चंदौली समाचार की खबर का बड़ा असर: नौगढ़ पहुंचे चीफ इंजीनियर, अनिल वर्मा के आगे गिड़गिड़ाते नजर आए अभियंता
नौगढ़ विद्युत उपकेंद्र की बदहाली पर 'चंदौली समाचार' की खबर का ऐतिहासिक असर हुआ है। महीनों से खराब ट्रॉलियों के कारण अंधेरे में डूबे इलाके की सुध लेने खुद चीफ इंजीनियर पहुंचे, जिसके बाद लापरवाह अधिकारी उनके सामने गिड़गिड़ाते नजर आए।
नौगढ़ विद्युत उपकेंद्र पर चीफ इंजीनियर का औचक निरीक्षण
खराब ट्रॉलियों की मरम्मत के लिए युद्धस्तर पर कार्य शुरू
लापरवाह अधिशासी अभियंता और सहायक अभियंता को कड़ी फटकार
'चंदौली समाचार' की खबर के बाद जागा कुंभकर्णी बिजली विभाग
चंदौली समाचार का बड़ा असर: नौगढ़ में एसी कमरों से बाहर निकले बिजली विभाग के आला अफसर, चीफ इंजीनियर ने जमीन पर उतरकर जांची हकीकत
चंदौली जिले में पत्रकारिता के जनसरोकार का एक बड़ा उदाहरण देखने को मिला है। नौगढ़ विद्युत उपकेंद्र की बदहाल व्यवस्था और अधिकारियों की संवेदनहीनता को लेकर 'चंदौली समाचार' द्वारा प्रमुखता से प्रकाशित खबर का ऐसा असर हुआ कि बिजली विभाग के ऊंचे पदों पर बैठे अधिकारियों को अपने वातानुकूलित दफ्तरों से निकलकर भीषण गर्मी में जमीन पर उतरना पड़ा। 7 मई को खबर प्रकाशित होने के बाद पूरे विभाग में खलबली मच गई, जिसके परिणामस्वरूप शुक्रवार को मुख्य अभियंता (चीफ इंजीनियर) अनिल वर्मा स्वयं नौगढ़ उपकेंद्र पहुंचे।
एक ट्रॉली के भरोसे थे चार फीडर, चंदौली समाचार की खबर ने खोली पोल
विदित हो कि नौगढ़ विद्युत उपकेंद्र पर पिछले चार महीनों से ट्रॉलियां खराब पड़ी थीं। आलम यह था कि अमदहां, टाउन, रिठिया और भैसौड़ा जैसे महत्वपूर्ण फीडरों की बिजली व्यवस्था महज एक ट्रॉली के सहारे चल रही थी। इसके कारण क्षेत्र की जनता लो-वोल्टेज और बार-बार होने वाली कटौती से त्रस्त थी। शिकायतों के बावजूद स्थानीय अधिकारी 'देखते हैं' और 'बात करते हैं' जैसे रटे-रटाए जवाब देकर पल्ला झाड़ लेते थे। 'चंदौली समाचार' ने इस तकनीकी लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता को प्रमुखता से उजागर किया, जिससे शासन-प्रशासन तक हड़कंप मच गया।
चीफ इंजीनियर के सामने गिड़गिड़ाते नजर आए जिम्मेदार
शुक्रवार को जब मुख्य अभियंता अनिल वर्मा और अधीक्षण अभियंता का काफिला अचानक नौगढ़ उपकेंद्र पहुंचा, तो वहां तैनात अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। मौके पर व्यवस्था की वास्तविक और दयनीय स्थिति देखकर चीफ इंजीनियर का पारा चढ़ गया। उन्होंने अधिशासी अभियंता आशीष कुमार और संबंधित सहायक अभियंता को जमकर फटकार लगाई। स्थिति ऐसी थी कि जो अधिकारी सुबह तक सवालों के जवाब देने से बच रहे थे, वे मुख्य अभियंता के सामने सफाई देने के लिए शब्द नहीं जुटा पा रहे थे और गिड़गिड़ाते नजर आए। अधिशासी अभियंता आशीष कुमार के पास व्यवस्था दुरुस्त न होने का कोई ठोस बहाना नहीं था।
देर रात तक चला मरम्मत का काम
खबर के प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिन ट्रॉलियों को चार महीने से नजरअंदाज किया जा रहा था, उन्हें ठीक करने के लिए तत्काल आधा दर्जन मिस्त्रियों को काम पर लगा दिया गया। शुक्रवार की रात तक उपकेंद्र पर मरम्मत का अभियान युद्धस्तर पर चलता रहा। अधिकारियों ने निर्देश दिए हैं कि जब तक व्यवस्था पूरी तरह बहाल नहीं हो जाती, तब तक लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जनता ने कहा- "यही है सच की ताकत"
क्षेत्रीय उपभोक्ताओं और स्थानीय निवासियों ने 'चंदौली समाचार' के प्रति आभार व्यक्त किया है। लोगों का कहना है कि अगर यह मुद्दा मजबूती से नहीं उठाया जाता, तो विभाग की कुंभकर्णी नींद कभी नहीं टूटती। स्थानीय नागरिकों के अनुसार, "आज हमें समझ आया कि जवाबदेह पत्रकारिता क्या होती है।"
'चंदौली समाचार' अपने पाठकों और चंदौली की जनता को विश्वास दिलाता है कि हम चापलूसी के बजाय जमीनी सच्चाई को उजागर करना जारी रखेंगे। हमारा उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार लाना और जनता की आवाज को जिम्मेदार गलियारों तक पहुंचाना है।