कागजों पर हुई सफाई या जमीन पर भी बहेगा पानी? झाड़ियों से पटी कूड़ा रजवाहा नहर, संकट में दर्जनों गांवों की खेती

 

सोनभद्र से नौगढ़ तक हजारों किसानों की जमीनों को सींचने वाली कूड़ा रजवाहा नहर भारी बदहाली का शिकार है। धान रोपाई के इस महत्वपूर्ण समय में नहर पानी के बजाय कूड़े और झाड़ियों से पटी पड़ी है, जिससे किसानों में भारी आक्रोश है।

 
 

कूड़ा रजवाहा नहर बदहाल

हजारों बीघा खेती पर संकट

कोठी घाट पंप कैनाल बंद

टेल तक पानी पहुंचना चुनौती

कागजी दावों पर उठे सवाल

सोनभद्र से लेकर नौगढ़ तक के हजारों अन्नदाताओं की फसलों को नया जीवन देने वाली कूड़ा रजवाहा नहर इन दिनों विभागीय उदासीनता के कारण खुद बदहाली के आंसू रो रही है। क्षेत्र में धान की रोपाई का काम पूरे शबाब पर है और इस समय फसलों को पानी की सबसे ज्यादा जरूरत है। विडंबना यह है कि मानसून से पहले नहरों की मुकम्मल सफाई और मरम्मत का दावा करने वाला सिंचाई विभाग अब तक नींद से नहीं जागा है। वर्तमान में इस मुख्य नहर में पानी के बजाय भारी मात्रा में कूड़ा-करकट, जंगली झाड़ियां और बड़ी रुकावटें साफ नजर आ रही हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारी कब जागेंगे? अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो खेतों तक पानी पहुंचने से पहले ही किसानों की उम्मीदें दम तोड़ देंगी।

दर्जनों गांवों की उपजाऊ भूमि पर मंडराया संकट, अंतिम छोर तक नहीं पहुंच पा रहा पानी
सोनभद्र के पर्वतीय अंचलों से निकलने वाली इस कूड़ा रजवाहा नहर पर तिवारीपुर, सोनवार, मझगाईं, मझगांव, देवदत्तपुर, जनकपुर, नवदियापुर, देउरा, ललतापुर, बसौली, डुमरिया, झुमरिया, मरवटिया, दौलतपुर, रिठिया, बटोवा, नौगढ़, बाची, विशेषरपुर, भरदवा और तेंदुआ सहित दर्जनों गांवों की हजारों बीघा कृषि भूमि पूरी तरह निर्भर है। जमीनी हकीकत यह है कि नहर में जगह-जगह कचरे का अंबार लगा हुआ है। विशेषरपुर इलाके में नहर की पुलिया पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है, जिसके चलते रिठिया के पास नहर का पानी खेतों में जाने के बजाय सड़कों पर बर्बाद हो रहा है। वहीं, बटोवा के पास बड़े-बड़े पत्थरों और झाड़ियों ने जल प्रवाह को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया है, जिससे टेल (अंतिम छोर) पर बसे गांवों तक पानी पहुंचाना नामुमकिन हो गया है।

कोठी घाट पंप कैनाल भी पड़ा है ठप, किसानों की बढ़ी मुश्किलें
चालू मानसून सीजन में भी उम्मीद के मुताबिक बारिश न होने के कारण क्षेत्र के किसान पूरी तरह से सरकारी नहरों के पानी पर ही आश्रित हैं। इस विकट स्थिति के बीच कोठी घाट पर स्थापित पंप कैनाल भी तकनीकी खामियों या लापरवाही के चलते अब तक चालू नहीं किया जा सका है। इसका सीधा और बेहद नकारात्मक असर सिमरा, सही, अमदापुर, मलेवर, अमदहां और गोलाबाद जैसे कई प्रमुख गांवों की खेती पर पड़ रहा है। पीड़ित किसानों का कहना है कि उन्होंने बुवाई और रोपाई की तैयारी तो कर ली है, लेकिन पानी के अभाव में उनकी मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है। कई बार स्थानीय प्रशासन और विभागीय स्तर पर लिखित शिकायतें देने के बावजूद व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ।

कागजी दावों और फाइलों तक ही सीमित रही नहरों की सफाई
स्थानीय ग्रामीणों और किसान संगठनों का आरोप है कि हर साल नहरों की गाद सफाई, झाड़ी कटाई और मरम्मत के नाम पर सरकारी खजाने से लाखों-करोड़ों रुपये खर्च होने का दावा किया जाता है। यदि ये दावे सच हैं, तो खेती के सबसे नाजुक और महत्वपूर्ण समय में कूड़ा रजवाहा नहर कचरे के डंपिंग यार्ड में क्यों तब्दील है? सिंचाई व्यवस्था को समय रहते बहाल न करने की भारी कीमत क्षेत्र के गरीब किसानों को अपनी फसलों को खोकर चुकानी पड़ सकती है। अब क्षेत्र की जनता और किसान इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि क्या जिम्मेदार सिंचाई विभाग केवल कागजों पर ही सफाई का खेल खेलता रहेगा या धरातल पर उतरकर पानी का रास्ता साफ करेगा।