लौंदा गांव से सफर-ए उमराह के लिए रवाना हुए मंसूर आलम के साथ कई जायरीन

मक्का और मदीना शरीफ की यात्रा हर मुसलमान की सबसे बड़ी ख्वाहिश होती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दरबार में सबसे पहले मुल्क में अमन-चैन और भाईचारा कायम होने की दुआ करेंगे।
 

चंदौली से सफर-ए उमराह के लिए रवाना हुए जायरीनों का जत्था

मौलाना मंसूर बोले -उमरा कर हिन्दुस्तान की तरक्की और खुशहाली मांगेंगे दुआ

मक्का और मदीना शरीफ की यात्रा हर मुसलमान की सबसे बड़ी ख्वाहिश

चंदौली जिले के अलीनगर थाना क्षेत्र के लौंदा गांव से शुक्रवार की देर रात जायरीनों का एक जत्था उमरा यात्रा के लिए रवाना हुआ। जायरीनों को विदा करने के लिए परिजन और रिश्तेदार बड़ी संख्या में वाराणसी स्टेशन पहुंचे। घर से लेकर स्टेशन तक जायरीनों का फूल-मालाओं से स्वागत किया गया और उन्हें दुआओं के साथ विदा किया गया। परिजनों ने कहा कि अल्लाह उन्हें सुरक्षित यात्रा कराए और उनकी दुआएं कबूल हों।

इस अवसर पर जायरीन मौलाना मंसूर आलम ने बताया कि हज वर्ष में केवल एक बार होता है, जबकि उमरा साल भर में कभी भी किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोग हर साल उमरा के लिए जाते हैं, लेकिन यह सौभाग्य उन्हीं को मिलता है जिन्हें अल्लाह की रहमत नसीब होती है। मक्का और मदीना शरीफ की यात्रा हर मुसलमान की सबसे बड़ी ख्वाहिश होती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दरबार में सबसे पहले मुल्क में अमन-चैन और भाईचारा कायम होने की दुआ करेंगे।

मंसूर आलम ने आगे कहा कि वे उमरा कर हिन्दुस्तान की तरक्की और खुशहाली की दुआ भी करेंगे। उन्होंने कामना की कि हर मुसलमान को हज और उमरा करने का अवसर नसीब हो। स्टेशन पर मौजूद लोगों ने जायरीनों के अच्छे स्वास्थ्य और सुरक्षित वापसी के लिए दुआ की। जायरीन वाराणसी से ट्रेन द्वारा दिल्ली के लिए रवाना हुए, जहां से वे हवाई यात्रा कर मक्का-मदीना शरीफ जाएंगे।  इस मौके पर गांव और परिवार में रौनक और उत्साह का माहौल रहा।

सफर-ए उमराह के लिए जायरीन मौलाना मंसूर आलम. हाजी रियाजुद्दीन. अनवार अहमद. फैजान सिद्दीकी रहे।