DDU जंक्शन पर एक बार फिर सफल हुआ ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते, 2 बच्चों को किया गया रेक्यू

आरपीएफ टीम ने तत्परता दिखाते हुए चाइल्ड लाइन की सहायता से बच्चों की काउंसलिंग कराई। काउंसलिंग के दौरान ही बच्चों ने बताया कि वे रास्ता भटक गए थे।
 

'ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते' में फिर से मिली सफलता

आरपीएफ ने DDU जंक्शन से दो भटके हुए नाबालिगों को बचाया

चाइल्ड लाइन की सहायता से बच्चों की हो रही है काउंसलिंग 

चंदौली जिले के पंडित दीनदयाल उपाध्याय (डीडीयू) जंक्शन पर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की टीम ने अपने विशेष अभियान "ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते" के तहत सतर्कता दिखाते हुए दो नाबालिग बालकों को सुरक्षित रूप से बरामद किया। ये दोनों बच्चे घर से बिना बताए भटककर रेलवे स्टेशन पहुँच गए थे।

यह सराहनीय कार्रवाई उप निरीक्षक सरिता गुर्जर और सहायक उप निरीक्षक शरद चंद्र यादव द्वारा चाइल्ड लाइन डीडीयू की प्रतिनिधि रंजना कुमारी के साथ संयुक्त रूप से की गई।

जानकारी के अनुसार, देर रात आरपीएफ टीम प्लेटफार्म संख्या 06 पर नियमित गश्त कर रही थी, तभी उनकी नज़र दो बच्चों पर पड़ी जो स्टेशन पर भटकते हुए दिखाई दिए। पूछताछ करने पर बच्चों ने अपना नाम नीतीश कुमार (उम्र 10 वर्ष) और अनुज कुमार (उम्र 8 वर्ष) बताया। दोनों ही बालक गाजीपुर, उत्तर प्रदेश के निवासी हैं।

प्रारंभिक जाँच में पता चला कि दोनों बच्चे खेल-खेल में घर से निकल पड़े थे और ट्रेन से डीडीयू जंक्शन तक पहुँच गए। स्टेशन परिसर में अकेले भटकते देख, आरपीएफ टीम ने तुरंत उन्हें आरपीएफ पोस्ट लाया।

आरपीएफ टीम ने तत्परता दिखाते हुए चाइल्ड लाइन की सहायता से बच्चों की काउंसलिंग कराई। काउंसलिंग के दौरान ही बच्चों ने बताया कि वे रास्ता भटक गए थे।

मानवीय पहल दिखाते हुए, आरपीएफ अधिकारियों ने तत्काल बच्चों के परिजनों से संपर्क साधा और उनकी कुशल-क्षेम की जानकारी दी। बच्चों के सुरक्षित मिलने की खबर सुनकर परिजनों ने राहत की सांस ली और आरपीएफ टीम का हृदय से आभार व्यक्त किया। बाद में, दोनों नाबालिगों को चाइल्ड लाइन डीडीयू के ऑन-ड्यूटी स्टाफ के सुपुर्द कर दिया गया, ताकि उन्हें नियमानुसार और सुरक्षित रूप से उनके घर तक पहुँचाया जा सके।

आरपीएफ अधिकारियों ने बताया कि "ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते" रेल यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ भटके हुए, लापता या तस्करी का शिकार होने वाले बच्चों की खोजबीन और पुनर्वास के लिए एक निरंतर चलाया जा रहा अभियान है। इस तरह की सफल कार्रवाइयाँ समाज के प्रति आरपीएफ की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी को मजबूती से दर्शाती हैं। आरपीएफ मंडल में यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि कोई भी बच्चा असुरक्षित न रहे।