चकरघट्टा लूटकांड का सच : क्या पुलिस को गुमराह करने वाले मुंशी पर भी गिरेगी गाज या फर्जी रिपोर्ट लिखाने का जारी रहेगा सिलसिला?
चकरघट्टा पुलिस की जांच में ₹75 हजार की लूट और रंगदारी की सनसनीखेज कहानी झूठी निकली है। ठेकेदार और मुंशी के गंभीर आरोप जांच में फुस्स हो गए। अब जनता पूछ रही है कि निर्दोष को फंसाने वालों पर पुलिस कब डंडा चलाएगी? पूरी सच्चाई जानने के लिए पढ़ें।
चकरघट्टा लूटकांड की पुलिस जांच में बड़ा खुलासा
कट्टा सटाकर लूट और रंगदारी के आरोप फर्जी निकले
पुलिया निर्माण के विवाद में हुई थी सिर्फ मारपीट
फर्जी केस दर्ज कराने वालों पर कार्रवाई की मांग
एसपी आकाश पटेल के अगले कदम पर टिकी नजरें
चंदौली जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। चकरघट्टा थाना क्षेत्र में कट्टा सटाकर ₹75 हजार लूटने और रंगदारी मांगने का जो शोर मचा था, उसका सच अब सबके सामने आ गया है। पुलिस की गहराई से की गई जांच में यह पूरी कहानी झूठी और मनगढ़ंत पाई गई है। इस खुलासे के बाद से ही पूरे नौगढ़ इलाके में हड़कंप मचा हुआ है।
पुलिस जांच में खुली आरोपों की पोल
दरअसल, सोनभद्र के नगपुर निवासी छोटू यादव को इस कथित लूटकांड का मुख्य आरोपी बनाया गया था। लेकिन जब पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) नागेंद्र कुमार रावत ने मामले की विवेचना की, तो पूरी तस्वीर ही बदल गई। पुलिस की तफ्तीश में न तो ₹75 हजार की लूट साबित हुई, न रंगदारी की बात सच निकली और न ही कट्टा सटाने का कोई सबूत मिला।
पुलिया निर्माण का था असली विवाद
थानाध्यक्ष संतोष कुमार के मुताबिक, इस घटना की जानकारी सबसे पहले डायल 112 के जरिए पुलिस तक पहुंची थी। तहरीर में आरोप बेहद संगीन थे, जिसके कारण पुलिस ने तुरंत मुकदमा दर्ज कर लिया था। लेकिन जब पुलिस ने आरोपी छोटू यादव को हिरासत में लेकर पूछताछ की और गवाहों के बयान दर्ज किए, तो पता चला कि यह मामला केवल पुलिया निर्माण के काम को लेकर ठेकेदार प्रदीप यादव और छोटू यादव के बीच हुआ आपसी झगड़ा और मारपीट का था।
मुंशी की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
अब क्षेत्र की जनता के बीच यह सवाल तेजी से तैर रहा है कि जब मौके पर कोई लूटपाट या कट्टा सटाने जैसी वारदात हुई ही नहीं, तो तहरीर में इतने संगीन आरोप किसने और क्यों लिखवाए? लोगों की सुई अब ठेकेदार प्रदीप यादव के मुंशी की तरफ घूम गई है, जिसकी दी गई सूचना के आधार पर पुलिस ने यह केस दर्ज किया था।
एसपी साहब के एक्शन का इंतजार
चकरघट्टा पुलिस ने दूध का दूध और पानी का पानी तो कर दिया है, लेकिन अब असली चुनौती पुलिस के सामने ही है। नौगढ़ के लोग पूछ रहे हैं कि किसी बेकसूर को इतने गंभीर अपराध में फंसाने और पुलिस का समय बर्बाद करने वालों को क्या यूं ही छोड़ दिया जाएगा? अब देखना यह है कि चंदौली के एसपी आकाश पटेल गलत जानकारी देकर पुलिस को गुमराह करने वाले मुंशी पर कब कानूनी डंडा चलाते हैं।