नौगढ़ की 40 महिलाओं को DIG वैभव कृष्ण खुद कराएंगे बाबा विश्वनाथ के दर्शन, आज पूरा होगा सालों पुराना सपना
चन्दौली के सुदूर नौगढ़ जंगल की 40 महिलाएं आज पहली बार वाराणसी जाकर बाबा विश्वनाथ के दर्शन करेंगी। मिशन शक्ति के दौरान महिलाओं की इस इच्छा को जानकर डीआईजी वैभव कृष्ण ने खुद इस यात्रा का जिम्मा उठाया।
डीआईजी वैभव कृष्ण कराएंगे मुफ्त दर्शन
नौगढ़ की 40 महिलाएं पहुंचेंगी काशी
'मिशन शक्ति' के दौरान हुआ था वादा
जिंदगी में पहली बार देखेंगी शहर
संवेदनशील पुलिसिंग की अनोखी मिसाल पेश
चन्दौली जिले के विकासखंड नौगढ़ से एक बेहद भावुक और दिल को छू लेने वाली खबर सामने आई है। जब वाराणसी परिक्षेत्र के डीआईजी वैभव कृष्ण ने सुदूर जंगल में बसी महिलाओं से पूछा—‘क्या कभी बनारस देखा है?’ तो उनके इस एक सवाल के जवाब ने अधिकारी को झकझोर कर रख दिया। महिलाओं ने रुआंसे मन से कहा—"नाहीं बाबू, जिनगी घर-दुआर, जंगल अउर खेत में बीत गई... मन में बस एगो आस बा, एक बेर बाबा विश्वनाथ के दर्शन हो जाएं।" यह सुनते ही डीआईजी ने जो फैसला लिया, वह आज सोमवार 29 जून को हकीकत में बदलने जा रहा है।
14 जून की मुलाकात ने सच किया सपना
दरअसल, बिहार बॉर्डर से सटे नौगढ़ तहसील के आखिरी छोर पर बसे पंडी गांव में बीती 14 जून को डीआईजी वैभव कृष्ण और एसपी आकाश पटेल 'मिशन शक्ति' अभियान के तहत पहुंचे थे। जब अधिकारियों को पता चला कि इस गांव की महिलाओं ने आज तक कभी शहर नहीं देखा और न ही वे कभी बाबा विश्वनाथ के दरबार जा सकी हैं, तो उन्होंने तुरंत मौके पर ही इन महिलाओं की सालों पुरानी इच्छा को पूरा करने का फैसला ले लिया।
आज टूटेगी चौखट की 'लक्ष्मण रेखा'
आज करीब 200 किलोमीटर दूर घने जंगलों के बीच बसे पंडी गांव से निकलकर करीब 40 महिलाएं पहली बार काशी विश्वनाथ धाम पहुंचेंगी। वे सिर्फ बाबा के दरबार में माथा ही नहीं टेकेंगी, बल्कि वाराणसी के अन्य प्रमुख और ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों का भ्रमण भी करेंगी। गरीबी, परिवहन साधनों की कमी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण जो महिलाएं कभी गांव की सीमा से बाहर नहीं जा सकीं, उनके लिए यह यात्रा एक नई और आधुनिक दुनिया से पहला परिचय होगी।
संवेदनशील पुलिसिंग के साथ विकास पर भी सवाल
राणा परिवार की तरह यहाँ भी चन्दौली पुलिस ने संवेदनशीलता की एक बड़ी मिसाल पेश की है, जो वनांचल की महिलाओं के आत्मविश्वास को नई उड़ान देगा। हालांकि, यह घटना पुलिस की तारीफ के साथ-साथ सिस्टम पर एक बड़ा सवाल भी छोड़ जाती है कि आजादी के इतने दशकों बाद भी हमारे जिले में ऐसे गांव क्यों हैं, जहां की महिलाओं ने कभी अपने गांव की सीमा तक नहीं लांघी? बहरहाल, पुलिस की इस अनूठी पहल की पूरे क्षेत्र में जमकर सराहना हो रही है।