अलीनगर में स्पर्श हॉस्पिटल पर छापा: जांच में न डॉक्टर मिले न ट्रेंड नर्सें, झोलाछाप ही कर रहे थे इलाज

 

चंदौली के अलीनगर स्थित स्पर्श हॉस्पिटल में शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने छापेमारी की। जांच में कागजों पर दर्ज डॉक्टर नदारद मिले और बिना प्रशिक्षित नर्सों के अस्पताल चलता पाया गया। कमियों पर रिपोर्ट बनाकर सीएमओ को भेजी जा रही है।

 
 

चंदौली के अलीनगर में अस्पताल पर छापा

मौके से नदारद मिले रजिस्टर्ड डॉक्टर

बिना प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ के इलाज

जांच के दौरान चार मरीज मिले भर्ती

स्वास्थ्य विभाग सीएमओ को भेजेगा रिपोर्ट

 चंदौली जिले में नियमों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे निजी अस्पतालों पर लगातार सवाल उठ रहे थे। बार-बार मिल रही शिकायतों के बाद आखिरकार स्वास्थ्य विभाग की नींद टूटी। विभाग की टीम ने अचानक नियामताबाद ब्लॉक के अलीनगर स्थित 'स्पर्श हॉस्पिटल' में पहुंचकर छापेमारी की, जहां कई गंभीर खामियां सामने आईं।

कागजों वाले डॉक्टर मौके से मिले नदारद
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) के निर्देश पर नियामताबाद के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. रविकांत सिंह और डिप्टी सीएमओ पीपी उपाध्याय की अगुवाई में टीम अस्पताल का निरीक्षण करने पहुंची। टीम जब अंदर दाखिल हुई, तो अस्पताल के रजिस्टरों और दस्तावेजों में दर्ज डॉक्टर मौके पर मौजूद ही नहीं थे।

बिना प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ के चल रहा था अस्पताल
जांच में यह बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई कि अस्पताल में मरीजों की देखभाल के लिए कोई प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ मौजूद नहीं था। अप्रशिक्षित कर्मचारियों के भरोसे ही अस्पताल का संचालन किया जा रहा था। इसके अलावा अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर (OT) और अन्य चिकित्सीय व्यवस्थाओं में भी मानकों के विपरीत भारी कमियां पाई गईं।

जांच के दौरान चार मरीज मिले भर्ती
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने निरीक्षण के समय अस्पताल में चार मरीजों को भर्ती पाया। अधिकारियों ने मरीजों का हालचाल जाना और उन्हें मिल रही सुविधाओं के बारे में पूछताछ की। टीम ने एक मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करवा दिया, जबकि बाकी मरीजों ने वहीं रहने की बात कही।

सीएमओ को भेजी जा रही है जांच रिपोर्ट
निरीक्षण के बाद नियामताबाद के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. रविकांत सिंह ने बताया कि जांच में अस्पताल के अंदर कई तरह की बड़ी खामियां और गड़बड़ियां पाई गई हैं। इन सभी कमियों को दर्ज करके एक विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसे मुख्य चिकित्सा अधिकारी को भेजा जाएगा। रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

कागजी पंजीकरण और धरातल की हकीकत पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इलाके में बिना संसाधनों और प्रशिक्षित डॉक्टरों के धड़ल्ले से निजी अस्पताल चल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग सिर्फ कागजों और फाइलों की जांच करके हॉस्पिटलों का रजिस्ट्रेशन तो कर देता है, लेकिन धरातल पर मरीज का इलाज कौन कर रहा है, इसकी सुध नहीं लेता। लोगों ने मांग की है कि ऐसे फर्जी और बिना मानक वाले अस्पतालों पर लगातार जांच और कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि किसी मरीज की जान जोखिम में न पड़े।