आदत बदलिए, एक्सीडेंट रोकिए: चंदौली में युवाओं ने सड़क सुरक्षा को बनाया जन-आंदोलन, कॉलेज में अनूठी पहल
सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए नौगढ़ राजकीय महाविद्यालय के युवाओं ने नई मिसाल पेश की है। रोड सेफ्टी क्लब के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में न केवल जागरूकता रैली निकाली गई, बल्कि कॉलेज परिसर में हेलमेट और लाइसेंस की अनिवार्य जांच कर कड़ा संदेश दिया गया।
युवाओं के हाथों सड़क सुरक्षा की कमान
कॉलेज परिसर में हेलमेट-लाइसेंस की जांच
सड़क सुरक्षा अब सामाजिक दायित्व बना
प्राचार्य ने दिया व्यवहार बदलने का मंत्र
जागरूकता रैली से बदला नौगढ़ का माहौल
कहा जाता है कि सड़क दुर्घटनाएं अक्सर एक पल की लापरवाही का नतीजा होती हैं, लेकिन इन्हें रोकने की शुरुआत अगर सही समय और सही जगह से हो, तो बड़ा बदलाव संभव है। चंदौली जिले के नौगढ़ स्थित राजकीय महाविद्यालय में मंगलवार को कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहां सड़क सुरक्षा को केवल एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि युवाओं के सामाजिक दायित्व के रूप में प्रस्तुत किया गया।
परिसर में नियमों का कड़ाई से पालन
रोड सेफ्टी क्लब के तत्वावधान में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम ने छात्रों को सोचने पर मजबूर किया कि वाहन चलाना सिर्फ एक अधिकार नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है। कार्यक्रम की खास बात यह रही कि कॉलेज प्रशासन ने केवल उपदेश नहीं दिए, बल्कि नियमों को धरातल पर उतार कर दिखाया। कॉलेज परिसर के मुख्य द्वार पर छात्रों और उनके अभिभावकों के वाहनों की सघन जांच की गई। इस दौरान हेलमेट और ड्राइविंग लाइसेंस की जांच कर यह संदेश दिया गया कि कानून की अनदेखी अब स्वीकार्य नहीं होगी। जिन चालकों के पास दस्तावेज या हेलमेट की कमी पाई गई, उन्हें भविष्य के लिए सख्त हिदायत दी गई।
जागरूकता रैली और युवा चेतना
सड़क सुरक्षा अभियान के तहत एक विशाल जागरूकता रैली निकाली गई। इसमें छात्र–छात्राओं ने जोशीले नारों और रचनात्मक पोस्टरों के माध्यम से समाज को जागरूक किया। रैली के दौरान “हेलमेट पहनना शान नहीं, सुरक्षा है” और “तेज रफ्तार नहीं, सुरक्षित सफर जरूरी” जैसे नारों ने राहगीरों का ध्यान अपनी ओर खींचा। छात्रों ने स्पष्ट किया कि सड़क सुरक्षा किसी एक सरकारी विभाग का काम नहीं, बल्कि हर नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।
आदत बदलने से कम होंगे हादसे: प्राचार्य
महाविद्यालय के सभागार में आयोजित संगोष्ठी के दौरान प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि सड़क सुरक्षा का सबसे बड़ा समाधान हमारे व्यवहार और आदतों में बदलाव है। उन्होंने जोर देकर कहा कि निर्धारित गति सीमा, हेलमेट और सीट बेल्ट जैसे नियम केवल चालान से बचने के लिए नहीं, बल्कि अनमोल जीवन को सुरक्षित रखने के लिए बने हैं। संगोष्ठी में छात्रों ने सड़क दुर्घटनाओं के दर्दनाक अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे एक गलती पूरे परिवार को मानसिक और आर्थिक रूप से तोड़ देती है।
कार्यक्रम का सफल संचालन और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. कृष्ण कुमार द्वारा किया गया। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि आज का युवा पीढ़ी सड़क सुरक्षा को अपनी आदत बना ले, तो भविष्य में सड़क हादसों में स्वतः ही बड़ी गिरावट आएगी। इस अवसर पर मनीष राज बावरे, कमला प्रसाद, बबीता सहित बड़ी संख्या में शिक्षक और छात्र–छात्राएं उपस्थित रहे।