चंदौली में युवाओं को सिखाई गई CPR तकनीक, सीखा प्राथमिक उपचार और पोषण का पाठ
मुगलसराय में आयोजित तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर में युवाओं को सीपीआर देने और प्राथमिक चिकित्सा की जीवनरक्षक तकनीकें सिखाई गईं। अब ये प्रशिक्षित युवा गांवों में जाकर स्वास्थ्य और पोषण के प्रति लोगों को जागरूक करेंगे।
मुगलसराय में तीन दिवसीय स्वास्थ्य प्रशिक्षण
युवाओं को दिया गया सीपीआर का व्यावहारिक अभ्यास
सर्पदंश और आपात स्थिति में प्राथमिक उपचार
गर्भवती महिलाओं और शिशु स्वास्थ्य पर चर्चा
10 गांवों के स्वयंसेवकों ने लिया हिस्सा
चंदौली जिले के मुगलसराय स्थित नई बस्ती के होटल सनराइज इन में शनिवार को तीन दिवसीय स्वास्थ्य, पोषण एवं प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। 23 से 25 जुलाई तक आयोजित इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन सोसायटी फॉर वेलफेयर एंड एडवांसमेंट ऑफ रूरल जेनरेशन (SWARG) और टीडीएच के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था। इस प्रशिक्षण में सैयदराजा विकासखंड के 10 अलग-अलग गांवों से आए युवा स्वयंसेवकों और कम्युनिटी एनीमेटरों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
जागरूकता फैलाने का किया गया आह्वान
प्रशिक्षण कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ स्वास्थ्य विभाग के जिला कार्यक्रम प्रबंधक सत्य प्रकाश द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। उद्घाटन सत्र के दौरान अधिकारियों ने युवाओं का आह्वान किया कि वे अपने-अपने गांवों में स्वास्थ्य और पोषण के प्रति ग्रामीणों को जागरूक करें। साथ ही गर्भवती महिलाओं, किशोरियों और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों को घर-घर तक पहुंचाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।
डॉक्टरों ने सिखाया सीपीआर देने का सही तरीका
प्रशिक्षण के समापन अवसर पर राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरकेएसके) के जिला नोडल अधिकारी डॉ. श्रीमन नारायण पाठक ने सभी प्रतिभागियों को कृत्रिम सांस यानी सीपीआर (CPR) देने की सही विधि का व्यावहारिक प्रदर्शन करके दिखाया। उन्होंने बताया कि किसी व्यक्ति की अचानक सांस या हृदय गति रुकने जैसी आपात स्थिति में यदि समय पर और सही तरीके से सीपीआर दिया जाए, तो उसकी जान बचाई जा सकती है।
प्राथमिक चिकित्सा और पोषण पर दी गई अहम जानकारी
डॉ. पाठक ने प्रतिभागियों को सांप या कुत्ते के काटने, हड्डी टूटने, अत्यधिक खून बहने और बेहोशी जैसी आपात परिस्थितियों में किए जाने वाले प्रभावी प्राथमिक उपचार के तरीके भी समझाए। प्रशिक्षण के दौरान किशोर स्वास्थ्य, गर्भवती महिलाओं की देखभाल, नवजात शिशु की सुरक्षा, 6 माह तक केवल स्तनपान, समय पर टीकाकरण, कुपोषण (SAM एवं MAM) तथा किशोरियों में माहवारी प्रबंधन जैसे गंभीर विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से जानकारी दी और प्रतिभागियों के सवालों के जवाब दिए।
संस्था के सदस्यों का रहा विशेष योगदान
इस शिविर में गौरी, सोनम, शिवांगी, जीरव केशरी, सुनीता कुमारी, रेबिका जाखवा, आभा, साजिद, रिंकू, नंदनी, श्वेता, नित्या, प्रज्ञा, काजल यादव, अजय कुमार, रतन, संध्याज्योति, पिया, सुकन्या देवी, आशा देवी, मधु, खुशबू, रजिया बानो और रानी समेत कई प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण लिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में SWARG के निदेशक अनिल यादव, सोमन, निशारिका सिंह एवं शिव प्रसाद त्रिपाठी का विशेष योगदान रहा। अंत में सभी प्रतिभागियों से गांवों में स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाने की अपील की गई।