नौगढ़ की बंद गौशाला में उगेंगे 'पैसे वाले पेड़', DM की नई पहल से बदलेगी जरहर की किस्मत

 

चंदौली के नौगढ़ में वर्षों से बंद पड़ी चकचोइया गौशाला अब कमाई और हरियाली का नया मॉडल बनने जा रही है। जिलाधिकारी की पहल पर यहाँ 500 औषधीय पौधे लगाए जा रहे हैं, जो गांव की तस्वीर बदल देंगे। पूरी खबर पढ़ें...

 
 

नौगढ़ चकचोइया गौशाला का कायाकल्प

सहजन और करी पत्ते से कमाई

जरहर ग्राम पंचायत की नई मिसाल

जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग की पहल

चहनिया रेंज से आए खास पौधे

यूपी के चंदौली जिले से एक बहुत ही सकारात्मक और अनोखी खबर सामने आ रही है। अक्सर देखा जाता है कि गांवों में बंद पड़ी सरकारी संपत्तियां या तो बेकार हो जाती हैं या उन पर अवैध कब्जे हो जाते हैं। लेकिन चंदौली के जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग ने एक ऐसी दूरदर्शी सोच दिखाई है, जिससे विकास खंड नौगढ़ की पूरी तस्वीर बदलने वाली है।

यहाँ के जरहर ग्राम पंचायत में स्थित चकचोइया गौशाला काफी समय से वीरान पड़ी थी क्योंकि यहाँ गोवंश यानी गायों की संख्या न के बराबर रह गई थी। अब प्रशासन और स्थानीय ग्राम पंचायत की साझी कोशिशों से इस सूनी पड़ी जमीन को "हरियाली का बैंक" बनाने की तैयारी कर ली गई है। इस अभियान के तहत यहाँ सहजन, करी पत्ता और बकैन जैसे कीमती व औषधीय गुणों वाले 500 पौधे लगाए जाएंगे।

रविवार को जिलाधिकारी खुद करेंगे शुरुआत
इस बड़े बदलाव की शुरुआत करने के लिए खुद जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग रविवार को चकचोइया गौशाला का दौरा करेंगे। वे अपने हाथों से पहला पौधा लगाकर इस वृक्षारोपण महायज्ञ-2026 की शुरुआत करेंगे। इस मौके पर गांव के प्रधान प्रतिनिधि अशोक यादव, क्षेत्र पंचायत सदस्य (BDC), ग्राम पंचायत के सदस्य और गांव के अन्य गणमान्य लोग भी मौजूद रहेंगे और अपना योगदान देंगे।

इस अभियान के पीछे प्रशासन का बड़ा ही साफ संदेश है कि पर्यावरण की रक्षा करना सिर्फ सरकार का काम नहीं है, बल्कि इसमें आम जनता की भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है। जब पूरा गांव मिलकर इस काम में जुटेगा, तभी यह योजना पूरी तरह सफल हो पाएगी।

पौधों की सुरक्षा के लिए की गई है खास तैयारी
सिर्फ पौधे लगा देना ही काफी नहीं होता, बल्कि उन्हें जिंदा रखकर बड़ा पेड़ बनाना सबसे बड़ी चुनौती होती है। ग्राम पंचायत के प्रधान प्रतिनिधि अशोक यादव ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि जीबी रामजी योजना के तहत जमीन पर 500 गड्ढे पहले ही खोद लिए गए हैं। इन गड्ढों में अच्छी क्वालिटी की कंपोस्ट खाद भी डाल दी गई है ताकि पौधों को पूरा पोषण मिल सके।

इतना ही नहीं, पौधों को समय पर पानी देने, उनकी निराई-गुड़ाई करने और उन्हें जानवरों से बचाने के लिए एक माली की परमानेंट तैनाती की जा रही है। अशोक यादव का कहना है कि हमारा मकसद सिर्फ फोटो खिंचवाने के लिए पौधे लगाना नहीं है, बल्कि उन्हें पाल-पोसकर बड़ा पेड़ बनाना है ताकि आने वाले समय में गांव को इसका पूरा फायदा मिले।

चहनिया रेंज से मंगाए गए हैं खास किस्म के पौधे
इस बारे में खंड विकास अधिकारी (BDO) राकेश सिंह ने बताया कि पौधों की क्वालिटी के साथ कोई समझौता नहीं किया गया है। इन 500 पौधों को खास तौर पर चहनिया रेंज की सरकारी नर्सरी से मंगाया गया है। BDO साहब का मानना है कि जब गांव के बीचों-बीच इतनी बड़ी हरियाली विकसित होगी, तो इसे देखकर दूसरे लोग भी प्रेरित होंगे।

जब लोग अपने सामने इन पौधों को बड़ा होते देखेंगे, तो उनके मन में भी अपने घरों, खाली खेतों और सार्वजनिक जगहों पर पेड़ लगाने की इच्छा जागेगी। यह पहल हमारी आने वाली पीढ़ी को प्रकृति और पर्यावरण के प्रति ज्यादा जागरूक और संवेदनशील बनाएगी, जो आज के समय में बेहद जरूरी है।

एक तीर से कई निशाने: पर्यावरण के साथ होगी कमाई
इस अनोखे प्रोजेक्ट से जरहर गांव और उसके आसपास के लोगों को कई तरह के फायदे मिलने वाले हैं। सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि सहजन (ड्रमस्टिक) और करी पत्ता के पेड़ जब बड़े होंगे, तो इनकी पत्तियों और फलों को बेचकर ग्राम पंचायत की आमदनी बढ़ेगी। यह पंचायत के फंड को मजबूत करने का एक बेहतरीन जरिया बनेगा।

इसके अलावा, बकैन जैसे छायादार पेड़ गांव को शुद्ध हवा देंगे और तपती गर्मी में राहत पहुंचाएंगे। खाली पड़ी सरकारी जमीन पर पेड़ लग जाने से भू-माफिया या अन्य लोग इस पर कब्जा नहीं कर पाएंगे। साथ ही सहजन की पत्तियां गांव के पशुपालकों के लिए बेहद पौष्टिक चारे का काम करेंगी, जिससे दूध का उत्पादन भी बढ़ सकता है।

पूरे चंदौली जिले में लागू हो सकता है यह जरहर मॉडल
जरहर गांव की यह छोटी सी शुरुआत आने वाले समय में एक बहुत बड़ा आंदोलन बन सकती है। अगर यहाँ लगाए गए पौधों की ठीक से देखभाल हो जाती है और यह प्रयोग कामयाब रहता है, तो प्रशासन इसे पूरे चंदौली जिले में लागू कर सकता है। जिले में जितनी भी गौशालाएं बंद या वीरान पड़ी हैं, उन्हें इसी तरह हरियाली और कमाई के केंद्र में बदल दिया जाएगा।

यही वजह है कि इस समय पूरे जिले की नजर जरहर गांव के इस नए प्रयोग पर टिकी हुई है। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो चंदौली जिला बंद पड़ी सरकारी संपत्तियों के सही इस्तेमाल का एक ऐसा बेहतरीन उदाहरण पेश करेगा, जिसे पूरा उत्तर प्रदेश देखेगा।