चंदौली के सरकारी स्कूलों में गैस का संकट: बच्चों का मिड-डे मील अब लकड़ियों के भरोसे
चंदौली के सरकारी स्कूलों में गैस सिलेंडर खत्म होने के कारण मिड-डे मील लकड़ी के चूल्हे पर बन रहा है। प्रधानाचार्यों द्वारा सूचित करने के बावजूद समाधान नहीं होने से बच्चों की व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
चंदौली के स्कूलों में गैस संकट
मिड-डे मील बनाने में हो रही दिक्कत
लकड़ी के चूल्हे पर बन रहा खाना
एमडीएम योजना की बदहाल स्थिति
गैस की कमी से प्रभावित बच्चे
चंदौली जनपद के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील (एमडीएम) योजना संचालन को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आई है। विकासखंड नियामताबाद के विभिन्न कंपोजिट विद्यालयों में गैस सिलेंडर खत्म हो जाने के कारण रसोई गैस के बजाय लकड़ी के चूल्हों पर खाना पकाने की मजबूरी हो गई है, जिससे बच्चों की सेहत और स्वच्छता पर सवाल उठ रहे हैं।
बच्चों की संख्या अधिक, गैस का संकट गहरा
कंपोजिट विद्यालय बहादुरपुर में लगभग 1011 बच्चे पंजीकृत हैं, जहां प्रतिदिन एमडीएम तैयार करने के लिए एक से डेढ़ गैस सिलेंडर की खपत होती है। विद्यालय के प्रधानाचार्य शिवधनी यादव ने बताया कि दो दिन पहले ही गैस समाप्त हो गई थी। उन्होंने इसकी सूचना ग्राम प्रधान को दी और स्वयं भी सिलेंडर प्राप्त करने का भरपूर प्रयास किया, लेकिन सिलेंडर न मिल पाने के कारण अब ईंट का चूल्हा बनाकर लकड़ी पर ही बच्चों का भोजन तैयार किया जा रहा है।
प्रशासन और ग्राम प्रधान की उदासीनता
इसी तरह की स्थिति प्राथमिक विद्यालय कटेसर द्वितीय में भी बनी हुई है। यहां 319 बच्चे पंजीकृत हैं। प्रधानाचार्य अजय सिंह का कहना है कि गुरुवार को सिलेंडर खत्म हो गया था, जिसकी जानकारी ग्राम प्रधान को दे दी गई है। प्रधान प्रतिनिधि विजय यादव का कहना है कि वे सिलेंडर उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल रसोई में जलती लकड़ियां यह साफ बयां कर रही हैं कि जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहे हैं।
स्वास्थ्य और धुएं से बच्चों को परेशानी
लकड़ी पर खाना बनाने से न केवल भोजन की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, बल्कि रसोईघर में निकलने वाले धुएं से भी वहां मौजूद रसोइयों और आसपास बैठे बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एमडीएम योजना का मुख्य उद्देश्य बच्चों को स्वच्छ और पौष्टिक भोजन देना है, लेकिन संसाधन के अभाव में यह योजना दम तोड़ती नजर आ रही है। अभिभावकों ने मांग की है कि शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन तत्काल हस्तक्षेप करे ताकि बच्चों को शुद्ध भोजन मिल सके।