मुगलसराय महिला अस्पताल की रिपोर्ट: गर्भावस्था में खून की कमी बनी बड़ी चुनौती, हर दूसरी गर्भवती महिला एनीमिया की शिकार
चंदौली के मुगलसराय राजकीय महिला अस्पताल में पिछले 13 महीनों में हुई जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच की गई 1879 गर्भवती महिलाओं में से 944 एनीमिया से पीड़ित मिलीं, जो क्षेत्र में महिलाओं के गिरते स्वास्थ्य स्तर को दर्शाता है।
हर दूसरी गर्भवती महिला एनीमिया पीड़ित
550 महिलाओं में मिला मॉडरेट एनीमिया
13 महीने में 1879 महिलाओं की जांच
हीमोग्लोबिन सुधारने के लिए विशेष सलाह
किशोरियों में माहवारी से एनीमिया का खतरा
चंदौली जिले के मुगलसराय स्थित राजकीय महिला अस्पताल से एक चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार, क्षेत्र में आने वाली हर दूसरी गर्भवती महिला एनीमिया (खून की कमी) से जूझ रही है। पिछले 13 महीनों में किए गए स्वास्थ्य परीक्षणों के परिणाम बताते हैं कि पोषण की कमी और जागरूकता का अभाव महिलाओं के स्वास्थ्य पर भारी पड़ रहा है।
जांच के आंकड़े और हीमोग्लोबिन का गिरता स्तर
राजकीय महिला अस्पताल में 1 जनवरी 2025 से 31 जनवरी 2026 के बीच कुल 1879 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई। इनमें से 944 महिलाएं एनीमिया की शिकार पाई गईं। विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार:
माइल्ड एनीमिया: कई महिलाओं में हीमोग्लोबिन का स्तर 9 से 11 ग्राम प्रति डेसीलीटर मिला।
मॉडरेट एनीमिया: 550 महिलाएं ऐसी थीं जिनका हीमोग्लोबिन 7 से 9 ग्राम के बीच रहा।
गंभीर स्थिति: 18 महिलाओं में हीमोग्लोबिन का स्तर 5 से 7 ग्राम तक गिर गया है, जो जच्चा-बच्चा दोनों के लिए बेहद जोखिम भरा है।
क्यों हो रही है खून की कमी?
अस्पताल के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. एसके चतुर्वेदी ने बताया कि एनीमिया की समस्या केवल गर्भावस्था तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, "किशोरियों में माहवारी (Periods) शुरू होते ही खून की कमी की समस्या जन्म लेने लगती है। यदि किशोरावस्था से ही पोषण पर ध्यान न दिया जाए, तो गर्भावस्था के दौरान यह स्थिति गंभीर रूप ले लेती है।"
बचाव और चिकित्सकों की सलाह
अस्पताल प्रशासन द्वारा एनीमिया पीड़ित महिलाओं को आयरन की गोलियां वितरित की जा रही हैं। जिन महिलाओं में हीमोग्लोबिन का स्तर बहुत कम है, उन्हें आयरन सुक्रोज के इंजेक्शन दिए जा रहे हैं।
डॉक्टरों ने बेहतर स्वास्थ्य के लिए निम्नलिखित खाद्य पदार्थों के सेवन की सलाह दी है:
आयरन युक्त आहार: गुड़, पालक, चौराई और चुकंदर का नियमित सेवन।
फल: अनार और प्रचुर मात्रा में आयरन वाले मौसमी फल।
जागरूकता: किशोरियों को शुरुआती दिनों से ही खान-पान के प्रति सचेत रहने की जरूरत है।
क्षेत्रीय स्वास्थ्य विभाग अब ग्रामीण इलाकों में जागरूकता शिविर लगाने की योजना बना रहा है ताकि 'एनीमिया मुक्त भारत' के संकल्प को चंदौली में धरातल पर उतारा जा सके।