चंद्रप्रभा सेंचुरी में 'मादा गुलदार' की धमक: दुधवा से रेस्क्यू कर देव पहाड़ी के घने जंगलों में छोड़ी गई तेंदुआ, बढ़ेगी जैव विविधता

 

लखीमपुर खीरी के दुधवा टाइगर रिजर्व से रेस्क्यू की गई एक मादा गुलदार (तेंदुआ) को चंदौली की चंद्रप्रभा सेंचुरी में सुरक्षित छोड़ दिया गया है। इससे जंगल की फूड चेन और पारिस्थितिक संतुलन और मजबूत होगा।

 
 

दुधवा टाइगर रिजर्व से सुरक्षित रेस्क्यू की गई मादा गुलदार

चंद्रप्रभा रेंज के देव पहाड़ी क्षेत्र में किया गया अवमुक्त

शिकार और शिकारी के बीच प्राकृतिक संतुलन होगा बेहतर

रेंजर अखिलेश दुबे की मौजूदगी में सफल हुआ पूरा ऑपरेशन

वन विभाग ने ग्रामीणों से की सतर्क रहने की विशेष अपील

 चंदौली जिले के मशहूर चंद्रप्रभा वन्य जीव विहार (सेंचुरी) में इन दिनों एक खास मेहमान की एंट्री को लेकर जबरदस्त हलचल मची हुई है। लखीमपुर खीरी के दुधवा टाइगर रिजर्व से सुरक्षित रेस्क्यू कर लाई गई एक मादा गुलदार (तेंदुआ) को मंगलवार देर शाम चंद्रप्रभा सेंचुरी के घने जंगलों में पूरी तरह आजाद कर दिया गया। इस तेंदुए को काशी वन्यजीव प्रभाग के चंद्रप्रभा रेंज अंतर्गत राजदरी अनुभाग की बलियारी बीट में स्थित 'देव पहाड़ी' क्षेत्र में छोड़ा गया है।

इस पूरी कार्रवाई को लेकर वन विभाग की टीम पूरे दिन मुस्तैद रही। दरअसल, दुधवा टाइगर रिजर्व के उत्तर निघासन रेंज के ग्राम मुर्तिहा में इस मादा तेंदुए के आ जाने से ग्रामीणों में भारी दहशत का माहौल बन गया था। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने फुर्ती दिखाते हुए तेंदुए का सुरक्षित रेस्क्यू किया था। इसके बाद डॉक्टरी जांच और जरूरी देखरेख के बाद अफसरों ने इसके रहने के लिए चंदौली के इस हरे-भरे जंगल को सबसे मुफीद पाया।

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जंगल का राजा अकेले क्यों रहे, इसलिए आई 'शेरनी'!
स्थानीय बोलचाल में लोग इसे 'राजा के लिए आई शेरनी' के रूप में भी देख रहे हैं, जिसने अब चंद्रप्रभा के जंगलों में अपनी जिंदगी की एक नई पारी की शुरुआत कर दी है। हालांकि, यह सिर्फ एक सामान्य वन्यजीव पुनर्वास की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसके पीछे वन विभाग की एक बहुत बड़ी पारिस्थितिक रणनीति काम कर रही है। वन अधिकारियों का मानना है कि इस मादा गुलदार के आने से सेंचुरी में वन्यजीवों की संख्या और पर्यावरण का संतुलन और अधिक बेहतर होगा।

इस तेंदुए की मौजूदगी से जंगल में शिकार और शिकारी के बीच का जो प्राकृतिक संतुलन (Predator–Prey Balance) होता है, वह काफी मजबूत हो जाएगा। इससे छोटे वन्यजीवों की आबादी भी प्राकृतिक रूप से नियंत्रित रहेगी, जिससे जंगल का ढांचा स्थिर बना रहेगा। आसान भाषा में कहें तो इससे जंगल की पूरी फूड चेन (खाद्य श्रृंखला) बेहद सक्रिय और मजबूत स्थिति में आ जाएगी।

रेंजर अखिलेश दुबे ने बताया क्यों जरूरी था यह कदम
चंद्रप्रभा रेंज के रेंजर अखिलेश दुबे ने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया केवल एक जानवर को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने की नहीं है, बल्कि यह हमारे पूरे इकोसिस्टम को पुनर्जीवित करने का एक बड़ा वैज्ञानिक प्रयास है। इससे वन्यजीवों की सुरक्षा भी पक्की होती है और उनके प्राकृतिक व्यवहार में कोई बाधा भी नहीं आती। उन्होंने बताया कि देव पहाड़ी क्षेत्र में पर्याप्त वन क्षेत्र, पानी के पुराने स्रोत और प्राकृतिक शिकार भरपूर मात्रा में मौजूद हैं, जो इस तेंदुए के लिए बिल्कुल सही घर है।

इस पूरे ऑपरेशन को वन क्षेत्राधिकारी अखिलेश दुबे और वन दरोगा ऋषु चौबे सहित काशी वन्यजीव प्रभाग के कई एक्सपर्ट वन कर्मियों की मौजूदगी में सुरक्षित तरीके से अंजाम दिया गया और इसकी वीडियोग्राफी भी कराई गई। अब वन विभाग की टीमें इस मादा गुलदार की हर गतिविधि पर पूरी नजर रख रही हैं। साथ ही वन विभाग ने आसपास के गांव वालों से अपील की है कि अगर तेंदुआ कहीं दिखे तो डरें नहीं, बल्कि तुरंत वन विभाग को खबर दें और फिलहाल जंगल की तरफ अकेले जाने से बचें।