"थाने गई तो जिंदा नहीं बचोगी": दबंगों की धमकी के बाद भी चकरघट्टा पुलिस ने साधी चुप्पी, पीड़ित दलित परिवार में दहशत
चंदौली जिले के नौगढ़ में दबंगों ने दलित महिलाओं को लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटा, जिसका वीडियो वायरल हो रहा है। 22 लोगों के खिलाफ तहरीर देने के बाद भी चकरघट्टा पुलिस सिर्फ 'जांच' की बात कहकर कार्रवाई से बच रही है।
महिलाओं की पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
चमेर बांध गांव में दबंगों का तांडव और धमकी
दलित महिला मनीता ने 22 लोगों पर दी तहरीर
SC/ST एक्ट के बावजूद थानेदार की कार्रवाई सुस्त
पुलिस की कार्यप्रणाली पर जनता ने उठाए सवाल
चंदौली जिले में कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए दबंगों ने दलित महिलाओं के साथ सरेआम हैवानियत की हदें पार कर दीं। मामला तहसील नौगढ़ के चकरघट्टा थाना क्षेत्र अंतर्गत चमेर बांध गांव का है, जहाँ महिलाओं को लाठी-डंडों और ईंट-पत्थरों से पीटने का विचलित कर देने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया है। इस घटना ने न सिर्फ पुलिस के दावों की पोल खोल दी है, बल्कि इलाके में 'जंगलराज' जैसी स्थिति पैदा कर दी है।
"थाने गई तो जिंदा नहीं बचोगी" – खौफ के साए में पीड़ित
पीड़िता मनीता, जो अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखती है, उसने अत्यंत साहस दिखाते हुए चकरघट्टा थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पीड़िता का आरोप है कि 20-22 की संख्या में आए दबंगों ने न केवल उसके घर पर हमला किया, बल्कि महिलाओं को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। दबंगों ने खुली चुनौती दी है कि यदि पुलिस के पास शिकायत लेकर गई, तो पूरे परिवार को जान से मार दिया जाएगा। इस धमकी के बाद से पीड़ित परिवार अपने ही घर में कैद होने को मजबूर है।
वीडियो वायरल, फिर भी पुलिस सिर्फ 'जांच' में उलझी
हैरानी की बात यह है कि घटना का स्पष्ट वीडियो सार्वजनिक डोमेन में होने के बावजूद चकरघट्टा थाना प्रभारी संतोष कुमार का रटा-रटाया जवाब सामने आ रहा है कि "तहरीर मिल गई है, जांच की जा रही है।" स्थानीय ग्रामीणों का सवाल है कि जब हमलावर साफ दिख रहे हैं और मामला SC/ST वर्ग से जुड़ा है, तो तत्काल गिरफ्तारी क्यों नहीं की गई? क्या पुलिस जानबूझकर दबंगों को संरक्षण दे रही है या फिर खाकी अब रसूखदारों के आगे नतमस्तक हो चुकी है?
डीएम-एसपी से न्याय की गुहार
अब यह गंभीर मामला जिला मजिस्ट्रेट (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) चन्दौली के संज्ञान में पहुंच चुका है। जनता यह पूछ रही है कि क्या चमेर बांध गांव की इन महिलाओं को संविधान द्वारा प्रदत्त सुरक्षा मिल पाएगी? यदि 22 नामजद आरोपियों पर तत्काल कठोर कार्रवाई नहीं होती, तो यह समाज में एक गलत संदेश जाएगा कि दबंग कानून से ऊपर हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन दोषियों को सलाखों के पीछे भेजता है या पीड़ित परिवार न्याय की बाट जोहता रह जाएगा।