पड़ाव रेलवे अंडरपास पैमाइश का विरोध तेज, ग्रामीण बोले- मनमाने तरीके से हो रही है पैमाइश
चंदौली के पड़ाव में रेलवे अंडरपास के फोरलेन निर्माण और नई रेल लाइन हेतु पैमाइश के दौरान ग्रामीणों ने भारी विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने प्रशासन पर मनमानी और अवैध अतिक्रमण का आरोप लगाते हुए काम रुकवा दिया।
पड़ाव में रेलवे पैमाइश का विरोध
ग्रामीणों ने रुकवाया अंडरपास का काम
जमीन पैमाइश में मनमानी का आरोप
जिलाधिकारी को पहले दे चुके ज्ञापन
अवैध अतिक्रमण का ग्रामीणों ने दावा
पड़ाव में रेलवे अंडरपास निर्माण के लिए पैमाइश का विरोध, ग्रामीणों ने रोका काम
चंदौली जिले के पड़ाव स्थित रेलवे अंडरपास के चौड़ीकरण और नई रेल लाइनों के निर्माण कार्य के दौरान शनिवार को बड़ा विवाद खड़ा हो गया। रेलवे विभाग द्वारा प्रस्तावित वाराणसी-पीडीडीयू रेलखंड मार्ग पर तीसरी और चौथी रेल लाइन के निर्माण के लिए जब विभाग के अधिकारी और राजस्व टीम पैमाइश करने पहुँची, तो ग्रामीणों ने उनके काम को बीच में ही रुकवा दिया। ग्रामीणों ने अधिकारियों पर पैमाइश में मनमानी करने का गंभीर आरोप लगाया है।
क्या है ग्रामीणों का आरोप?
पड़ाव में रामनगर से पड़ाव होते हुए पीडीडीयू नगर तक फोरलेन सड़क का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। अब रेलवे अंडरपास को फोरलेन करने की कवायद चल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जलिलपुर (आराजी संख्या 25) में उनकी भूमि और मकान के पूर्ण दस्तावेज, जैसे कि दाखिल खारिज, रजिस्ट्री, खसरा और खतौनी मौजूद हैं। राजस्व के नक्शे के हिसाब से यहाँ उत्तर रेलवे की भूमि 78 फीट यानी 24 मीटर ही है, लेकिन ग्रामीणों का दावा है कि अधिकारी जबरदस्ती उनकी निजी भूमि और मकान में दो मीटर अंदर तक घुसकर अतिक्रमण करने का प्रयास कर रहे हैं।
प्रशासनिक स्तर पर पहले से दर्ज है आपत्ति
ग्रामीणों ने इस मनमानी के खिलाफ पूर्व में ही कड़ी प्रतिक्रिया जताई थी। स्थानीय लोगों के अनुसार, उन्होंने इस मामले को लेकर जिलाधिकारी (DM) चंदौली सहित उत्तर रेलवे के उच्च अधिकारियों को पत्र भी सौंप दिया है। बावजूद इसके, शनिवार को जब नायब तहसीलदार के नेतृत्व में राजस्व टीम और रेलवे विभाग संयुक्त रूप से पुरानी और नई रेल लाइन के बीच पैमाइश करने पहुँचे, तो ग्रामीणों ने इसे अपने अधिकारों का हनन मानते हुए काम को रुकवा दिया।
विकास कार्य बनाम जनहित
एक ओर सरकार वाराणसी-पीडीडीयू रेलखंड पर यातायात सुगम बनाने के लिए रेल अंडरपास को फोरलेन करने और नई पटरियाँ बिछाने का कार्य कर रही है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय ग्रामीणों और प्रशासन के बीच यह विवाद अब गहराता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उन्हें अपनी पुश्तैनी जमीन और मकानों के सही मूल्यांकन और उचित पैमाइश की आवश्यकता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन ग्रामीणों की आपत्तियों का निस्तारण कैसे करता है और कार्य को पुनः कब शुरू किया जा पाता है।