हिंडाल्को, एनसीएल और अल्ट्राटेक में बाहरी लोगों को काम, सांसद ने श्रम मंत्री को लिखा पत्र
सोनभद्र के सांसद कुंवर छोटेलाल खरवार ने केंद्रीय श्रम मंत्री को पत्र लिखकर नौगढ़, चकिया और सोनभद्र की बड़ी कंपनियों में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की मांग की है। उन्होंने बाहरी लोगों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया है।
सांसद छोटेलाल खरवार ने लिखा पत्र
स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता की मांग
हिंडाल्को, एनसीएल और अल्ट्राटेक पर सवाल
सीएसआर (CSR) फंड और कौशल विकास पर सवाल
नौगढ़ और चकिया से युवाओं का पलायन
सोनभद्र के सांसद कुंवर छोटेलाल खरवार ने 3 अगस्त 2026 को केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया को एक पत्र सौंपा है। इस पत्र ने नौगढ़, चकिया और सोनभद्र के हजारों बेरोजगार युवाओं के रोजगार का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
सांसद का कहना है कि जब क्षेत्र की जमीन, जंगल और खनिज संसाधनों से उद्योग फल-फूल रहे हैं, तो फिर स्थानीय युवाओं को रोजगार में पहला अधिकार क्यों नहीं मिल पा रहा है?
बाहरी लोगों को काम, स्थानीय युवा पलायन को मजबूर
सांसद ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि राबर्ट्सगंज संसदीय क्षेत्र में स्थापित बड़ी औद्योगिक इकाइयों में स्थानीय युवाओं को मौका नहीं मिल पा रहा है। कंपनियों में बाहरी लोगों को नौकरियां दी जा रही हैं। इसके चलते नौगढ़, चकिया और सोनभद्र के हजारों होनहार युवा रोजगार की तलाश में दूसरे बड़े शहरों की ओर पलायन करने के लिए मजबूर हैं। उन्होंने इसे क्षेत्र के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बताया है।
हिंडाल्को, एनसीएल और अल्ट्राटेक जैसी कंपनियों पर नजरें
सांसद ने अपने पत्र में विशेष रूप से हिंडाल्को, एनसीएल (नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) और अल्ट्राटेक जैसी बड़ी कंपनियों का उल्लेख किया है। ये कंपनियां इसी क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों और मानव श्रम का उपयोग करती हैं। पत्र सामने आने के बाद अब जिला प्रशासन और श्रम विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं कि वे कंपनियों में स्थानीय युवाओं की भागीदारी की समीक्षा क्यों नहीं करते?
सीएसआर (CSR) फंड के उपयोग पर भी उठे गंभीर सवाल
ये बड़ी कंपनियां हर साल कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास पर करोड़ों रुपये खर्च करती हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि नौगढ़ और चकिया के युवाओं के लिए कितने स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम चलाए गए?
कितने युवाओं को प्रशिक्षण देकर नौकरियां दी गईं? सांसद की इस पहल ने रोजगार के मुद्दे को फिर से बड़ा राजनीतिक और सामाजिक रूप दे दिया है।