पहाड़ जाना ही होगा: DFO का अल्टीमेटम, नई रेंज में ज्वाइनिंग के बाद ही मिलेगा जून का वेतन
काशी वन्य जीव प्रभाग में तबादला आदेश दबाने वाले कर्मचारियों और रेंजरों पर डीएफओ बी. शिव शंकर ने बड़ी सख्ती दिखाई है। उन्होंने साफ कह दिया है कि नई जगह ज्वाइनिंग के बाद ही जून का वेतन मिलेगा। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।
काशी वन्य जीव प्रभाग के डीएफओ का सख्त एक्शन
31 वन कर्मचारियों के तबादले के बाद मची खलबली
नए कार्यस्थल पर हाजिरी के बाद ही मिलेगा जून का वेतन
डीएफओ ने रेंजरों से 12 जून तक मांगी ज्वाइनिंग रिपोर्ट
'अपनी पसंद की पोस्टिंग' का दौर खत्म करने की तैयारी
काशी वन्य जीव प्रभाग रामनगर के वन विभाग में इस समय हड़कंप मचा हुआ है। वजह है प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) बी. शिव शंकर का एक बेहद कड़ा और नया आदेश। डीएफओ के इस कदम ने साफ कर दिया है कि विभाग में अब "आदेश पहले और व्यक्तिगत सुविधा बाद में" चलेगी। दरअसल, बीते दिनों विभाग के 31 'समान कार्य समान वेतन' वाले कर्मचारियों का तबादला किया गया था, लेकिन कई रेंजों के अधिकारियों ने उन्हें कार्यमुक्त नहीं किया। इस मनमानी पर अब डीएफओ ने कड़ा रुख अपना लिया है।
अब ज्वाइनिंग के बाद ही मिलेगा जून का वेतन
डीएफओ बी. शिव शंकर ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि कर्मचारियों को जहां नई तैनाती मिली है, उन्हें वहां जाना ही होगा। प्रशासनिक सख्ती की सबसे बड़ी मिसाल यह है कि इस आदेश को सीधे कर्मचारियों के वेतन से जोड़ दिया गया है। डीएफओ ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि जब तक स्थानांतरित कर्मचारी अपने नए कार्यस्थल पर पहुंचकर उपस्थिति दर्ज नहीं कराएंगे, तब तक उनका जून महीने का वेतन जारी नहीं किया जाएगा। वन विभाग के इतिहास में ऐसी कड़ाई बहुत कम ही देखने को मिलती है।
31 कर्मचारियों के फेरबदल से शुरू हुई थी चर्चा
आपको बता दें कि बीते 30 मई को विभाग ने एक ट्रांसफर लिस्ट जारी की थी। इसके तहत नौगढ़, जयमोहनी, चकिया, चंद्रप्रभा और मुगलसराय जैसी अलग-अलग रेंजों के 31 कर्मचारियों का कार्यक्षेत्र बदला गया था। विभाग का मकसद पहाड़ और मैदान की रेंजों के बीच कर्मचारियों का सही संतुलन बनाना था, ताकि फील्ड की व्यवस्था मजबूत हो सके। लेकिन 8 जून बीत जाने के बाद भी कई कर्मचारी पुरानी जगह पर ही जमे रहे। जब समीक्षा बैठक में यह सच सामने आया, तो डीएफओ को दोबारा सख्त आदेश जारी करना पड़ा।
रेंजरों की जवाबदेही भी हुई तय, 12 जून तक का समय
इस नए आदेश की सबसे खास बात यह है कि इसमें सिर्फ कर्मचारियों पर नहीं, बल्कि संबंधित रेंजरों (क्षेत्रीय वन अधिकारियों) पर भी गाज गिरी है। डीएफओ ने सभी रेंजरों को निर्देश दिया है कि ट्रांसफर किए गए कर्मचारियों को तुरंत कार्यमुक्त करें। इसके साथ ही, नई तैनाती वाली जगह पर उनके पहुंचने की रिपोर्ट आगामी 12 जून तक हर हाल में मुख्यालय को उपलब्ध कराएं। इससे साफ है कि अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
खत्म हो रहा है मनपसंद पोस्टिंग का दौर
वन विभाग के भीतर चल रहे इस पूरे घटनाक्रम को एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। अब तक कर्मचारी अपनी पसंद और सुविधा के हिसाब से पोस्टिंग और रिलिविंग तय कर लेते थे, लेकिन डीएफओ के इस एक्शन से 'अपनी पसंद की पोस्टिंग' का दौर खत्म होता दिख रहा है। वन विभाग के जानकारों का कहना है कि डीएफओ का यह कदम केवल एक तबादला नहीं है, बल्कि यह संदेश है कि जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा में लापरवाही नहीं चलेगी। जहां जिम्मेदारी मिली है, वहां ड्यूटी करनी ही होगी।