नौगढ़ के लौवारी कला गांव में जमीन पर बैठकर प्रधान जी बने 'योग गुरु', ग्रामीणों को सिखाए सेहत के गुर

 

चंदौली के लौवारी कला गांव में ग्राम प्रधान यशवंत सिंह यादव ने खुद जमीन पर बैठकर ग्रामीणों के साथ योगाभ्यास किया। इस अनोखे प्रयास और उनके जमीन से जुड़े नेतृत्व की पूरे इलाके में खूब सराहना हो रही है।

 
 

चंदौली जिले के तहसील नौगढ़ के लौवारी कला गांव में सुबह-सुबह एक बहुत ही सुंदर और अनोखा नजारा देखने को मिला। गांव के खुले मैदान में बड़ी संख्या में ग्रामीण योग करने के लिए जुटे थे। इस दौरान सबसे खास बात यह रही कि गांव के प्रधान यशवंत सिंह यादव मंच पर बैठने के बजाय सीधे आम लोगों के बीच जमीन पर बैठ गए। उन्होंने खुद आगे बढ़कर लोगों को योग सिखाया और हर आसन की बारीकियां समझाईं।

फाइलों से नहीं, फील्ड से बदलेगा गांव
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पहली बार किसी जनप्रतिनिधि को इस तरह ऊपर से आदेश देने के बजाय नीचे जमीन पर उतरकर साथ में अभ्यास करते देखा। इस दौरान प्रधान यशवंत सिंह यादव ने एक बड़ा संदेश देते हुए कहा कि गांव का असली विकास कागजों या फाइलों से नहीं होता, बल्कि जमीन पर उतरकर काम करने से होता है। उन्होंने कहा कि हमारा स्वास्थ्य ही हमारा सबसे बड़ा धन है। अगर गांव का हर व्यक्ति बीमारियां छोड़कर स्वस्थ रहेगा, तभी हमारा समाज मजबूत बनेगा।

बिना किसी खर्च के सेहतमंद रहने का उपाय
योग शिविर के दौरान ग्रामीणों को बहुत ही आसान और रोज काम आने वाले योगासन व प्राणायाम सिखाए गए। प्रधान ने लोगों को बताया कि शरीर के संतुलन के लिए ताड़ासन, पेट और पाचन के लिए वज्रासन तथा कमर दर्द से राहत के लिए भुजंगासन बहुत जरूरी है। इसके साथ ही मानसिक शांति और तनाव दूर करने के लिए अनुलोम-विलोम, कपालभाति और भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास कराया गया। उन्होंने बताया कि इसके लिए किसी पैसे की जरूरत नहीं है, बस रोजाना सही तरीके से अभ्यास करना है।

भाषण नहीं, उदाहरण पेश करने वाला नेतृत्व
इस आयोजन ने आसपास के इलाके और युवा प्रधानों को एक बड़ा संदेश दिया है। लोगों का कहना है कि आज गांवों को ऐसे ही सक्रिय और नई सोच वाले नेतृत्व की जरूरत है, जो सिर्फ बैठकों में बड़ी-बड़ी बातें न करें बल्कि खुद जमीन पर काम करके उदाहरण पेश करें। यही वजह है कि लौवारी कला पंचायत की यह सकारात्मक पहल अब चंदौली की दूसरी ग्राम पंचायतों के लिए भी एक बड़ी प्रेरणा बन रही है।

हर पंचायत में होने चाहिए ऐसे प्रधान
कार्यक्रम खत्म होने के बाद गांव वालों ने अपने प्रधान जी की इस पहल की दिल खोलकर तारीफ की। ग्रामीणों का साफ कहना है कि अगर देश की हर पंचायत में ऐसे ही जमीन से जुड़े और एक्टिव प्रधान आ जाएं, तो हमारे गांवों की तस्वीर बदलते देर नहीं लगेगी। लौवारी कला का यह आयोजन अब सिर्फ एक दिन का कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह बदलते ग्रामीण भारत का एक बड़ा संदेश बन चुका है।