DFO की कानूनी नोटिस भी बेअसर, वन विभाग कार्यालय पर कर्मचारियों ने खोला मोर्चा, लगे घूसखोरी के आरोप

 

रामनगर प्रभागीय वन कार्यालय पर कर्मचारियों ने डीएफओ की कानूनी नोटिस और चेतावनी के बावजूद जोरदार प्रदर्शन किया। विनियमितीकरण और ट्रांसफर में लाखों की वसूली के आरोप लगाते हुए कर्मचारियों ने बाबू को हटाने और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

 
 

चेतावनी के बाद भी प्रदर्शन जारी

ट्रांसफर और विनियमितीकरण में वसूली आरोप

बाबू रामानन्द यादव को हटाने मांग

हलफनामा देकर सच बताने की चुनौती

रामनगर वन विभाग परिसर में नारेबाजी

चंदौली जिले के रामनगर प्रभागीय वन कार्यालय पर चल रहा विवाद अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। डीएफओ बी शिवशंकर की कानूनी नोटिस, कानूनी कार्रवाई की सख्त चेतावनी और रामनगर थाने तक पहुंची तहरीर भी कर्मचारियों के कदम नहीं रोक सकी। मंगलवार को न्यूनतम दैनिक वेतन कर्मचारी संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में कर्मचारी रामनगर प्रभागीय कार्यालय पहुंच गए और अपनी मांगों को लेकर अड़ गए।

परिसर में गूंजे घूसखोरी के खिलाफ नारे
कार्यालय परिसर में पहुंचे आक्रोशित कर्मचारियों ने डीएफओ और विभागीय अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पूरा वन विभाग परिसर "घूसखोर रामानन्द यादव को हटाओ, वन विभाग बचाओ" के गगनभेदी नारों से गूंज उठा। कर्मचारियों का सीधा आरोप है कि विभाग के भीतर विनियमितीकरण (पक्का करने) और कर्मचारियों के स्थानांतरण (तबादले) की प्रक्रिया को मोटी कमाई का जरिया बना लिया गया है।

आवाज दबाने की कोशिश का लगाया आरोप
न्यूनतम दैनिक वेतन कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष महेंद्र यादव ने प्रदर्शन के दौरान अधिकारियों पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि न्यूनतम दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की जायज समस्याओं और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों की जांच कराने के बजाय, शिकायत उठाने वाले कर्मचारियों को ही डराया जा रहा है। उन्हें नोटिस भेजकर और कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर उनकी आवाज दबाने की कोशिश हो रही है, लेकिन कर्मचारी झुकेंगे नहीं।

तबादले और विनियमितीकरण में लाखों की वसूली
धरना दे रहे कर्मचारियों ने चौंकाने वाले खुलासे करते हुए आरोप लगाया कि कर्मचारियों को नियमित करने के नाम पर पहले लाखों रुपये की अवैध वसूली की गई। इसके बाद जब ट्रांसफर की बारी आई, तो उसमें भी जमकर पैसों की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि जिन कर्मचारियों ने पैसा नहीं दिया, उनका मनमाने ढंग से ट्रांसफर कर दिया गया, जबकि पैसे देने वाले चहेते लोग अब भी जमे हुए हैं।

नियमों की अनदेखी पर उठाए गंभीर सवाल
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि कई वन दरोगा और वनरक्षक ऐसे हैं, जिनका स्थानांतरण आदेश जारी होने के बावजूद वे आज भी अपने पुराने रेंज कार्यालयों में ही आराम से काम कर रहे हैं। कर्मचारियों ने तीखा सवाल उठाया कि यदि सरकार और विभाग के नियम सभी के लिए समान हैं, तो इन रसूखदार कर्मचारियों को अब तक पुराने स्थान से कार्यमुक्त (रिलीव) क्यों नहीं किया गया?

बाबू को हटाने पर ही सामने आएगा पूरा सच
धरना स्थल पर मौजूद हरित सामाजिक सेवा संस्थान उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष रमाशंकर यादव ने भी केंद्र में रहे बाबू रामानन्द यादव को तत्काल पद से हटाने की मांग की। उन्होंने दावा किया कि विभागीय संरक्षण के कारण ही आज तक इन गंभीर शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने खुली चुनौती दी कि जिन कर्मचारियों से पैसा लिया गया है, वे जांच होने पर कोर्ट में हलफनामा देकर सच साबित करने को तैयार हैं।

प्रशासनिक पारदर्शिता की होने जा रही अग्निपरीक्षा
अब वन विभाग का यह बड़ा विवाद केवल कर्मचारियों और अधिकारियों की आपसी लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि यह सीधे तौर पर प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ चुका है। एक तरफ जहाँ डीएफओ सबूत मांग रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कर्मचारी हलफनामा देने को तैयार बैठे हैं। अब पूरे जिले की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग इसकी निष्पक्ष जांच कराता है या यह आंदोलन आने वाले दिनों में और उग्र रूप लेगा।