दिल से दे रहीं आशीर्वाद : DIG वैभव कृष्ण ने कराया काशी विश्वनाथ के दर्शन, रो पड़ीं नौगढ़ की वनवासी महिलाएं

चंदौली के दूरदराज जंगलों में बसे पंडी गांव के वनवासी परिवारों की दशकों पुरानी मुराद पूरी हो गई। डीआईजी वैभव कृष्ण की अनोखी पहल पर ग्रामीण पहली बार बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने काशी पहुंचे, जहाँ भावुक महिलाओं की आँखें छलक उठीं।

 
 

डीआईजी वैभव कृष्ण के प्रयास से वनवासियों का सपना हुआ सच

जिंदगी में पहली बार बनारस की चकाचौंध देख हैरान हुए ग्रामीण

बाबा विश्वनाथ के दरबार में पहुँचते ही रो पड़ीं बुजुर्ग महिलाएँ

वनवासी अपने साथ लेकर आए थे पहाड़ का मीठा पानी

जेएचवी मॉल की लिफ्ट और आधुनिक दुनिया देख बच्चे हुए खुश

क्या किसी सरकारी अधिकारी का एक संवेदनशील फैसला किसी पूरे गाँव की जिंदगी का सबसे खूबसूरत और कभी न भूलने वाला पल बन सकता है? उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के नौगढ़ क्षेत्र में बिहार की सीमा से सटे पंडी गाँव ने दुनिया को इसका जीता-जागता जवाब दे दिया है। घने जंगलों के बीच रहने वाले दर्जनों वनवासी परिवारों ने अपनी जिंदगी में पहली बार बनारस की धरती पर कदम रखा। उन्होंने न सिर्फ बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए, बल्कि आधुनिक शहर की चमचमाती दुनिया को भी अपनी आँखों से निहारा।

डीआईजी साहब से की थी एक छोटी सी फरियाद
इस ऐतिहासिक और भावुक यात्रा की शुरुआत बीते 14 जून को हुई थी। वाराणसी परिक्षेत्र के डीआईजी वैभव कृष्ण जब नौगढ़ इलाके के दौरे पर पंडी गाँव पहुँचे, तो उन्होंने स्थानीय लोगों और महिलाओं से बेहद सादगी के साथ बातचीत की। इसी दौरान गाँव की महिलाओं ने अपनी झिझक तोड़ते हुए साहब के सामने अपने दिल की बात रख दी। महिलाओं ने कहा, "साहब... हम जिंदगीभर इसी जंगल में कैद रहे। कभी बनारस नहीं देखा। हमारी बस एक ही इच्छा है कि जीते-जी एक बार बाबा काशी विश्वनाथ के दर्शन करा दीजिए।" डीआईजी ने ग्रामीणों की इस फरियाद को बेहद गंभीरता से लिया और मुस्कुराते हुए वादा किया कि उनका यह सपना जल्द ही पूरा होगा।

जब गाँव पहुँची पुलिस की बस, तो उत्सव जैसा था माहौल
डीआईजी वैभव कृष्ण ने अपना वादा निभाने में देर नहीं की। सोमवार की सुबह पंडी गाँव के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई। जैसे ही पुलिस विभाग द्वारा भेजी गई बस जंगल का रास्ता पार करते हुए गाँव पहुँचे, चारों तरफ उत्साह का माहौल बन गया। बच्चे खुशी से शोर मचाने लगे और दौड़ पड़े। महिलाएँ अपने सबसे अच्छे कपड़े पहनकर बस की तरफ बढ़ीं, तो बुजुर्गों ने हाथ जोड़कर भगवान का शुक्रिया अदा किया। गाँव के कई परिवार और बुजुर्ग ऐसे थे, जो अपने पूरे जीवन में पहली बार नौगढ़ की सीमा से बाहर कदम रख रहे थे। बस जैसे ही आगे बढ़ी, बच्चों की किलकारियाँ और महिलाओं की मुस्कान बता रही थी कि आज उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा दिन है।

बाबा के दरबार में छलक पड़े श्रद्धा के आँसू
वाराणसी पहुँचकर जब ग्रामीणों ने भव्य काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रवेश किया, तो माहौल पूरी तरह भक्तिमय और भावुक हो गया। वर्षों से मन में दबाकर रखा गया सपना जब आँखों के सामने हकीकत बनकर आया, तो कई महिलाओं के सब्र का बांध टूट गया और उनकी आँखों से आँसू बह निकले।

गाँव की सरस्वती ने भारी आवाज में कहा, "जैसे ही बाबा विश्वनाथ के सामने पहुँचे, हाथ अपने आप जुड़ गए और रोना आ गया। हमने अपने बच्चों और पूरे गाँव की खुशहाली की मन्नत माँगी है। आज लगता है हमारी जिंदगी सफल हो गई।" वहीं एक अन्य बुजुर्ग महिला बेहद भावुक होकर बोलीं, "हमने तो पूरी जिंदगी इसी जंगल में काट दी। कभी सोचा नहीं था कि बाबा के दर्शन हो पाएँगे। अब अगर मौत भी आ जाए, तो कोई गम नहीं है। हमारी जैसी गरीब महिलाओं की सुनने वाले डीआईजी साहब को बाबा हमेशा खुश रखें।"

मॉल की चकाचौंध देख हैरान रह गए बच्चे और बुजुर्ग
बाबा विश्वनाथ धाम और संकट मोचन मंदिर में माथा टेकने के बाद, पुलिस प्रशासन की टीम इन सभी ग्रामीण मेहमानों को बनारस के प्रसिद्ध जेएचवी (JHV) मॉल लेकर गई। मॉल के अंदर कदम रखते ही बच्चों और महिलाओं के कदम ठिठक गए। वहाँ की चमचमाती रोशनी, काँच की ऊँची दीवारें, स्वचालित सीढ़ियाँ (एस्केलेटर) और सजी-धजी दुकानें देखकर वे दंग रह गए। टीवी के परदे पर दिखने वाली दुनिया को सामने देखकर एक महिला मुस्कुराते हुए बोली, "ऐसा लग रहा है जैसे हम किसी दूसरी ही दुनिया में आ गए हैं।" वहीं एक छोटी बच्ची ने अपनी माँ का पल्लू खींचते हुए मासूमियत से पूछा, "अम्मा... क्या हम यहाँ दोबारा आएँगे?" यह सुनते ही वहाँ मौजूद सभी लोगों के चेहरे खिल उठे।

'डीआईजी साहब के रूप में खुद बाबा हमारे गाँव आए थे'
शाम को जब यह दल वापस अपने गाँव पंडी लौटा, तो पूरे इलाके में सिर्फ इसी यात्रा की चर्चा थी। ग्रामीणों ने अपनी भावनाएँ व्यक्त करते हुए कहा कि यह यात्रा उनके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं थी। गाँव की महिलाओं का कहना था, "हम तो यही मानते हैं कि बाबा विश्वनाथ ही डीआईजी साहब के रूप में हमारे गाँव आए थे, नहीं तो हम गरीबों की सुध कौन लेता? हम जब भी महादेव को याद करेंगे, डीआईजी साहब का चेहरा हमारे सामने आ जाएगा।"

अपनी मिट्टी और पहाड़ का पानी साथ ले गए थे ग्रामीण
इस पूरी यात्रा के दौरान प्रकृति और अपनी मिट्टी से जुड़ाव का एक बेहद खूबसूरत नजारा भी देखने को मिला। गाँव से निकलते वक्त ग्रामीण अपने क्षेत्र के पहाड़ों से निकलने वाले प्राकृतिक और शुद्ध जल को डिब्बों और गैलनों में भरकर अपने साथ ले गए थे। उनका कहना था कि वे चाहे जहाँ भी चले जाएँ, उन्हें अपने गाँव के पानी से ज्यादा मीठा कुछ नहीं लगता। पूरी यात्रा के दौरान उन्होंने इसी पानी से अपनी प्यास बुझाई।

पूरे नौगढ़ इलाके में हो रही है इस मानवीय पहल की तारीफ
पंडी गाँव के वनवासियों की यह अनूठी यात्रा अब पूरे नौगढ़ क्षेत्र में एक मिसाल बन चुकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऊँचे सरकारी पदों पर बैठकर आदेश देना तो बहुत आसान होता है, लेकिन किसी गरीब और पिछड़े वर्ग के व्यक्ति के जीवन का सबसे बड़ा सपना पूरा कर देना ही सच्ची जनसेवा है। डीआईजी वैभव कृष्ण की इस पहल ने न केवल पुलिस और जनता के बीच की दूरी को मिटाया है, बल्कि सरकारी व्यवस्था में लोगों का भरोसा भी कई गुना बढ़ा दिया है। वनवासी परिवारों के लिए यह यात्रा सिर्फ एक सैर नहीं, बल्कि जीवनभर संजोकर रखने वाली एक भावुक और पवित्र तीर्थयात्रा बन गई है।