चकरघट्टा में 35 दिन बाद भी नहीं मिला लापता युवक, वकील ने CO से पूछा- 'जब स्कार्पियो से ले गए तो अपहरण का केस क्यों नहीं?'
चंदौली के चकरघट्टा में 35 दिनों से लापता युवक 'विरोधी' का सुराग न मिलने पर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। नौगढ़ थाने पर सैकड़ों महिलाओं के भारी प्रदर्शन के बाद पुलिस ने मुख्य गेट बंद कर दिया। सीओ ने अब चार दिन का आश्वासन दिया है।
35 दिनों से लापता है युवक विरोधी
महिलाओं के पहुंचते ही बंद हुआ गेट
अपहरण का केस न दर्ज करने पर सवाल
वकीलों ने पुलिस कार्यशैली को घेरा
सीओ ने दिया चार दिन का आश्वासन
चंदौली जिले के चकरघट्टा थाना क्षेत्र के गहिला गांव का यह मामला अब पूरी तरह गरमा चुका है। यहाँ का रहने वाला युवक 'विरोधी' पिछले 35 दिनों से लापता है, लेकिन पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं। अपने लाडले की तलाश में दर-दर भटक रही मां रामवती देवी का सब्र आखिरकार मंगलवार को टूट गया।
मां रामवती देवी सैकड़ों ग्रामीणों और महिलाओं के साथ नौगढ़ स्थित सीओ कार्यालय में न्याय की गुहार लगाने पहुंची थीं। जैसे ही महिलाओं की भारी भीड़ इंसाफ के नारे लगाते हुए आगे बढ़ी, पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। स्थिति को भांपते हुए आनन-फानन में नौगढ़ थाने का मुख्य गेट ही बंद कर दिया गया।
भीड़ देखकर बंद हुआ गेट, फिर वकील गए अंदर
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बड़ी संख्या में महिलाओं और ग्रामीणों को देखकर पुलिसकर्मियों में बेचैनी बढ़ गई। चूंकि सीओ कार्यालय नौगढ़ थाना परिसर के अंदर ही स्थित है, इसलिए मुख्य गेट पर ही लोगों को रोक दिया गया। पुलिस ने साफ कह दिया कि सभी लोग अंदर नहीं जा सकते।
इसके बाद सोनभद्र के वरिष्ठ अधिवक्ता राम जियावन सिंह यादव और बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रामचंद्र यादव के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल को अंदर जाने की अनुमति मिली। इस टीम में विजय बहादुर सिंह, रणविजय सिंह यादव, प्रदीप कुमार, प्रधान प्रतिनिधि अजय उर्फ विक्की और लापता युवक की मां व पत्नी शामिल थीं।
वकीलों ने सीओ के सामने उठाए तीखे सवाल
सीओ कार्यालय के अंदर हुई बातचीत के दौरान माहौल काफी असहज हो गया। वरिष्ठ वकील राम जियावन सिंह यादव ने पुलिस की कार्यशैली पर सीधे सवाल दागते हुए पूछा कि जब युवक को 12 मई को सेमरा गांव में एक शादी समारोह से स्कार्पियो गाड़ी में बैठाकर ले जाने की बात सामने आई थी, तो पुलिस ने अपहरण का मुकदमा क्यों नहीं दर्ज किया?
वकीलों का कहना था कि पुलिस ने सिर्फ गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। परिजनों ने पुलिस को पहले ही संभावित ठिकाने की जानकारी दे दी थी कि एक आरोपी के कबूलनामे के मुताबिक युवक को चकिया के सोनहुल गांव निवासी मल्लू उर्फ प्रदीप बाबा के यहाँ बंधक बनाकर रखा गया है, फिर भी पुलिस ने मुस्तैदी नहीं दिखाई।
सीओ का आश्वासन और सबसे बड़ा सवाल
अधिवक्ताओं के तीखे सवालों के बीच सीओ ने परिजनों को शांत कराते हुए आश्वस्त किया कि मामले में उचित कार्रवाई की जा रही है और अगले "चार दिन में बाबा आ जाएगा"। हालांकि, इस आश्वासन के बाद भी पीड़ित परिवार की चिंता कम नहीं हुई है।
क्षेत्र में अब यह मामला पुलिस की कार्यशैली और प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़ा सवाल बन चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर युवक का अपहरण नहीं हुआ था, तो वह पिछले 35 दिनों से आखिर कहाँ गायब है? नामजद तहरीर के बाद भी मुकदमा दर्ज करने में पुलिस ने हिचकिचाहट क्यों दिखाई?