वन विभाग की टीम पर हमले का वीडियो वायरल, प्रधान अनिरुद्ध यादव की दबंगई कैमरे में कैद
चंदौली के नौगढ़ में वन विभाग की टीम पर हमले का सनसनीखेज वीडियो सामने आया है। आरक्षित वन क्षेत्र में अवैध बोरिंग रोकने गई टीम को घेरकर गाली-गलौज और मारपीट की कोशिश करते हुए प्रधान अनिरुद्ध यादव वीडियो में साफ देखे जा सकते हैं, जो अब उनके खिलाफ सबसे मजबूत कानूनी सबूत बन गया है।
वायरल वीडियो में प्रधान की दबंगई उजागर
वन कर्मियों को घेरकर दी गई भद्दी गालियां
"मारो-मारो" के नारों से बनाया हिंसक माहौल
वीडियो साक्ष्य के आधार पर आरोपियों की पहचान शुरू
आरक्षित वन क्षेत्र में अवैध बोरिंग का मामला गंभीर
चंदौली जनपद के तहसील नौगढ़ क्षेत्र से एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने वन विभाग की टीम पर हुए हमले की सच्चाई को पूरी तरह उजागर कर दिया है। 'चंदौली समाचार' को मिले इस वीडियो में देखा जा सकता है कि किस तरह ग्राम प्रधान अनिरुद्ध यादव और उनके समर्थक सरकारी कर्मचारियों के साथ बदतमीजी कर रहे हैं। आरक्षित वन क्षेत्र में अवैध बोरिंग पकड़ने गई टीम के साथ की गई गाली-गलौज और मारपीट के प्रयास की यह घटना अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
आधी रात का तांडव और 'मारो-मारो' के नारे
मामला 14 अप्रैल 2026 की रात का है, जब जयमोहनी रेंज के हरियाबांध बीट (भैसोड़़ा कंपार्टमेंट संख्या-18) में अवैध बोरिंग की सूचना पर रेंजर अमित श्रीवास्तव की टीम पहुंची थी। वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि प्रधान अनिरुद्ध यादव अपने 15-20 समर्थकों के साथ टीम को घेरे हुए हैं। जैसे ही वन कर्मियों ने बोरिंग रोकने और मशीन जब्त करने की बात की, प्रधान के समर्थकों ने आक्रामक रुख अपना लिया। वीडियो में "मारो-मारो" के नारे सुनाई दे रहे हैं और कर्मचारियों को गाड़ी से बाहर खींचने की कोशिश भी साफ़ नजर आ रही है।
वीडियो बना पुलिस के लिए सबसे बड़ा हथियार
इस मामले में थाना चकरघट्टा में पहले ही मुकदमा दर्ज किया जा चुका है, लेकिन अब यह वीडियो सामने आने के बाद आरोपियों की पहचान और भी आसान हो गई है। पुलिस और वन विभाग की टीम वीडियो फ्रेम के आधार पर उन सभी चेहरों को चिह्नित कर रही है जो भीड़ में शामिल होकर सरकारी कार्य में बाधा डाल रहे थे। रेंजर अमित श्रीवास्तव ने कहा कि वीडियो साक्ष्य के रूप में न्यायालय में भी पेश किया जाएगा, जिससे दोषियों को सख्त सजा मिलना तय है।
पुराना आपराधिक इतिहास और प्रशासन की सख्ती
जांच में यह भी सामने आया है कि प्रधान अनिरुद्ध यादव के खिलाफ भारतीय वन अधिनियम के तहत पहले से भी कई मुकदमे दर्ज हैं। बार-बार की जा रही अवैध गतिविधियों और सरकारी टीम पर दबाव बनाने के इस रवैये को प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लिया है। वन विभाग ने साफ कर दिया है कि आरक्षित जंगल में किसी भी प्रकार का अतिक्रमण या अवैध दोहन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सरकारी कार्य में बाधा डालने वालों को चेतावनी
वन विभाग ने संदेश दिया है कि अब उनके पास पुख्ता तकनीकी साक्ष्य मौजूद हैं। वीडियो क्लिप में दिख रहे हर व्यक्ति के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इस घटना के बाद से क्षेत्र के अन्य अवैध गतिविधियों में संलिप्त लोगों में भी हड़कंप मचा हुआ है। प्रशासन की इस सक्रियता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जंगल में अब दबंगई नहीं, बल्कि कानून का राज चलेगा।