नौगढ़ में 2 महीने से अंधेरे में वनवासी बस्ती, टूटे पड़े हैं पोल, ग्रामीणों ने पूछा- कहाँ हैं विधायक कैलाश आचार्य?

 

चन्दौली के नौगढ़ में विकास के दावों की पोल खुल गई है। सेमर साधोपुर की वनवासी बस्ती पिछले दो महीनों से पूरी तरह अंधेरे में है। टूटे पोल और लटकते तारों के बीच ग्रामीण बुनियादी बिजली संकट से जूझ रहे हैं।

 
 

दो महीने से अंधेरे में वनवासी बस्ती

सेमर साधोपुर में टूटा ट्रांसफार्मर

विधायक कैलाश आचार्य पर उठे सवाल

सांप-बिच्छुओं के साये में जिंदगी

चन्दौली जिले के नौगढ़ तहसील से एक बेहद परेशान करने वाली तस्वीर सामने आई है। यहाँ की ग्राम पंचायत सेमर साधोपुर की वनवासी बस्ती पिछले करीब दो महीने से घने अंधेरे में डूबी हुई है। आंधी-तूफान के कारण दो महीने पहले यहाँ का बिजली ट्रांसफार्मर गिर गया था, जिसके बाद पोल टूट गए और तार जमीन पर लटक गए।

हैरानी की बात यह है कि इतना लंबा समय बीत जाने के बाद भी बिजली विभाग सोया हुआ है और आपूर्ति बहाल नहीं कर सका है। इस स्थिति ने वनवासी समाज के विकास और सरकारी दावों की जमीनी हकीकत पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

समाधान दिवस में छलका महिलाओं का दर्द
बीती 6 जुलाई को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में अपनी फरियाद लेकर पहुंचीं वनवासी महिलाओं का गुस्सा और दर्द साफ देखने को मिला। उन्होंने वहाँ मौजूद अधिकारियों के सामने अपनी समस्या रखी और स्थानीय विधायक कैलाश आचार्य का नाम लेते हुए सीधे सवाल दागे।

महिलाओं ने पूछा कि आखिर वनवासियों के 'संकट मोचक' कहे जाने वाले विधायक जी कहाँ हैं? दो महीने से हमारी पूरी बस्ती अंधेरे की मार झेल रही है, लेकिन आज तक हमारी सुध लेने के लिए कोई भी जिम्मेदार जनप्रतिनिधि या अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।

सांप-बिच्छुओं के साये में कट रही रातें
बिजली गुल होने की वजह से सेमर साधोपुर की पूरी वनवासी बस्ती इस समय दहशत के साये में जीने को मजबूर है। गर्मी और बारिश के इस मौसम में रात होते ही चारों तरफ सांप-बिच्छुओं का खतरा अत्यधिक बढ़ जाता है।

अंधेरे के कारण बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पूरी तरह ठप हो गई है, वहीं महिलाएं रात के समय घरों से बाहर निकलने में भी डरती हैं। जमीन पर लटके बिजली के तार और टूटे हुए पोल किसी बड़े हादसे को दावत दे रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है।

प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़े सवाल
यह गंभीर मामला अब सिर्फ बिजली कटौती तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह वनवासी क्षेत्रों में सरकारी संवेदनशीलता और प्रशासनिक जवाबदेही की पोल खोल रहा है। बार-बार शिकायत करने के बावजूद अधिकारियों का न जागना सिस्टम की लापरवाही को दर्शाता है।

अब देखना यह होगा कि क्या सेमर साधोपुर के इन गरीब वनवासियों को जल्द ही बिजली की रोशनी नसीब हो पाती है या फिर बिजली विभाग के लापरवाह अधिकारी किसी बड़े हादसे के हो जाने के बाद ही अपनी नींद से जागेंगे।