मुगलसराय में कौतूहल का केंद्र बना 160 किलो का बकरा, बकरीद पर कुर्बानी के लिए किया है तैयार

 

चंदौली के मुगलसराय में बकरीद के मौके पर लाया गया एक विशालकाय बकरा लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। 160 किलो से अधिक वजन और 5 से 6 फुट लंबे इस बकरे को देखने दूर-दूर से लोग आ रहे हैं।

 
 

मुगलसराय में 160 किलो का विशालकाय बकरा बना आकर्षण

करीब पांच से छह फुट लंबे बकरे की हो रही चर्चा

बकरे के मालिक जैद अहमद ने फार्म हाउस पर किया तैयार

पिछले ग्यारह महीनों से की जा रही थी विशेष देखभाल

प्रति माह पांच हजार रुपये खर्च के साथ कुल 55 हजार व्यय

 चंदौली जिले के मुगलसराय क्षेत्र में इन दिनों एक विशालकाय बकरा स्थानीय निवासियों के बीच भारी कौतूहल और आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। आगामी बकरीद के पावन मौके पर कुर्बानी के उद्देश्य से लाया गया यह बकरा अपनी असाधारण और मजबूत कद-काठी के कारण हर तरफ चर्चा का विषय है। यदि इसके शारीरिक मापदंडों की बात करें, तो करीब 5 से 6 फुट की लंबाई वाले इस बकरे का कुल वजन 160 किलोग्राम से भी अधिक दर्ज किया गया है। इस अनोखे बकरे को नजदीक से निहारने के लिए सुदूर क्षेत्रों से लोग लगातार पहुंच रहे हैं। बच्चे और बुजुर्ग सभी इसके साथ बड़े चाव से अपनी तस्वीरें और सेल्फी खिंचवाते नजर आ रहे हैं।

डाइट पर हर महीने खर्च हुए ₹5 हजार
बकरे के मालिक जैद अहमद ने इसके खान-पान और शारीरिक विकास के बारे में महत्वपूर्ण विवरण साझा किया है। उन्होंने बताया कि इस बकरे को उनके एक मित्र के निजी फार्म हाउस पर बेहद वैज्ञानिक और प्राकृतिक तरीके से तैयार किया गया है। जैद अहमद के अनुसार, जब इस बकरे को खरीदा गया था, तब इसका शुरुआती वजन लगभग 100 किलोग्राम के आसपास था। परंतु, पिछले 11 महीनों से लगातार की जा रही विशेष देखभाल और उच्च श्रेणी के पौष्टिक आहार की बदौलत अब इसका वजन बढ़कर 160 किलो के पार पहुंच चुका है।

हरी घास, चना और पौष्टिक दानों से बढ़ा वजन
इस बकरे की विशिष्ट डाइट में प्रतिदिन दी जाने वाली ताजी हरी घास, चना, उत्तम किस्म का दाना और अन्य जरूरी पौष्टिक सामग्रियां शामिल रही हैं। जैद अहमद ने बताया कि बकरे की समुचित देखभाल और खुराक पर हर महीने औसतन करीब 5 हजार रुपये की धनराशि खर्च की जाती थी, जिससे पिछले 11 महीनों में इसकी डाइट पर कुल खर्च लगभग 55 हजार रुपये तक पहुंच गया है। जैसे-जैसे बकरीद का त्योहार नजदीक आ रहा है, इस खास बकरे को देखने वालों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह बकरा उनके समूचे इलाके के अब तक के सबसे बड़े और नायाब बकरों में से एक है।