भैसौड़ा जंगल में जहरीला केमिकल कचरा डंपिंग का खुलासा: रिलायंस कंपनी पर वन विभाग का बड़ा एक्शन
चंदौली के भैसौड़ा जंगल में रिलायंस कंपनी का कथित रासायनिक कचरा डंप करने का मामला सामने आया है। वन विभाग ने गश्त के दौरान 2 ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त कर सैंपल जांच के लिए भेजे हैं। जानिए ग्रामीणों के विरोध और कार्रवाई की पूरी खबर!
भैसौड़ा जंगल में केमिकल कचरा डंपिंग बेनकाब
वन विभाग ने 2 ट्रैक्टर ट्रॉली की जब्त
रिलायंस कंपनी से 24 घंटे में मांगा स्पष्टीकरण
भूजल और खेती पर मंडराया खतरे का साया
कार्रवाई न होने पर ग्रामीणों की आंदोलन चेतावनी
चंदौली जिले के भैसौड़ा जंगल में औद्योगिक कचरा डंप किए जाने का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। मझगांई वन रेंज की टीम जब रात के समय भैसौड़ा कंपार्टमेंट में नियमित गश्त पर थी, तभी अचानक अधिकारियों को हवा में तेज और असहनीय दुर्गंध महसूस हुई। टीम ने जब मौके पर जाकर पड़ताल की, तो वहां अवैध रूप से औद्योगिक कचरा गिराया जा रहा था। वन विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मौके से दो ट्रैक्टर-ट्रॉली को जब्त कर लिया।
24 घंटे के भीतर मांगा गया स्पष्टीकरण
इस पूरे मामले में उप प्रभागीय वनाधिकारी वरुण सिंह ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि रिजर्व फॉरेस्ट या किसी भी जंगली क्षेत्र में बिना अनुमति कचरा डालना गंभीर अपराध है। वन विभाग ने मौके से संदिग्ध कचरे के सैंपल एकत्र कर लिए हैं। इस संबंध में संबंधित रिलायंस कंपनी से 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है। वन विभाग ने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
भूजल, खेती और ग्रामीणों की सेहत पर बड़ा खतरा
वन अधिकारियों का मानना है कि अगर प्रयोगशाला जांच में यह कचरा जहरीला या रासायनिक पाया जाता है, तो इसके परिणाम बेहद घातक होंगे। बारिश के पानी के साथ मिलकर यह केमिकल मिट्टी और भूजल को दूषित कर देगा। इससे भैसौड़ा, बिसौली, टिकुरिया, गंगापुर, जरहर और दानौगढ़ा जैसे आसपास के दर्जनों गांवों की खेती, पशुधन और स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य पर जानलेवा असर पड़ सकता है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और निगरानी प्रणाली पर उठे सवाल
इस घटना ने स्थानीय प्रशासनिक तंत्र और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्यशैली पर भी कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल उठ रहा है कि अगर इतने बड़े पैमाने पर जंगल के भीतर औद्योगिक कचरा डंप किया जा रहा था, तो निगरानी करने वाले जिम्मेदार विभाग अब तक कहां सोए हुए थे? क्या औद्योगिक इकाइयों को नियमों की अनदेखी करने की छूट दी जा रही थी? वन विभाग अब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ मिलकर मामले की संयुक्त जांच कराएगा।
ग्रामीणों में भारी आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी
जंगल और आसपास के इलाकों में केमिकल युक्त कचरा फेंके जाने की खबर से स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा भड़क गया है। भैसौड़ा और आसपास के गांव वालों का कहना है कि विकास के नाम पर उनके पानी, जंगलों और भावी पीढ़ी की सेहत से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ग्रामीणों ने प्रशासन को साफ चेतावनी दी है कि अगर जंगल से इस कचरे को तुरंत नहीं हटवाया गया और दोषी कंपनी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।