पैसेंजर ट्रेनों में भगवान भरोसे मुसाफिर: न फोर्स, न सीसीटीवी; अवैध वेंडरों और वसूली करने वालों का बोलबाला
भारतीय रेलवे में पैसेंजर और साधारण एक्सप्रेस ट्रेनों की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। एस्कॉर्ट जवानों के केवल एसी कोचों तक सीमित रहने और पैसेंजर ट्रेनों में सुरक्षा कर्मियों के न होने से यात्री असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
पैसेंजर ट्रेनों में सुरक्षा पूरी तरह नदारद
एसी कोचों तक सीमित रहते हैं एस्कॉर्ट जवान
जनरल और स्लीपर क्लास की सुरक्षा भगवान भरोसे
अवैध वेंडरों और किन्नरों की वसूली से यात्री परेशान
प्रीमियम और साधारण ट्रेनों में सुरक्षा का भेदभाव
भारतीय रेलवे द्वारा यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अक्सर अत्याधुनिक तकनीक और सख्त पहरेदारी के दावे किए जाते हैं। लेकिन धरातल पर सच्चाई इन दावों के बिल्कुल विपरीत नजर आती है। विशेष रूप से पैसेंजर और साधारण एक्सप्रेस ट्रेनों में यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए सफर अब भय और असुरक्षा का पर्याय बनता जा रहा है। यहाँ न तो सुरक्षा गार्डों की नियमित तैनाती है और न ही आधुनिक निगरानी तंत्र का कोई नामोनिशान।
पैसेंजर ट्रेनों में सुरक्षा का शून्य स्तर
पंडित दीनदयाल उपाध्याय (DDU) जंक्शन से दिलदार नगर और अन्य स्थानीय रूटों पर चलने वाली पैसेंजर ट्रेनों की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है। इन ट्रेनों में एक भी रेलवे सुरक्षा कर्मी की तैनाती नहीं की जाती। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन ट्रेनों में सीसीटीवी कैमरे जैसे बुनियादी सुरक्षा उपकरण भी उपलब्ध नहीं हैं। ऐसी स्थिति में यदि किसी यात्री के साथ लूटपाट या कोई अन्य अप्रिय घटना घटती है, तो उनके पास स्थानीय पीआरवी (PRV) पुलिस को फोन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता, जिसका घटनास्थल पर समय से पहुँचना चुनौतीपूर्ण होता है।
एसी कोचों तक सीमित एस्कॉर्ट के जवान
लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेनों, जैसे जम्मूतवी एक्सप्रेस और अन्य स्पेशल ट्रेनों में भी सुरक्षा व्यवस्था 'ऊँट के मुँह में जीरे' के समान है। इन ट्रेनों में सुरक्षा के नाम पर महज दो जीआरपी (GRP) या आरपीएफ (RPF) के जवानों को एस्कॉर्ट ड्यूटी पर लगाया जाता है। यात्रियों का गंभीर आरोप है कि ये जवान अपनी पूरी ड्यूटी केवल एसी (AC) कोचों में बैठकर ही बिता देते हैं। वे स्लीपर या जनरल बोगियों में राउंड लगाने की जहमत तभी उठाते हैं जब कोई उच्चाधिकारी निरीक्षण पर हो या कोई बड़ी आपातकालीन स्थिति पैदा हो जाए। अक्सर ये जवान पैट्रीकार में विश्राम करते हुए पाए जाते हैं।
अवैध वेंडरों और वसूली का आतंक
सुरक्षा गश्त के अभाव का सीधा फायदा अवैध तत्वों को मिल रहा है। जनरल और स्लीपर क्लास की बोगियों में अवैध वेंडरों का जमावड़ा लगा रहता है। इसके साथ ही, ट्रेनों में जबरन वसूली करने वाले किन्नरों और असामाजिक तत्वों का हस्तक्षेप भी बढ़ गया है। सुरक्षा कर्मियों की अनुपस्थिति के कारण यात्री विरोध करने से डरते हैं, जिससे इन अवैध गतिविधियों को और बढ़ावा मिल रहा है।
प्रीमियम बनाम साधारण ट्रेन: भेदभावपूर्ण रवैया
रेलवे प्रशासन का वर्तमान ध्यान पूरी तरह से वंदे भारत, अमृत भारत और राजधानी जैसी प्रीमियम ट्रेनों पर केंद्रित है। इन ट्रेनों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और निरंतर सीसीटीवी निगरानी रहती है। इसके विपरीत, आम आदमी की लाइफलाइन कही जाने वाली साधारण ट्रेनों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है। स्थानीय यात्रियों ने पुरजोर मांग की है कि पैसेंजर ट्रेनों में भी सुरक्षा कर्मियों की गश्त अनिवार्य की जाए और कोचों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं ताकि आम आदमी का सफर भी सुरक्षित और गरिमापूर्ण हो सके।