चंदौली में साइबर ठगी के 'म्यूल अकाउंट' सिंडिकेट का पर्दाफाश, अलीनगर थाने में मुकदमा दर्ज करके शुरू हुआ एक्शन
चंदौली पुलिस ने ऑनलाइन ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाले संदिग्ध 'म्यूल खातों' का भंडाफोड़ किया है। अलीनगर थाने में दर्ज मुकदमे के बाद अब पुलिस उन नेटवर्क की तलाश में है जो इन बैंक खातों के जरिए करोड़ों का काला खेल खेल रहे थे।
साइबर ठगी के म्यूल खातों का खुलासा
संदिग्ध बैंक खातों में करोड़ों का लेन-देन
अपराध निरीक्षक की तहरीर पर मामला दर्ज
अलीनगर पुलिस की बड़ी विधिक कार्रवाई
कई राज्यों से जुड़ी साइबर ठगी की कड़ियाँ
चंदौली। उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस को एक महत्वपूर्ण सफलता हाथ लगी है। पुलिस अधीक्षक चंदौली के निर्देशन में की गई विस्तृत जांच में ऐसे कई संदिग्ध बैंक खातों (म्यूल अकाउंट्स) का पता चला है, जिनका इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी की रकम को खपाने के लिए किया जा रहा था। इस मामले में अपराध निरीक्षक की तहरीर पर अलीनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
कई राज्यों से जुड़े हैं ठगी के तार
प्रभारी निरीक्षक रमेश यादव (अलीनगर) को सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार, देश के विभिन्न राज्यों और जनपदों से ऑनलाइन माध्यम से शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। पुलिस की साइबर सेल और स्थानीय टीम ने जब जांच शुरू की, तो इंडियन ओवरसीज बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के कुछ विशिष्ट खातों में संदिग्ध ट्रांजेक्शन पाए गए। इन खातों में भारी मात्रा में ऑनलाइन लेन-देन हो रहा था, जिसका कोई ठोस आधार नहीं मिला।
खाताधारकों के नाम आए सामने
प्राथमिक जांच में पुलिस ने ख्यालगढ़ लौंदा के निवासी इंद्रजीत कुमार और मवै खुर्द निवासी रंजीत कुमार के खातों को संदिग्ध माना है। पुलिस को आशंका है कि साइबर अपराधियों ने इन लोगों के खातों को 'म्यूल अकाउंट' के रूप में किराए पर लिया या झांसा देकर इस्तेमाल किया। इन खातों का मुख्य उपयोग अवैध धनराशि को इधर-बदल कर पुलिस की पकड़ से बचने के लिए किया जाता है।
क्या होता है म्यूल अकाउंट
म्यूल अकाउंट (Mule Account) एक ऐसा बैंक खाता है जिसका उपयोग अपराधी अवैध धन (साइबर अपराध, धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग) प्राप्त करने और उसे ट्रांसफर करने के लिए करते हैं। यह खाता असली व्यक्ति के नाम पर होता है, लेकिन उसे लालच देकर या अनजाने में फंसाकर जालसाज अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करते हैं, जिससे असली अपराधी छिप जाते हैं।"मनी म्यूल्स" (खाताधारक) को अक्सर आसान कमीशन या नौकरी का लालच देकर उनके खाते में अवैध पैसा मंगाया जाता है और फिर उसे आगे ट्रांसफर या नकद निकालने को कहा जाता है।जोखिम: इसमें शामिल व्यक्तियों को यह पता नहीं होता कि वे एक बड़े आपराधिक नेटवर्क का हिस्सा बन चुके हैं। पकड़े जाने पर, इन खाताधारकों को पुलिस पूछताछ, बैंक खाता फ्रीज होने, और 5 साल तक की जेल या भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
पुलिस की सघन जांच जारी
अलीनगर पुलिस अब इन बैंक खातों से जुड़े मोबाइल नंबरों, ट्रांजेक्शन हिस्ट्री और संबंधित नेटवर्क की कड़ाई से पड़ताल कर रही है। पुलिस का कहना है कि साइबर अपराध में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही, पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक खाता या ओटीपी साझा न करें, क्योंकि इसका इस्तेमाल आपराधिक गतिविधियों में किया जा सकता है।