नौगढ़ में आधी रात आसमान से बरसी आफत: दो गांवों में आकाशीय बिजली गिरने से तीन लोग झुलसे

चंदौली के नौगढ़ तहसील के दो अलग-अलग गांवों में शुक्रवार की आधी रात आकाशीय बिजली गिरने से तीन लोग गंभीर रूप से झुलस गए। इनमें से एक महिला की हालत नाजुक होने के कारण उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया है।
 
नौगढ़ तहसील के दो गांवों में आकाशीय बिजली का कहर

खेत के मचान पर सो रहे ग्रामीण पर गिरी बिजली

घर के बरामदे में सो रही दो महिलाएं हुईं अचेत

हालत गंभीर होने पर एक महिला जिला अस्पताल रेफर

मौसम बदलने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ी दहशत

चंदौली जिले के तहसील नौगढ़ में क्या अब बरसात की हर रात ग्रामीणों के लिए जानलेवा बनती जा रही है? शुक्रवार की आधी रात नौगढ़ तहसील के दो गांवों में आकाशीय बिजली ने ऐसा कहर बरपाया कि तीन ग्रामीण इसकी चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गए। एक महिला की हालत नाजुक होने पर चिकित्सकों ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। घटना के बाद दोनों गांवों में दहशत का माहौल है। 


 खेत के मचान पर सो रहे बुडू़ंक को बिजली ने झुलसाया 
नौगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत लौवारी कलां निवासी बुड़ूक शुक्रवार रात भोजन करने के बाद खेत के पास बने मचान पर सो रहे थे। देर रात अचानक तेज हवा चली, बादल गरजने लगे और देखते ही देखते आकाशीय बिजली उनके ऊपर कहर बनकर टूट पड़ी। तेज झटके से वह गंभीर रूप से झुलस गए। परिजनों ने तत्काल निजी वाहन से उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौगढ़ पहुंचाया, जहां उनका उपचार शुरू किया गया।


मलेवर गांव में बरामदे में सो रहीं दो महिलाओं पर गिरी बिजली 
इसी तरह मलेवर गांव में भी बिजली ने कहर बरपा दिया। संगीता और उनकी देवरानी मौसमी रात में भोजन करने के बाद घर के बरामदे में सो रही थीं। तेज हवा और हल्की बारिश के बीच अचानक कड़की बिजली ने दोनों को अपनी चपेट में ले लिया। दोनों मौके पर ही अचेत होकर गिर पड़ीं। चीख-पुकार सुनकर पहुंचे परिजनों ने 108 एंबुलेंस की मदद से दोनों को सीएचसी नौगढ़ पहुंचाया।
दो घंटे तक नहीं आया होश, चिकित्सक डॉ. सत्य सिंह ने तीनों घायलों का प्राथमिक उपचार किया। उपचार के दौरान मलेवर निवासी संगीता की हालत लगातार गंभीर बनी रही। करीब दो घंटे तक होश नहीं आने पर चिकित्सकों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया। 

विशेषज्ञों कीचेतावनी 
लगातार बदल रहे मौसम और आकाशीय बिजली की घटनाओं ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि गरज-चमक के दौरान खुले खेत, मचान, पेड़ों के नीचे या खुले बरामदे में रुकना जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसे मौसम में सुरक्षित स्थान पर रहने और सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।