गड़ई नदी की समस्या : 350 करोड़ की फाइल अटकी, किसानों की डूबती फसलों के लिए शुक्रवार को पदयात्रा करेंगे रामकिशुन यादव
चंदौली में गड़ई नदी के किनारे बसे हजारों किसानों की बर्बादी रोकने के लिए पूर्व सांसद रामकिशुन यादव शुक्रवार को पदयात्रा करेंगे। 350 करोड़ की अधूरी परियोजना और 'पंजाब मॉडल' पर मुआवजे की मांग को लेकर वे सरकार को घेरने की तैयारी में हैं।
350 करोड़ की गड़ई नदी परियोजना ठप
किसानों को मिले पंजाब तर्ज पर मुआवजा
फसलों की तबाही पर रामकिशुन का आंदोलन
मंत्री स्वतंत्र देव सिंह से किया वादा याद
सिंचाई मंत्री ओमप्रकाश सिंह की घोषणा का जिक्र
उत्तर प्रदेश के कृषि प्रधान जनपद चंदौली में गड़ई नदी के कहर से जूझ रहे हजारों किसानों की आवाज को बुलंद करने के लिए समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद रामकिशुन यादव ने एक बार फिर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। शुक्रवार को होने वाली उनकी पदयात्रा न केवल सरकार की वादाखिलाफी को उजागर करेगी, बल्कि फाइलों में दफन हो चुकी 350 करोड़ रुपये की बड़ी परियोजना को जमीन पर उतारने की एक कोशिश भी होगी।
350 करोड़ की परियोजना फाइलों में कैद
पूर्व सांसद रामकिशुन यादव ने 'चंदौली समाचार' के साथ विशेष बातचीत में बताया कि गड़ई नदी की खुदाई और सुदृढ़ीकरण के लिए 350 करोड़ रुपये की परियोजना घोषित की गई थी। इस योजना के तहत मिर्जापुर से लेकर कर्मनाशा नदी के टेल तक नदी की सफाई, पुलों का चौड़ीकरण और उससे जुड़े सभी सहायक नालों की खुदाई होनी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय भाजपा विधायक और सरकार इस परियोजना को धरातल पर लाने के लिए कोई प्रयास नहीं कर रहे हैं, जिससे यह योजना केवल प्रशासनिक फाइलों तक सीमित रह गई है।
किसानों के लिए 'पंजाब मॉडल' पर मुआवजे की मांग
रामकिशुन यादव ने उत्तर प्रदेश सरकार के सामने एक बड़ी मांग रखते हुए कहा कि राज्य में किसानों को होने वाले नुकसान की भरपाई 'पंजाब सरकार' की तर्ज पर की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार किसानों को न्यूनतम 30,000 रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा देती है, जबकि कम नुकसान होने पर 20,000 और 10,000 रुपये की दर तय है। चंदौली के किसान हर साल बाढ़ की त्रासदी झेलते हैं, फसलें पानी में डूब जाती हैं और घर जलमग्न हो जाते हैं, लेकिन मदद के नाम पर केवल कोरी घोषणाएं होती हैं।
2002 के आंदोलन की याद और मंत्री की वादाखिलाफी
सपा नेता ने अपने पुराने संघर्षों को याद करते हुए बताया कि उन्होंने 2002 में विधायक बनने से पहले भी इसी नदी के लिए पदयात्रा की थी। तत्कालीन सिंचाई मंत्री ओमप्रकाश सिंह ने उनके अनुरोध पर नदी की सफाई की पहल की थी, जिससे कई सालों तक क्षेत्र को राहत मिली। रामकिशुन यादव ने बताया कि उन्होंने वर्तमान जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को भी उनका वादा याद दिलाया है। उन्होंने कहा, "मंत्री जी ने खुद बाढ़ के समय स्थानीय लोगों से वादा किया था कि वे इस समस्या का स्थायी समाधान करेंगे, लेकिन आज वे अपने शब्दों को भूल चुके हैं।"
जनता से समर्थन की अपील और प्रशासन को पत्र
रामकिशुन यादव ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2002 से 2026 तक इस समस्या पर किसी अन्य नेता ने गंभीरता से ध्यान नहीं दिया है। इसी उपेक्षा के खिलाफ उन्होंने जिलाधिकारी चंदौली को पत्र लिखकर पदयात्रा की अनुमति मांगी है। उन्होंने आम जनता और किसानों से इस पदयात्रा में साथ चलने की अपील की है ताकि सत्ता पक्ष पर दबाव बनाया जा सके। उन्होंने चेतावनी दी कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक गड़ई नदी की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो जाता और किसानों को उनका वाजिब हक नहीं मिल जाता।
यह पदयात्रा चंदौली और मिर्जापुर के सीमावर्ती क्षेत्रों के किसानों के लिए उम्मीद की एक नई किरण मानी जा रही है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस आंदोलन को किस तरह लेता है और सरकार इस लंबित परियोजना पर क्या रुख अपनाती है।