328 करोड़ का फोरलेन प्रोजेक्ट पर ऐसा है कब्जा, कहीं गोबर-गोइठा तो कहीं  मवेशियों का कब्जा, FIR कराने की तैयारी

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चंदौली में 328 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा पड़ाव-गोधना मोड़ फोरलेन प्रोजेक्ट पूरा होने से पहले ही घोर लापरवाही का शिकार हो गया है। पाथ-वे और डिवाइडर पर ग्रामीणों के अवैध कब्जे, गोबर पाथने और मवेशी बांधने से करोड़ों के नक्काशीदार पत्थर टूट रहे हैं, जिससे जनता परेशान है।

 
 

328 करोड़ की महत्वाकांक्षी फोरलेन परियोजना में भारी लापरवाही

वीआईपी पाथ-वे और डिवाइडर पर ग्रामीणों का अवैध अतिक्रमण

करोड़ों के महंगे नक्काशीदार पत्थर और इंटरलॉकिंग टाइल्स क्षतिग्रस्त

15 साल तक रखरखाव की जिम्मेदारी वाली निर्माण एजेंसी मौन

पाथ-वे पर गंदगी से स्थानीय लोगों का आवागमन हुआ मुश्किल

चंदौली जिले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल पड़ाव से गोधना मोड़ तक की 328 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी फोरलेन परियोजना शुरुआती दौर में ही बदहाली और अव्यवस्था का शिकार हो गई है। जिस पाथ-वे और डिवाइडर को शहर के सौंदर्यीकरण और आधुनिक यातायात व्यवस्था के प्रतीक के रूप में विकसित किया गया था, वह आज ग्रामीणों के अतिक्रमण की वजह से अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। आलम यह है कि करोड़ों रुपये की लागत से लगाए गए नक्काशीदार और सजावटी पत्थर, रंगीन ईंटें तथा इंटरलॉकिंग टाइल्स तेजी से टूट रही हैं। इस गंभीर लापरवाही के बावजूद जिम्मेदार निर्माण एजेंसी चुप्पी साधे बैठी है।

पाथ-वे और डिवाइडर पर अवैध कब्जा, पैदल चलना हुआ मुहाल
इस हाईटेक परियोजना के तहत सड़क के दोनों किनारे पैदल यात्रियों के सुरक्षित आवागमन के लिए विशेष पाथ-वे का निर्माण किया गया था। इसमें बेहद महंगे नक्काशीदार पत्थरों और रंगीन ईंटों का उपयोग हुआ, जिनकी कीमत 50 से 70 रुपये प्रति ईंट बताई जा रही है। हालांकि, स्थानीय ग्रामीणों ने इस पूरे पाथ-वे को तबेले में तब्दील कर दिया है। यहां जगह-जगह मवेशियों को बांधा जा रहा है और वीआईपी पाथ-वे पर गोबर पाथकर उपले (कंडे) थोपे जा रहे हैं। गंदगी और अतिक्रमण के कारण शहरवासियों को सुबह टहलने में भारी असुविधा हो रही है, और लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर मुख्य सड़क से गुजरना पड़ रहा है।

रखरखाव में निर्माण एजेंसी की घोर लापरवाही
नियमों और अनुबंध के मुताबिक, निर्माण एजेंसी को अगले 15 वर्षों तक इस पूरी फोरलेन परियोजना की देखरेख और रखरखाव (मेंटेनेंस) सुनिश्चित करना है। लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। उचित देखरेख के अभाव में जहां पाथ-वे क्षतिग्रस्त हो रहा है, वहीं डिवाइडर के बीच लगाए गए आकर्षक पौधे पानी न मिलने के कारण सूख चुके हैं। नियमित सिंचाई और साफ-सफाई की व्यवस्था पूरी तरह से ठप नजर आ रही है, जिससे शासन के करोड़ों रुपये पानी में बहते दिख रहे हैं।

तय समय से दो साल लेट चल रहा है प्रोजेक्ट
यह फोरलेन परियोजना अपने निर्धारित समय से पहले ही दो साल विलंबित (लेट) चल रही है। वर्तमान में पीडीडीयू नगर में पिछले 15 दिनों से तोड़फोड़ और निर्माण का कार्य तेजी से किया जा रहा है। विडंबना यह है कि प्रोजेक्ट अभी पूरी तरह से फिनिश (पूर्ण) भी नहीं हो पाया है और उससे पहले ही यह बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। निर्माण कार्यों की सुस्त रफ्तार और प्रशासनिक उदासीनता के चलते करोड़ों की सार्वजनिक संपत्ति नष्ट हो रही है।

दोषियों पर दर्ज होगा मुकदमा: अधिशासी अभियंता
इस पूरे मामले को लेकर लोनिवि (PWD) के अधिशासी अभियंता राजेश कुमार ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा, "फोरलेन परियोजना के पाथ-वे और डिवाइडर को नुकसान पहुंचाने वाले अराजक तत्वों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। पाथ-वे पर उपला पाथने वाली दो महिलाओं को पहले ही नोटिस जारी किया गया था, लेकिन उन्होंने निर्देशों की अनदेखी की। अब संबंधित अतिक्रमणकारियों की फोटो और साक्ष्य जुटाकर मुगलसराय कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। शासन स्तर से भी इस मामले की निगरानी की जा रही है, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।"