्त तेजी का रुख रहेगा। इसके अलावा तेल, तिल, सरसों और अलसी जैसे तिलहनों के दाम भी बढ़ेंगे। सूत (कॉटन) के कारोबार में भी मुनाफे के आसार हैं, जबकि शेयर बाजार और कपड़ा उद्योग में साधारण तेजी ही दर्ज की जाएगी।

सर्राफा बाजार की भविष्यवाणी: सोना और चांदी में बड़ी मंदी
यदि आप कीमती धातुओं के बाजार में निवेश करते हैं, तो यह सप्ताह आपके लिए भारी गिरावट के संकेत दे रहा है। दिनांक 25 मई से सर्राफा बाजार में हलचल शुरू होगी और सोना-चांदी की कीमतों में नरमी आएगी। इसका सबसे बड़ा कारण सप्ताह के अंत में दिखेगा, जब 30 मई 2026 को सुख-समृद्धि के कारक शुक्र देव पुनर्वसु नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। शुक्र का यह नक्षत्र परिवर्तन धातु बाजार के लिए मंदा साबित होगा, जिससे सोने-चांदी के भावों में अप्रत्याशित रूप से कमी आएगी। इसके प्रभाव से रूई, कपास और जूट के व्यापार में भी मंदी का दौर देखने को मिलेगा।

इस सप्ताह के मुख्य व्रत, पर्व और त्योहार
धार्मिक दृष्टिकोण से यह सप्ताह पुण्य कमाने के लिए अत्यंत पवित्र माना जा रहा है। सप्ताह के मुख्य व्रत-त्योहार इस प्रकार हैं:

गंगा दशहरा (26 मई 2026): मंगलवार को मां गंगा के पृथ्वी अवतरण का महापर्व मनाया जाएगा, जिसमें पवित्र नदियों में स्नान और दान-पुण्य करने से दस प्रकार के पापों का नाश होता है।

पुरुषोत्तमी एकादशी व्रत (27 मई 2026): बुधवार को भगवान विष्णु को समर्पित यह महाव्रत रखा जाएगा, जो जातक के सभी कष्टों को दूर कर मोक्ष प्रदान करता है।

प्रदोष व्रत (28 मई 2026): गुरुवार को पड़ने के कारण इसे 'गुरु प्रदोष व्रत' कहा जाएगा। इस दिन प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने से जीवन के सभी संकट टल जाते हैं।

ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत (30 मई 2026): शनिवार को पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण भगवान की कथा और चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा निभाई जाएगी।

देश-दुनिया और जनमानस पर त्रिग्रही योग का प्रभाव
29 मई को मिथुन राशि में बनने वाला बुध, गुरु और शुक्र का त्रिग्रही योग समाज में रचनात्मक क्रांति लाएगा। इसके प्रभाव से शिक्षा, तकनीकी, मीडिया और संचार के क्षेत्रों में बड़े और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। राजनीतिक स्तर पर कूटनीतिक समझौतों में तेजी आएगी। हालांकि, केतु और शनि की स्थिति के कारण कुछ देशों में आंतरिक असंतोष या बेमौसम बारिश जैसी प्राकृतिक आपदाएं भी आ सकती हैं। आम जनता को बदलते मौसम में स्वास्थ्य का ध्यान रखने और आर्थिक निवेश सोच-समझकर करने की सलाह दी जाती है।